Jasinta Kerketta
Aurat Ka Ghar
- Author Name:
Jasinta Kerketta
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Book Type:

- Description: शहर के सम्पर्क और नए समय के प्रभाव में आदिवासी समाज भी अब ठीक-ठीक वैसा नहीं रहा, जैसा जंगल और प्रकृति ने उसे बनाया था। वह बदल रहा है और अफ़सोस कि अधिकतर विकृति की ओर ज़्यादा बदल रहा है। नागर सभ्यता अपनी तमाम नकारात्मक ऊर्जा के साथ उसे अपनी चपेट में ले रही है। जसिंता केरकेट्टा की ये कहानियाँ जैसे बदलाव की इस प्रक्रिया का जीवन्त दस्तावेज़ हैं। बिना किसी कलागत आग्रह के सरल-सीधी कथा-कहन के साथ वे इन कहानियों में आदिवासी स्त्रियों की असहायता को भी उजागर करती हैं और पुरुषों में बढ़ते ताक़त के नशे की ओर भी संकेत करती हैं। कुछ कहानियों में उन्होंने ऐसे वयस्क मूल्यबोध की ओर भी इशारा किया है जिसको स्वीकार करने में नागर जन की तथाकथित आधुनिकता भी बग़लें झाँकने लगेगी। मसलन ‘रिश्ता’ कहानी में विवाह नामक संस्था को आमूल-चूल पुनर्परिभाषित करते नैना, सूरज और सुरजमुनी के संवाद। संवाद-प्रधान कुछ कहानियों में धर्म-आधारित राजनीति और आदिवासी जीवन पर उसके प्रभाव को लेकर भी अच्छी रोशनी पड़ती है। व्यवस्था और अवधारणा के स्तर पर बहुत सूक्ष्म और रेडिकल बदलावों के संकेत इन कहानियों में कई जगह मिलते हैं। ये कहानियाँ बताती हैं कि आदिवासी समाज में भी भले ही पुरुषों ने स्त्री के लिए कोई सम्मानजनक जगह नहीं रखी, बाहरी दुष्प्रभाव में भले ही बेटे अपनी माँओं-बहनों के साथ हिंसा करने लगे हैं, लेकिन स्त्री अभी भी अपनी संस्कृति, अपनी प्राकृतिक सहजता को लेकर सचेत है, उसे खोने को तैयार नहीं। हिंसा का शिकार होकर भी वह हिंसा को नहीं चुनती। आदिवासी दुनिया के संघर्षों, मूल्यों, पीड़ाओं, उसके सामने मौजूद ख़तरों और बदलावों को दर्शातीं कहानियों का एक रोचक संग्रह।
Aurat Ka Ghar
Jasinta Kerketta
Jirhul
- Author Name:
Kanupriya Kulshrestha +1
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Book Type:

- Description: आपने कितने फूलों की बात सुनी हैॽ कितनों के पास दो घड़ी रहे हैंॽ फूल हो कि कुछ और हम कुछ के नाम ही जानते हैं। सिर्फ कुछ को जानने से सिर्फ कुछ ही ‘खास’ हो जाते हैं। जिरहुल, जटंगी, सोनरखी, सरई, कोईनार और सनई भी फूल हैं। क्या आपने इनके नाम सुने थे। ऐसे दस फूलों पर जसिन्ता केरकेट्टा ने कविताएँ लिखी हैं; ऐसे दिखते हैं पीले सनई फूल जैसे पीली छोटी तितलियाँ बैठी हों आकाश में सब कुछ भूल आपने इन सब फूलों को अब तक नहीं देखा हो तो कोई बात नहीं। कनुप्रिया कुलश्रेष्ठ के बनाए इनके चित्र देखोगे तो पहचान लोगे, “अरे ये तो कोईनार के फूल हैं!” Age group 9-12 years
Jirhul
Kanupriya Kulshrestha
Jasinta Ki Dairy
- Author Name:
Jasinta Kerketta +1
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Book Type:

- Description: सोचती हूँ भाषाओं का काम क्या है? किसी को आवाज़ दो तो वह पलट कर देखता है और मुस्कुराता है। बस इतनी-सी बात है। जिनकी भाषा हम नहीं जानते हैं उन्हें अपनी भाषा में बात करते देखते हैं और खुश होते हैं तो उनका अपनी भाषा पर यक़ीन बढ़ता है। अभाव, बीमारी, ग़रीबी, दुख के भी साधारण लोगों ने अपने जीवन में थोड़ा थोड़ा प्रेम, थोड़ी थोड़ी आत्मीयता और मनुष्यता बचाकर रखी है। उन्हें देखते हुए सोचती हूँ की धरती में प्रेम सबसे ताकतवर मूल्य है।