Shipra Ek Nadi Ka Naam Hai
(0)
Author:
Ashok BhowmickPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
200
164 (18% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Novel
Read moreYou pay ₹999/Year
You will be auto-charged ₹999 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Prime Plus
Author-signed copy
25% off on all MRP of books
Book Recomendation Per Year
Delivery is free for the entire year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
Novel
Book Details
-
ISBN9789381923108
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Monalisa Hans Rahi Thi
- Author Name:
Ashok Bhowmick
- Book Type:

- Description:
Hindi novel based on paintings arts and monalisa by Ashok Bhowmick
Akal Ki Kala Aur Zainul Abedin
- Author Name:
Ashok Bhowmick
- Book Type:

- Description:
Arts & Biographical
Samkalin Bhartiya Chitrakala : Husain Ke Bahane
- Author Name:
Ashok Bhowmick
- Book Type:

- Description:
Arts
Jeewanpurhat Junction
- Author Name:
Ashok Bhowmick
- Book Type:

- Description:
Memoirs
Aais-Paais
- Author Name:
Ashok Bhowmick
- Book Type:

- Description:
Short Stories
Bhoole-Bisre Chitra
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

- Description:
एक महान् कृति, भारतीय समाज और परिवार के विकास की विविध दिशाओं और रूपों का एक विराट एवं प्रभावोत्पादक चित्र। -डॉ. एस.एन. गणेशन निकट अतीत के चित्रों का एक एलबम—वह अतीत जिसे वर्तमान पीढ़ी को न भूलना चाहिए और न जिससे विमुख ही होना चाहिए, क्योंकि उसी में हमारे नए जीवन का बीजारोपण हुआ था। परिवार के चित्रों के एलबम के विपरीत इस एलबम के चित्र धुँधले नहीं पड़े हैं, क्योंकि कैमरा एक ही रहा है। लैंसों का प्रयोग इस कुशलता से किया गया है कि चित्र बिल्कुल साफ़ और हूबहू अंकित हुए हैं, दूरी ने उन्हें धुँधला नहीं किया है, भावातिरेक या दुःख ने विकृत नहीं किया है। —जगदीशचन्द्र माथुर
IAS Today
- Author Name:
Prof.. Vikas Sharma
- Book Type:


- Description:
लालच की दुनिया को वैराग्य की दुनिया से जोड़ते हुए, आईएएस टुडे एक गांधीवादी रोमेश की कहानी है, जो अपने प्रशिक्षण अवधि के दौरान त्रिशला वासु से शादी कर लेता है और बाद में अपनी सर्वोत्तम क्षमताओं से अपराधों को जड़ से खत्म करने की कोशिश करता है। उसी दुनिया में टिन्नी भी है, जो कुलीन माता-पिता का बेटा है, जो एक रिंग लीडर बन जाता है और काले, पेनी, वल्लू और गन्नू के साथ अपना गिरोह बनाता है और कांति, रेवती और स्वाति के साथ एक कामुक जीवन जीता है। उसके पाप का पिटारा पहले से ही भरा हुआ है, क्या उसे अपने दुष्कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ेगा? मजबूत महिला पात्रों के साथ, उपन्यास पाठकों को प्रेम और वासना, हिंसा और अहिंसा, देहाती और शहरी जीवन के बीच संघर्ष प्रस्तुत करता है। अभी भी इस सवाल का जवाब मिलना बाकी है कि क्या फैंसी एक धोखा देने वाली योगिनी है?
Krishnakali
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

- Description:
पाठक किसी पात्र से एकत्व स्थापित कर लेता है; जब उसका अपमान उसकी वेदना बन जाता है, तब ही लेखनी की सार्थकता को हम मान्यता दे पाते हैं। जब ‘कृष्णकली’ लिख रही थी तब लेखनी को विशेष परिश्रम नहीं करना पड़ा, सब कुछ स्वयं ही सहज बनता चला गया था। जहाँ क़लम हाथ में लेती, उस विस्तृत मोहक व्यक्तित्व को, स्मृति बड़े अधिकारपूर्ण लाड़-दुलार से खींच, सम्मुख लाकर खड़ा कर देती, जिसके विचित्र जीवन के रॉ-मैटीरियल से मैंने वह भव्य प्रतिमा गढ़ी थी। ओरछा की मुनीरजान के ही ठसकेदार व्यक्तित्व को सामान्य उलट-पुलटकर मैंने पन्ना की काया गढ़ी थी। जब लिख रही थी तो बार-बार उनके मांसल मधुर कंठ की गूँज कानों में गूँज उठती। वही विस्तृत मधुर गूँज, उनके नवीन व्यक्तित्व के साथ, ‘कृष्णकली’ में उतर आई। —शिवा
Lohe Ke Pankh
- Author Name:
Himanshu Shrivastava
- Book Type:

