Sukhan Tumhare
(0)
Author:
Alys Faiz, Zafar Eqbal, Faiz Ahmed 'Faiz', Faiz Ahmad 'Faiz'Publisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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1951 की एक सुबह उर्दू के मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के घर पर छापा पड़ा और उन्हें रावलपिंडी साज़िश केस में उनके घर से गिरफ़्तार किया गया। घर से ले जाते वक़्त उन्हें कपड़े तक बदलने की मोहलत नहीं दी गई। फ़ैज़ के परिवार पर ये एक मुसीबत के दौर का आग़ाज़ था। उनकी पत्नी एलिस के अलावा उनकी दो लड़कियाँ मुनीज़ा और सलीमा भी अब लाहौर में अकेली रह गई थीं। मगर इस मुसीबत का सामना फ़ैज़ और एलिस ने जिस बहादुरी और हिम्मत से किया और अपने आपसी प्रेम को इस हिज्र और फ़ासले में और गहरा करते हुए, अपनी मोहब्बत के धारे को दुखी इनसानों के दर्दो ग़म को समझने की तरफ़ जिस तरह मोड़ा, ये बात इन ख़तों को पढ़ने से पता चलती है। इन ख़तों में जहाँ एक तरफ़ फ़ैज़ की बे-परवा, आज़ाद और शायराना फ़ितरत का पता मिलता है, वहीं एलिस के जज़्बे, याद के दुःख और राज्य से सीधे टकरा जाने का जज़्बा भी साफ़ दिखाई देता है। हम इन ख़तों को पढ़ कर ही जान पाते हैं कि अगर ये हादसा फ़ैज़ की ज़िन्दगी में न गुज़रा होता तो हम फ़ैज़ की उस बाग़ी शायरी से शायद महरूम रहते जिसने उनसे इनसान की उस हिम्मत पर यादगार नज़्में और ग़ज़लें लिखवाईं, जिसे कोई भी रियासत, कैसी भी सियासत क़ैद में डाल कर फ़ना नहीं कर सकती। उसकी आवाज़ को रोकना ना-मुमकिन है, जैसा कि फ़ैज़ ने लिखा था— मता-ए-लौह-ओ-क़लम छिन गई तो क्या ग़म है कि ख़ून-ए-दिल में डुबो ली हैं उंगलियाँ मैंने ज़बाँ पे मुहर लगी है तो क्या कि रख दी है हर एक हल्क़ा-ए-ज़ंजीर में ज़बाँ मैंने
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1951 की एक सुबह उर्दू के मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के घर पर छापा पड़ा और उन्हें रावलपिंडी साज़िश केस में उनके घर से गिरफ़्तार किया गया। घर से ले जाते वक़्त उन्हें कपड़े तक बदलने की मोहलत नहीं दी गई। फ़ैज़ के परिवार पर ये एक मुसीबत के दौर का आग़ाज़ था। उनकी पत्नी एलिस के अलावा उनकी दो लड़कियाँ मुनीज़ा और सलीमा भी अब लाहौर में अकेली रह गई थीं। मगर इस मुसीबत का सामना फ़ैज़ और एलिस ने जिस बहादुरी और हिम्मत से किया और अपने आपसी प्रेम को इस हिज्र और फ़ासले में और गहरा करते हुए, अपनी मोहब्बत के धारे को दुखी इनसानों के दर्दो ग़म को समझने की तरफ़ जिस तरह मोड़ा, ये बात इन ख़तों को पढ़ने से पता चलती है। इन ख़तों में जहाँ एक तरफ़ फ़ैज़ की बे-परवा, आज़ाद और शायराना फ़ितरत का पता मिलता है, वहीं एलिस के जज़्बे, याद के दुःख और राज्य से सीधे टकरा जाने का जज़्बा भी साफ़ दिखाई देता है।
हम इन ख़तों को पढ़ कर ही जान पाते हैं कि अगर ये हादसा फ़ैज़ की ज़िन्दगी में न गुज़रा होता तो हम फ़ैज़ की उस बाग़ी शायरी से शायद महरूम रहते जिसने उनसे इनसान की उस हिम्मत पर यादगार नज़्में और ग़ज़लें लिखवाईं, जिसे कोई भी रियासत, कैसी भी सियासत क़ैद में डाल कर फ़ना नहीं कर सकती। उसकी आवाज़ को रोकना ना-मुमकिन है, जैसा कि फ़ैज़ ने लिखा था—
