Main Bhi Padhne Jaoongi
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Author:
Jyoti PariharPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
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मैं भी पढ़ने जाऊँगी" ज्योति परिहार द्वारा लिखी गई एक बाल-साहित्यिक पुस्तक है, जिसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने 2011 में प्रकाशित किया था। यह पुस्तक बच्चों के लिए है और इसकी कुल 28 पृष्ठ हैं।
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मैं भी पढ़ने जाऊँगी" ज्योति परिहार द्वारा लिखी गई एक बाल-साहित्यिक पुस्तक है, जिसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने 2011 में प्रकाशित किया था। यह पुस्तक बच्चों के लिए है और इसकी कुल 28 पृष्ठ हैं।
Book Details
-
ISBN9788190272001
-
Pages28
-
Avg Reading Time1 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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कास और झौआ कोसी के सर्व-सुलभ वरदान हैं, पानी और मछली की तरह। जब घर में अन्न नहीं और जेब में नगदी नहीं, तब भी हीतलाल और रमेसर जैसे लोग कुछ बोझे कास काट-बेचकर मड़ुआ-मक्के और नमक का जुगाड़ कर लेते हैं। ये माटी के लोग हैं जिनके लिये नावें सोने से भी बढ़कर हैं। सस्ते श्रम की तरह इनके जीवन में सहज प्रेम कोसी के कास-झौए की तरह ही सुलभ और जीवन का सहारा है। नाच-गाने में ये अपनी तकलीफ भूल-बिसर कर निरस से जीवन में रस घोलते हुए कठिन संघर्ष में लगे रहते हैं। कोसी के कठिन जीवन-संघर्ष के बीच अनूपी और हीतलाल जैसे चरित्रों का प्रेम इस उपन्यास की अद्भुत विशेषता है। अनूपी जैसी एक स्त्री जो पति हीतलाल का घर छोड़ नथुनी पान वाले के यहाँ रहने चली गई है, उस स्त्री के प्रेम की गहराई और उसके साथ हीतलाल का सम्मानपूर्ण जुड़ाव स्त्री-विमर्श के नये दौर में भी दुर्लभ है। इन सरल हृदयी लोगों के बीच दो सौ मन धान के 'अगों' रूप में दान-दक्षिणा पर नज़र गड़ाए नेता और अफसर का गज़ब सांकेतिक बिम्ब है। रस-सिद्ध प्रवाहमयी भाषा के धनी प्रसिद्ध उपन्यासकार मायानंद मिश्र का चमत्कार इस उपन्यास में अपने चरम पर है। यही कारण है कि प्रथम प्रकाशन के 56 वर्ष बाद भी इस उपन्यास के प्रति पाठकीय आकर्षण बरकरार है।
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