Daag Daag Ujala

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‘दाग़ दाग़ उजाला’ पढ़ी। अद्भुत कहानी। जातिवाद का इतना वीभत्स मानस कि वह अमरीका जाकर भी नहीं बदला, बल्कि ज्यादा क्रूर हुआ है। लेकिन तमाम बाधाओं के बीच माँ अपने बेटे के लिए जिस साहस और विश्वास से लड़ती है, वह कहानी का उत्कर्ष है। —अवधेश प्रीत प्रज्ञा उन कथाकारों में हैं जो अपनी धरती से उगते हैं और अपने समय को पढ़ते हैं। जड़खोद कहानी भी इसकी बानगी है जहाँ गंगा के रुप में स्त्री का बदलता बागी चेहरा है तो स्त्री विरोधी समाज की पड़ताल भी है। —मधु कांकरिया प्रज्ञा की कहानियों में भूमंडलीय यथार्थ की परत-दर-परत को खोलकर रखने का सफल प्रयास परिलक्षित होता है। भूमंडलीकरण, उदारीकरण, निजीकरण, कारपोरेट कल्चर, पूँजीवादी शक्तियों की स्वार्थपरता, सत्ता और पूँजी की साँठ-गाँठ, उपभोक्तावादी संस्कृति की दुश्वारियों आदि से प्रपीड़ित आम जन-जीवन की व्यथा और उनकी जिजीविषा को कहानियों में अभिव्यक्त किया गया है। —अरुण होता

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ISBN
9789347043185
Pages
168
Avg Reading Time
6 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

‘दाग़ दाग़ उजाला’ पढ़ी। अद्भुत कहानी। जातिवाद का इतना वीभत्स मानस कि वह अमरीका जाकर भी नहीं बदला, बल्कि ज्यादा क्रूर हुआ है। लेकिन तमाम बाधाओं के बीच माँ अपने बेटे के लिए जिस साहस और विश्वास से लड़ती है, वह कहानी का उत्कर्ष है।

—अवधेश प्रीत

प्रज्ञा उन कथाकारों में हैं जो अपनी धरती से उगते हैं और अपने समय को पढ़ते हैं। जड़खोद कहानी भी इसकी बानगी है जहाँ गंगा के रुप में स्त्री का बदलता बागी चेहरा है तो स्त्री विरोधी समाज की पड़ताल भी है।

—मधु कांकरिया

प्रज्ञा की कहानियों में भूमंडलीय यथार्थ की परत-दर-परत को खोलकर रखने का सफल प्रयास परिलक्षित होता है। भूमंडलीकरण, उदारीकरण, निजीकरण, कारपोरेट कल्चर, पूँजीवादी शक्तियों की स्वार्थपरता, सत्ता और पूँजी की साँठ-गाँठ, उपभोक्तावादी संस्कृति की दुश्वारियों आदि से प्रपीड़ित आम जन-जीवन की व्यथा और उनकी जिजीविषा को कहानियों में अभिव्यक्त किया गया है।

—अरुण होता

Book Details

  • ISBN
    9789347043185
  • Pages
    168
  • Avg Reading Time
    6 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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