Nand Dulare Vajpayi

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नन्ददुलारे वाजपेयी नन्ददुलारे वाजपेयी का जन्म 4 सितम्बर, 1906 को उत्तर प्रदेश के उन्‍नाव जिले के मगरायर में हुआ था। उन्होंने काशी हिन्दू विश्‍वविद्यालय से 1929 में हिन्दी में एम.ए. की उपाधि सर्वोच्‍च अंकों के साथ प्राप्‍त की। 1930 में वे अर्द्ध-साप्‍ताहिक भारत के सम्पादक होकर प्रयाग आए, जहाँ 1932 तक कार्यरत थे। व्यवस्‍थापकों के साथ सैद्धान्तिक मतभेदों के कारण वे भारत से अधिक समय तक जुड़े नहीं रहे। पुनः काशी आ गए और काशी नागरी प्रचारिणी सभा में सूरसागर का सम्पादन करने लगे। इसके बाद गोरखपुर में रहकर रामचरितमानस का सम्पादन भी उन्होंने किया। 1941 में वे काशी हिन्दू विश्‍वविद्यालय में अध्‍यापक पद पर नियुक्‍त हुए। 1947 में सागर विश्‍वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्‍यक्ष बने। 1965 तक इसी पद पर कार्यरत रहते हुए वे विक्रम विश्‍वविद्यालय, उज्‍जैन में कुलपति पद पर नियुक्‍त हुए। वे कुछ समय तक हिन्दी की प्रति‌‌ष्ठित पत्रिका आलोचना के सम्पादक भी रहे। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—जयशंकर प्रसाद, हिन्दी साहित्य : बीसवीं शताब्दी, आधुनिक साहित्य, कवि निराला, महाकवि सूरदास, प्रेमचन्‍द : एक साहित्यिक विवेचन, नया साहित्य : नए प्रश्‍न, नयी कविता, आधुनिक काव्य : रचना और विचार, कवि सुमित्रानन्दन पन्त, हिन्दी साहित्य का आधुनिक युग आदि । 21 अगस्‍त, 1967 को उनका निधन हुआ।

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