मता-ए-लौह-ओ-क़लम छिन गई तो क्या ग़म है
कि ख़ून-ए-दिल में डुबो ली हैं उंगलियाँ मैंने
ज़बाँ पे मुहर लगी है तो क्या कि रख दी है
हर एक हल्क़ा-ए-ज़ंजीर में ज़बाँ मैंने
Book Details
-
ISBN9789360867843
-
Pages400
-
Avg Reading Time13 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव वैष्णव धर्म के विकास में एक चमत्कारी घटना है। एक गहरे आवेश और भावनात्मकता के साथ सारे जनसामान्य तक वैष्णव धर्म को पहुँचाने का काम पहले बंगाल में और बाद में सम्पूर्ण देश में, चैतन्य महाप्रभु ने किया। मधुर भाव की नाम–संकीर्तन पद्धति चैतन्य की देन है। इसी के साथ वैष्णव धर्म ने एक नए युग में प्रवेश किया। प्रस्तुत पुस्तक में पहली बार चैतन्य के व्यक्तित्व के इस योगदान को सम्पूर्णता के साथ उजागर किया गया है।
लेकिन इस पुस्तक का उद्देश्य मात्र इतना ही नहीं है। विद्वान लेखक ने चैतन्य के व्यक्तित्व को तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियों में भी रखकर देखा है। अपने समय के इतिहास में चैतन्य का व्यक्तित्व एक चुनौती की तरह उभरा और पराजित हिन्दू जाति को एक नई आस्था और नए आलोक से संयुक्त करने का काम भी चैतन्य ने किया।
उपन्यासकार नागर जी की लेखनी से प्रस्तुत चैतन्य की यह जीवनी पढ़ने पर एक उपन्यास का मज़ा तो देती है, साथ ही वैष्णव धर्म के उदार पथ के विकास में उनका महत्त्वपूर्ण और अद्वितीय योगदान भी सामने लाती है।
Joothan-2
- Author Name:
Omprakash Valmiki
- Book Type:

- Description:
जूठन’ ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा है। इसका पहला भाग बरसों पहले प्रकाशित होकर, आज हिन्दी दलित साहित्य और खासकर आत्मकथाओं की शृंखला में एक विशेष स्थान प्राप्त कर चुका है। वाल्मीकि जी अब हमारे बीच नहीं हैं, अपने जीवन-काल में उन्होंने 'जूठन’ के बाद साहित्य, समाज और संवेदना के दायरों में एक लम्बी यात्रा पूरी की। कई कथात्मक और आलोचनात्मक कृतियों के साथ उनके काव्य-संग्रह भी आए। 'जूठन’ का यह दूसरा भाग उनके उसी दौर का आख्यान है। आत्मकथा के इस दूसरे भाग की शुरुआत उन्होंने देहरादून की आर्डिनेंस फैक्ट्री में अपनी नियुक्ति से की है। नई जगह पर अपनी पहचान को लेकर आई समस्याओं के साथ-साथ यहाँ मजदूरों के साथ जुड़ी अपनी गतिविधियों का जिक्र करते हुए उन्होंने अपनी साहित्यिक सक्रियता का भी विस्तार से उल्लेख किया है। सहज, प्रवाहपूर्ण और आत्मीय भाषा में लिखी गई यह पुस्तक देहरादून से जबलपुर और वहाँ से पुन: देहरादून की यात्रा करती हुई शिमला उच्च अध्ययन संस्थान और फिर उनके अस्वस्थ होने तक जाती है। दलित साहित्य के वर्तमान परिदृश्य में 'जूठन’ के इस दूसरे भाग को पढ़ना एक अलग अनुभव है।
Mera Pariwar