- Description:
लोहे के पंख दलित समुदाय से आने वाले एक व्यक्ति की आपबीती के जरिये भारतीय किसान-मजदूरों के कठिन-कठोर जीवन-संघर्ष का जैसा ज़मीनी और विशद चित्र प्रस्तुत करता है, वैसा कम ही उपन्यासों में देखने को मिलता है। आज़ादी के पहले और बाद के लगभग तीन दशकों की पृष्ठभूमि में विन्यस्त और बिहार के ग्रामीण और शहरी समाज को समेटे यह उपन्यास तत्कालीन परिस्थितियों को अंकित करते हुए जिन सामाजिक-राजनीतिक विषमताओं को उजागर करता है वे आज भी समाप्त नहीं हुई हैं। सामन्ती वर्चस्व और अत्याचार, दलितों का शोषण-उत्पीड़न, राजनीतिक दलों की कथनी-करनी का अन्तर...आज भी आम हैं। ‘लोहे के पंख’ जिस समय—बीसवीं सदी के छठे दशक में—लिखा गया था उस समय हिन्दी साहित्य में दलित प्रश्न इतना केन्द्रीय और मुखर नहीं था। इस नजरिये से देखें तो हिमांशु श्रीवास्तव का एक दलित पात्र को अपने उपन्यास का नायक बनाकर उसके मुख से ही समय-समाज की पड़ताल कराना विशेष महत्व रखता है।
Parth Tumhen Jina Hoga
- Author Name:
Jyoti Jain
- Book Type:

- Description:
Book
Nishpran Gawaah
- Author Name:
Kadambari Mehra
- Book Type:

- Description:
Book
Mujhe Pahchano
- Author Name:
Sanjeev
- Book Type:

- Description:
‘मुझे पहचानो’ परम्परा और संस्कृति को एक नई रोशनी में देखने वाला उपन्यास है। इसकी कथा एक ऐसी रियासत से शुरू होती है जिसके लिए सती जैसी नृशंस प्रथा सांस्कृतिक गौरव की हैसियत रखती है। इसके पात्र एक ऐसे समाज में साँस ले रहे हैं जिसमें समानता, स्वतंत्रता और बन्धुत्व जैसे मानवीय मूल्य आकाशकुसुम बने हुए हैं, लेकिन जिसका प्रभुवर्ग अपने कथित सांस्कृतिक गौरव को यथावत रखने के लिए शुचिता को एक अपरिहार्य आवश्यकता बनाकर थोपे हुए है। यह शुचिता है वर्ण की, वर्ग की और रक्त की। लैंगिक और यौन शुचिताएँ भी इसमें शामिल हैं। आश्चर्य नहीं कि पुरुष-वर्चस्व पर टिके इस समाज में सती-प्रथा को व्याधि नहीं, अपनी विशेषता समझा जाता है और उसका धार्मिक-सांस्कृतिक महिमामंडन किया जाता है। इस जड़ता की जड़ें इतने गहरे धँसी हैं कि अधिकतर स्त्रियाँ भी सती को श्रद्धा की निगाह से देखती हैं। यह उपन्यास इसी छद्म गौरवबोध को अनावृत करता है। पुरुष-सत्ता की चालाकियों और उससे उत्पन्न सामाजिक ठहराव को तोड़ते हुए इस उपन्यास की कथा धर्म और धन के घातक गठजोड़ को भी बहुत ठोस रूप में पाठकों के सामने रखती है। संजीव का कथा-लेखन समूचे हिन्दी कथा-संसार में विशिष्ट इसलिए है कि उनकी लेखनी अविचलित भाव से न सिर्फ समाज की कथा कहती है, बल्कि हमें एक वैज्ञानिक दृष्टि देते हुए तर्कों और तथ्यों से भी समृद्ध करती है।
Kuber
- Author Name:
Dr. Hansa Deep
- Book Type:

