Pradeep Rangkarmi

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प्रदीप रंगकर्मी पिछले दो दशक से रंगकर्म की दुनिया में सक्रिय प्रदीप रंगकर्मी का जन्म 6 मई, 1982 को बिहार, नवादा के भट्टागढ़ गाँव में हुआ। आरम्भिक शिक्षा गाँव से प्राप्त करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए., एम.ए., एम.फिल. किया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से थियेटर एप्रीशिएशन कोर्स भी किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में रहते हुए कॉलेज के छात्रों के साथ रंगमंच कार्यशालाएँ आयोजित कर उन्हें प्रशिक्षित किया। वे ‘गवाह : द विटनेस’ नाट्य संस्था के संस्थापक सदस्यों में एक हैं। उन्होंने ‘दाज्यू’, ‘हत्यारे’, ‘लक्खा बुआ’, ‘बड़े भाई साहब’, ‘डिप्टी कलक्टरी’, ‘सदाचार का तावीज’, ‘भोलाराम का जीव’, ‘महाराज कठपुतली सिंह’, ‘अंधेर नगरी’, ‘अंधा युग’ आदि कहानियों एवं नाटकों का रूपान्तरण एवं निर्देशन भी किया है। ‘उद्भावना’, ‘अनभै साँचा’, ‘संवेद’, ‘सब लोग’, ‘नया पथ’, ‘अभिनव भारती’ आदि पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित। 2018 के अन्तर-मंत्रालयी नाट्य प्रतियोगिता में उनके द्वारा रूपान्तरित एवं निर्देशित नाटक ‘डिप्टी कलक्टरी’ को सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन के लिए रजत पदक प्राप्त हुआ। 2019 में उनके रूपान्तरित एवं निर्देशित नाटक ‘कैमास वध’ (चन्दबरदाई कृत ‘पृथ्वीराज रासो’ पर आधारित नाटक) को अन्तर-मंत्रालयी नाट्य प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन एवं सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए स्वर्ण पदक तथा सर्वश्रेष्ठ आलेख एवं सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनय के लिए रजत पदक प्राप्त हुआ। ‘ट्रांसगुरु’ उनका नवीनतम नाटक है, जिसका मंचन मुक्तधारा प्रेक्षागृह में किया गया। सम्प्रति : मगध विश्वविद्यालय के जगजीवन कॉलेज, गया में सहायक प्राध्यापक। सम्पर्क : pradeeprangkarmi@gmail.com

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