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत पुस्तक में महादेवी वर्मा जी ने कुछ विशिष्ट मानवेतर प्राणियों के प्रति अपनी जिस सहज, सौहाद्र और एकांत आत्मीयता की अभिव्यंजना का जो अपूर्व कला-कौशल अपने इन चित्रों में व्यक्त किया है, वह केवल उनकी अपनी ही कला की विशिष्टता की दृष्टि से नहीं वरन् संसार-साहित्य की इस कोटि की कला के समग्र क्षेत्र में भी बेमिसाल और बेजोड़ हैं। ये कृतियाँ मानवीय भावज्ञता, संवेदना और कलात्मक प्रतिभा के अपूर्व निदर्शन की दृष्टि से शाब्दिक अर्थ में अपूर्व ओर अद्भुत कलात्मक चमत्कार के नमूने हैं।
Jeete Jee Allahabad
- Author Name:
Mamta Kaliya +1
- Book Type:

- Description:
जीते जी इलाहाबाद सिर्फ संस्मरणात्मक कृति नहीं है, एक यात्रा है जिसमें हमें अनेक उन लोगों के शब्दचित्र मिलते हैं जिनके बिना आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास नहीं लिखा जा सकता और जो उस समय के इलाहाबाद के मन-प्राण होते थे।
Khamosh Logon Ki Or Se By Dalai Lama
- Author Name:
Dalai Lama
- Book Type:

- Description:
परम पूज्य दलाई लामा – खामोश लोगों की ओर से यह पुस्तक परम पूज्य दलाई लामा की आत्मकथात्मक कृति Voice for the Voiceless का हिंदी अनुवाद है। इसमें उन्होंने तिब्बत और तिब्बती लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए चीन के विरुद्ध अपने सात दशकों के शांतिपूर्ण संघर्ष को आत्मीयता से वर्णित किया है। पुस्तक में उन प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं जो चीन द्वारा तिब्बत और तिब्बतीयों को लेकर खड़े किए जाते हैं- और जो पाठकों के मन में भी स्वाभाविक रूप से उठते हैं। इसके साथ ही, अगली दलाई लामा की घोषणा और उससे जुड़ी जटिलताओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जो वर्तमान में चीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर बहस का विषय बना हुआ है। इसकी भाषा और शैली प पू दलाई लामा के व्यक्तित्व की तरह ही सहज और सरल है।
Boskiyana
- Author Name:
Gulzar +1
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- Description:
गुलज़ार से बातें...'माचिस' के, 'हू-तू' के, 'ख़ुशबू', 'मीरा' और 'आँधी' के बहुरंगी लेकिन सादा गुलज़ार से बातें...फ़िल्मों में अहसास को एक किरदार की तरह उतारनेवाले और गीतों-नज़्मों में ज़िंदगी के जटिल सीधेपन को अपनी विलक्षण उपमाओं और बिम्बों में खोलनेवाले गुलज़ार से उनकी फ़िल्मों, उनकी शायरी, उनकी कहानियों और उस मुअम्मे के बारे में बातें जिसे गुलज़ार कहा जाता है। उनके रहन-सहन, उनके घर, उनकी पसंद-नापसंद और वे इस दुनिया को कैसे देखते हैं और कैसे देखना चाहते हैं, इस पर बातें...यह बातों का एक लम्बा सिलसिला है जो एक मुलायम आबोहवा में हमें समूचे गुलज़ार से रू-ब-रू कराता है। यशवंत व्यास गुलज़ार-तत्त्व के अन्वेषी रहे हैं। वे उस लय को पकड़ पाते हैं जिसमें गुलज़ार रहते और रचते हैं। इस लम्बी बातचीत से आप उनके ही शब्दों में कहें तो 'गुलज़ार से नहाकर' निकलते हैं।
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