- Description:
Book
Karm Path Par
- Author Name:
Aashish Kumar Trivedi
- Book Type:

- Description:
novels
The Hidden Hindu
- Author Name:
Akshat Gupta
- Book Type:

- Description:
इक्कीस साल का पृथ्वी एक अधेड़ और रहस्यमयी अघोरी ओम् शास्त्री की तलाश कर रहा है, जिसे पकड़कर भारत के एक सुनसान द्वीप पर अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच भेज दिया गया | विशेषज्ञों की एक टीम ने जब उस अघोरी को नशे की दवा दी और पूछताछ के लिए सम्मोहित किया, तो उसने दावा किया कि वह सभी चार युगों-सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग–(हिंदू धर्म के अनुसार चार युग) को देख चुका है और रामायण तथा महाभारत की घटनाओं में हिस्सा ले चुका है | जीवन के बाद मृत्यु के नियम को भी बेअसर साबित करनेवाले ओम् के अविश्वसनीय अतीत से जुड़े खुलासे सभी को हैरान कर देते हैं। उस टीम को यह भी पता चला कि ओम् हर युग के दूसरे अमर लोगों की भी तलाश कर रहा है। ऐसे विचित्र रहस्य अगर सामने आ गए तो प्राचीन धारणाएँ हिल जाएँगी और भविष्य की दिशा ही बदल जाएगी। तो यह ओम् शास्त्री कौन है? उसे पकड़ा क्यों गया? पृथ्वी उसे क्यों ढूँढ़ रहा है? सवार हो जाइए ओम् शास्त्री के रहस्यों, पृथ्वी की तलाश और हिंदू पौराणिक कथाओं के रहस्यों से भरे अन्य अमर लोगों के कारनामों की इस नाव पर, और चलिए एक रोचक और रोमांचक यात्रा पर|
Neem Ka Ped
- Author Name:
Rahi Masoom Raza
- Book Type:

- Description:
“मैं अपनी तरफ़ से इस कहानी में कहानी भी नहीं जोड़ सकता था। इसीलिए इस कहानी में आपको हदें भी दिखाई देंगी और सरहदें भी। नफ़रतों की आग में मोहब्बत के छींटे दिखाई देंगे। सपने दिखाई देंगे तो उनका टूटना भी।...और इन सबके पीछे दिखाई देगी सियासत की काली स्याह दीवार। हिन्दुस्तान की आज़ादी को जिसने निगल लिया। जिसने राज को कभी भी सु-राज नहीं होने दिया। जिसे हम रोज़ झंडे और पहिए के पीछे ढूँढ़ते रहे कि आख़िर उसका निशान कहाँ है? गाँव मदरसा ख़ुर्द और लछमनपुर कलाँ महज़ दो गाँव-भर नहीं हैं और अली ज़ामिन खाँ और मुस्लिम मियाँ की अदावत बस दो ख़ालाज़ाद भाइयों की अदावत नहीं है। ये तो मुझे मुल्कों की अदावत की तरह दिखाई देती है, जिसमें कभी एक का पलड़ा झुकता दिखाई देता है तो कभी दूसरे का और जिसमें न कोई हारता है, न कोई जीतता है। बस, बाक़ी रह जाता है नफ़रत का एक सिलसिला... “मैं शुक्रगुज़ार हूँ उस नीम के पेड़ का जिसने मुल्क को टुकड़े होते हुए भी देखा और आज़ादी के सपनों को टूटे हुए भी देखा। उसका दर्द बस इतना है कि वह इन सबके बीच मोहब्बत और सुकून की तलाश करता फिर रहा है।”
Saanjh Hui Ghar Aaye
- Author Name:
Om Prakash Sharma
- Book Type:

- Description:
अशोक के जीवन में अचानक आई दौलत उसे वह सब कुछ दे देती है, जिसकी कभी उसने कल्पना की थी—लेकिन सुख नहीं। अतीत की स्मृतियाँ, बेला का निश्छल स्नेह, हेमावती का चंचल प्रेम और संतोष की ममता उसके भीतर चल रहे द्वंद्व को और गहरा कर देते हैं। रिश्तों, प्रेम, त्याग और सामाजिक मर्यादाओं के बीच अशोक बार-बार ऐसे मोड़ पर खड़ा होता है जहाँ धन से अधिक मूल्यवान इंसानी भावनाएँ साबित होती हैं। जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का यह सामाजिक उपन्यास प्रेम, परिवार और जीवन के कटु-सुखद यथार्थ को बेहद संवेदनशील और रोचक ढंग से प्रस्तुत करता है।
Mujhe Sooraj Chahiye
- Author Name:
Akash Mathur
- Book Type:


