Trilochan Pandey

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डॉ. त्रिलोचन पाण्डेय अल्मोड़ा डिग्री कॉलेज में व्याख्याता के पद पर कार्य करने के उपरान्त जबलपुर विश्वविद्यालय में हिन्दी एवं भाषा विज्ञान विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष रहे। तत्पश्चात गुवाहाटी विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर रहते हुये अध्यापन कार्य किया। साहित्य सेवा त्रिलोचन पाण्डेय का लोक कथाओं का संग्रह 1954 का है। इसका शुभारम्भ आगरा विश्वविद्यालय द्वारा कुमाऊँनी लोक कथाओं और गीतों पर लिखे गए एक शोध पत्र के लिए दिये गये पुरस्कार से हुआ जिससे प्रेरित होकर उन्होंने कुमाऊँ के विभिन्न भागों से लगभग 500 लोकगीत, 80 गाथागीत, 70 लोक कथाएँ, 2000 कहावतें, 200 पहेलियाँ और बच्चों के खेल संकलित किए। इसी समय इंडियाना विश्वविद्यालय ने इलाहाबाद में एक भारतीय लोककथा संस्थान की स्थापना की और संस्थान ने 'एशियन फोकलोर स्टडीज' नामक एक पत्रिका का प्रकाशन शुरु किया। 1962 में त्रिलोचन पाण्डेय, जो उस समय अल्मोड़ा डिग्री कॉलेज में व्याख्याता थे, इंडियाना विश्वविद्यालय के लोककथा कार्यक्रम में भाग लेने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका गए। 1960 के दशक से 1980 के दशक तक लोक कथाओं और गाथा गीतों का निरंतर प्रकाशन होता रहा, जो हमेशा कुमाऊँनी और हिंदी दोनों भाषाओं में होते थे। कुमाऊँनी भाषा और उसका साहित्य (1977), बीती बातें (1977), कुमाऊँनी लोक साहित्य की पृष्ठभूमि (1979), लोक साहित्य का अध्ययन (1979), भाषा विज्ञान और हिन्दी भाषा की भूमिका (1987) इत्यादि महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित।

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