Bahe So Ganga : Dark Zone Mein Badalta Uttar Bharat

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Author:

Manjit Thakur

Language:

Hindi

Category:

Other

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बहे सो गंगा सामान्यतः जल के आसन्न विश्वव्यापी संकट और विशेषतः भारत में गंगा और अन्य नदियों के सामने मौजूद ख़तरे को संबोधित सिर्फ़ एक किताब नहीं बल्कि एक चेतावनी है। लगातार बढ़ती जनसंख्या, प्रकृति का दोहन करनेवाली विकास-परियोजनाएँ, पानी के समुचित संरक्षण को लेकर समाज और सरकारों की लापरवाही, पर्यावरण असन्तुलन, जलवायु परिवर्तन, और अन्य अनेक कारणों से दुनिया-भर की नदियों में पानी कम हो रहा है। वे नदियाँ जो पूरे साल बहा करती थीं, मौसमी नदियों में बदल गई हैं। अनेक शोध-सर्वेक्षणों, सरकारी-गैरसरकारी रिपोर्टों और निजी स्तर पर किए गए राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय अध्ययनों का उपयोग करते हुए लिखी गई यह किताब इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या नदियाँ मर जाएँगी! लेखक की चिन्ता है कि इस मुद्दे पर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाहों को अनदेखा किया जा रहा है, और सारा ध्यान फौरी फायदों तक सिमटकर रह गया है। वे कहते हैं कि ऐसा समय आ सकता है जब मुफ्त बिजली और वाई-फाई के बजाय राजनीतिक दल रसोई और पीने के लिए पर्याप्त जल के नाम पर वोट माँगेंगे! नदियों के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक आयामों और उनके चिन्ताजनक भविष्य पर साथ-साथ विचार करती हुई यह तथ्यपरक किताब हर किसी को पढ़नी चाहिए।

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ISBN
9789360862367
Pages
320
Avg Reading Time
11 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

बहे सो गंगा सामान्यतः जल के आसन्न विश्वव्यापी संकट और विशेषतः भारत में गंगा और अन्य नदियों के सामने मौजूद ख़तरे को संबोधित सिर्फ़ एक किताब नहीं बल्कि एक चेतावनी है। लगातार बढ़ती जनसंख्या, प्रकृति का दोहन करनेवाली विकास-परियोजनाएँ, पानी के समुचित संरक्षण को लेकर समाज और सरकारों की लापरवाही, पर्यावरण असन्तुलन, जलवायु परिवर्तन, और अन्य अनेक कारणों से दुनिया-भर की नदियों में पानी कम हो रहा है। वे नदियाँ जो पूरे साल बहा करती थीं, मौसमी नदियों में बदल गई हैं।

अनेक शोध-सर्वेक्षणों, सरकारी-गैरसरकारी रिपोर्टों और निजी स्तर पर किए गए राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय अध्ययनों का उपयोग करते हुए लिखी गई यह किताब इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या नदियाँ मर जाएँगी!

लेखक की चिन्ता है कि इस मुद्दे पर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाहों को अनदेखा किया जा रहा है, और सारा ध्यान फौरी फायदों तक सिमटकर रह गया है। वे कहते हैं कि ऐसा समय आ सकता है जब मुफ्त बिजली और वाई-फाई के बजाय राजनीतिक दल रसोई और पीने के लिए पर्याप्त जल के नाम पर वोट माँगेंगे!

नदियों के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक आयामों और उनके चिन्ताजनक भविष्य पर साथ-साथ विचार करती हुई यह तथ्यपरक किताब हर किसी को पढ़नी चाहिए।

Book Details

  • ISBN
    9789360862367
  • Pages
    320
  • Avg Reading Time
    11 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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