- Description:
‘मुझे चाँद चाहिए’ की जगह ‘मुझे सूरज चाहिए’ की सशक्त दावेदारी ठोकती तीन अलग-अलग आयु वर्ग की स्त्रियाँ। जो अपने ही साथ भगवान या तथाकथित भगवान की भी आज़ादी की माँग करती हैं। मुझे चाँद चाहिए ये इच्छा जहाँ एक सादगी भरी सौम्य ऊँचाई की, अस्तित्व की माँग हैं। वहीं मुझे सूरज चाहिए अधिक उग्र किंतु आत्मविश्वास से सूरज को सम्भाल लेने की भावना को इंगित करती है। ये किसी ऐसे फ़रियादी की फ़रियाद भी लगती है जो सहनशक्ति के आख़िरी छोर पर आ पहुँचा है और अब चाँद की शीतलता भरी ऊँचाई नहीं आकाश के भाल पर चमकते सूरज की गर्मी ही उसे ठंडक दे सकती है। आकाश माथुर का लिखा ये उपन्यास शिवना प्रकाशन से आया है। जिसका विमोचन 2024 के विश्व पुस्तक मेला नई दिल्ली में हुआ। इस से पहले उनका उपन्यास ‘उमेदा-एक योद्धा नर्तकी’ सफलता अर्जित कर चुका है और आज भी चर्चित है। इस उपन्यास की कहानी शुरू होती है एक सम्भ्रांत परिवार की मध्य-आयु की एक विधवा के सादे जीवन के साथ जिसे एक भरा-पूरा संयुक्त परिवार बहुत सम्मान के साथ देखता है और पूजता है। साथ ही परिवार की एक पुत्र-वधू और उसकी बेटी के अपने-अपने पीढ़िगत संघर्षों को उपन्यास बहुत संवेदना के साथ चित्रित करता है। मध्य-प्रदेश के ग्रामीण समाज की कुरितियों को बहुत विस्तार से आकाश स्पष्ट करते हैं। ये सामाजिक कुरीतियाँ आख़िर तो स्त्री के मन और तन को रौंद कर की ख़ुद को जीवित रखें हुए हैं। वो फिर चाहे शादी की आटा-साटा प्रथा हो या नातरा। आटा-साटा में जहाँ वार या वधू के ससुराल के ही किसी महिला या पुरुष से घर की किसी महिला या पुरुष की शादी कर दी जाती हैं। यानि ये ज़रुरी नहीं आप ससुराल में जाकर अपनी बहन के ननदोई ही बने, आप उसके दामाद भी बन सकते हैं। जिन अयोग्य पात्रों की शादी ना हो रही हो वहाँ प्रभावी परिवार दूसरे परिवार पर इस तरह का दबाव बना लेता है। जिस में आर्थिक कमजोरी सबसे बड़ा कारण होता है। इसी प्रकार नातरा में दूसरी शादी आपसी सहमति से तलाक़ ले कर ली जाती है और दूसरी शादी के एवज़ में परिवार बड़ी रक़म कमाता है। इसमें स्त्री को एक घर से उठ दूसरे घर जा बसने की पीड़ा से गुजरना पड़ता है। रमा ऐसे ही आटा-साटा की चपेट में आकर अपने ही भाई की विधवा सास बन बैठी थी। एक पढ़ी-लिखी उमंगो से भरी लड़की की एक बूढ़े व्यक्ति से शादी, उसके कौन-कौन से अरमानो को तिरोहित करती है इसका वर्णन लेखक ने बहुत संवेदनशीलता के साथ किया है। जंगल को, प्रकृति को सम्मान देना और पूजना हमारी परम्परा है और ये उसकी जीवनदायिनी शक्ति का सम्मान व आदर है। जिसे पूजते-पूजते हम उसकी पूजा में उसे ही नष्ट करने लगते हैं और कर्मकांडों में फँस कर स्वयं की और भगवान की ग़ुलामी की नीवों को पोषित करते हैं। इस भाव की विवेचना, कारण और निवारण पर लेखक ने खुल कर कलम चलाई है और विस्तार के साथ बहुत ही सुलझी हुई भाषा में इस विषय को बरता है। उसमें जहाँ लेखक पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समाज के उपेक्षा के सवाल उठाते हैं। वहीं वो धर्मांधता पर भी कटाक्ष करने से नहीं चूकते। आकाश के स्त्री पात्र परिस्थितियों के शिकार अवश्य हैं, लेकिन कमज़ोर नहीं हैं। और अंत में सशक्त रूप से अपने हिस्से के सूरज के लिए खड़े होते हैं। यहाँ अच्छी बात ये है कि वे एक दूसरे के दुश्मन नहीं है और बहनापे की सहायता से पित्र-सत्ता और रूढ़ियों के ख़िलाफ़ खड़ी होती हैं। जो आकाश के लेखन को सामयिक बनाता है। उपन्यास की भाषा देशकाल - अनुकूल है और सहज है। अपने पात्रों के साथ। एडिटिंग अच्छी है, इसलिए उपन्यास को बहुत अधिक लम्बाई तक ना खींच कर विषयानुसर लेखक कम में ही अपनी बात रख पाने में समर्थ है। जिसके लिए लेखक को बहुत शुभकामनाएँ। ये एक सामाजिक सरोकारों से भरा उपन्यास है जो भगवान सहित अपने पात्रों की वकालत सफलता से करता नज़र आता है। वन और प्रकृति के कुछ द्रश्य बहुत ही सुंदरता से लिखे गए हैं। वहीं स्त्रियों के सन्दर्भ में एक जगह आकाश लिखते हैं। — ‘महिलाओं की ख़ासियत है कि वे उम्र में छोटी होकर भी अपने से बड़ों पर मातृत्व न्योछावर कर देती हैं। जबकि एक छोटा पुरुष इस तरह का व्यवहार अपने से बड़े पुरुष के साथ नहीं कर सकता। असल में महिलाओं का मूल ही प्रेम है।’ वहींं एक जगह वो लिखते हैं। — ‘स्त्रियों के मन और तन पर उनका अपना अधिकार नहीं है। उस पर भी पुरुष, धर्म, समाज और पता नहीं किस-किस का क़ब्ज़ा है।’ सती को पूजना भी कहीं ना कहीं सती-प्रथा को अभी तक सही मानना ही है, परिवर्तन अपने जीवन में ला सकती है तो स्त्री ही ला सकती हैं, जैसी हिम्मत देता आकाश माथुर का ये नया उपन्यास निश्चय ही पठनीय है।
Kaath Ka Ullu
- Author Name:
Pallavi Prasad
- Book Type:

- Description:
‘काठ का उल्लू’ को ‘दोआबा’ पत्रिका में प्रकाशित करते हुए, सम्पादकीय के अन्तर्गत एक महत्त्वपूर्ण टिप्पणी की गई थी कि यह उपन्यास अपनी थीम के कारण पाठकों के बीच लोकप्रिय होगा। प्रश्न उठता है कि इस उपन्यास की ‘थीम’ है क्या? निःसन्देह इसका उत्तर एक शब्द में नहीं दिया जा सकता है। ‘काठ के उल्लू’ की थीम के कई स्तर हैं जो प्याज के छिलके की भाँति परत दर परत खुलते चले जाते हैं। सपनों में पलती नौकरशाही, अभिजात्य वर्ग की ढँकी-छुपी सच्चाई, स्याह-सफेद के बीच खिलवाड़ करती राजनीति... और एक सामान्य-सी लड़की को ‘दलित इकाई’ के रूप में बदल देने की चतुराई। अर्थात इस उपन्यास में हमारे समाज के इतने रंग हैं कि उन सबको मिला कर यदि ‘रंगामेज़ी’ शैली में कोई चित्र बनाया जाए तो वह बदरंग ही होगा, आकर्षक भले हो। जाहिर है कि यह एक जटिल यथार्थ है, जिसे एक छोटे से उपन्यास में व्यक्त कर देना आसान काम नहीं था। मगर, पल्लवी प्रसाद ने उसे बखूबी कर दिखाया है। इस उपन्यास में कई अन्य यथार्थ भी दर्ज हैं। जैसे गाँवों का ‘आधुनिक’ हो जाना, हर व्यक्ति का लगभग ‘आम आदमी’ हो जाना और अन्ततः कृष्णकान्त जैसे महत्वाकांक्षी व्यक्ति का ‘काठ का उल्लू’ बन जाना। उल्लू का पसन्दीदा समय ‘अँधेरा’ पूरे उपन्यास में आदि से अन्त तक छाया हुआ है। मगर लेखिका ने उसमें भी रोशनी की एक ‘झिरी’ देख ली है। वह है एक बूढ़ी स्त्री जो गाँव में रहती है और जो किसी की माँ है, किसी की दादी तो किसी की परदादी। वास्तव में इस ‘झिरी’ ने ही इस उपन्यास को वह सार्थकता बख्शी है, जो उसका मूल उदेश्य प्रतीत होती है। पल्लवी प्रसाद का यह उपन्यास ऐसे समय में आया है जबकि अभिजात्य वर्ग में ही नहीं बल्कि सामान्य जीवन में भी पारिवारिक सम्बन्धों की दीवारें दरक रही हैं। इसलिए इस उपन्यास का अपना अलग ही महत्त्व है। —अब्दुल बिस्मिल्लाह
Tumhari Auqat Kya Hai
- Author Name:
Piyush Mishra
- Book Type:

- Description:
पीयूष मिश्रा जब मंच पर होते हैं तो वहाँ उनके अलावा सिर्फ़ उनका आवेग दिखता है। जिन लोगों ने उन्हें मंडी हाउस में एकल करते देखा है, वे ऊर्जा के उस वलय को आज भी उसी तरह गतिमान देख पाते होंगे। अपने गीत, अपने संगीत, अपनी देह और अपनी कला में आकंठ एकमेक एक सम्पूर्ण अभिनेता! अब वे फिल्में कर रहे हैं, गीत लिख रहे हैं, संगीत रच रहे हैं; और यह उनकी आत्मकथा है जिसे उन्होंने उपन्यास की तर्ज पर लिखा है। और लिखा नहीं; जैसे शब्दों को चित्रों के रूप में आँका है। इसमें सब कुछ उतना ही ‘परफ़ेक्ट’ है जितने बतौर अभिनेता वे स्वयं। न अतिरिक्त कोई शब्द, न कोई ऐसा वाक्य जो उस दृश्य को और सजीव न करता हो। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ‘अनयूजुअल’—से परिवार में जन्मा एक बच्चा चरण-दर-चरण अपने भीतर छिपी असाधारणता का अन्वेषण करता है; और क़स्बाई मध्यवर्गीयता की कुंठित और करुण बाधाओं को पार करते हुए धीरे-धीरे अपने भीतर के कलाकार के सामने आ खड़ा होता है। अपने आत्म के सम्मुख जिससे उसे ताज़िन्दगी जूझना है; अपने उन डरों के समक्ष जिनसे डरना उतना ज़रूरी नहीं, जितना उन्हें समझना है। इस आत्मकथात्मक उपन्यास का नायक हैमलेट, यानी संताप त्रिवेदी यानी पीयूष मिश्रा यह काम अपनी ख़ुद की कीमत पर करता है। यह आत्मकथा जितनी बाहर की कहानी बताती है—ग्वालियर, दिल्ली, एनएसडी, मुम्बई, साथी कलाकारों आदि की—उससे ज़्यादा भीतर की कहानी बताती है, जिसे ऐसी गोचर दृश्यावली में पिरोया गया जो कभी-कभी ही हो पाता है। इसमें हम दिल्ली के थिएटर जगत, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और मुम्बई की फ़िल्मी दुनिया के कई सुखद-दुखद पहलुओं को देखते हैं; एक अभिनेता के निर्माण की आन्तरिक यात्रा को भी। और एक संवेदनशील रचनात्मक मानस के भटकावों-विचलनों-आशंकाओं को भी। लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि इस किताब की इसका गद्य है। पीयूष मिश्रा की कहन यहाँ अपने उरूज़ पर है। पठनीयता के लगातार संकरे होते हिन्दी परिसर में यह गद्य खिली धूप-सा महसूस होता है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book