About Lamabam Kamal Singh
लमाबम कमल सिंह (डॉ. कमल) का जन्म चैत्र शुक्ल द्वितीया, शनिवार, सन् 1899 में मणिपुर की प्राचीन राजधानी कांचीपुर के निकट लाङ्ग्थबाल कुंज नामक गाँव में हुआ था। उन्होंने डिब्रूगढ़ के बेरी व्हाइट मेडिकल स्कूल (अब मेडिकल कॉलेज) से एल.एम.पी. परीक्षा उत्तीर्ण की और मणिपुर सरकार की चिकित्सा-सेवा में भर्ती हो गए।
कवि कमल की मात्र अठारह कविताओं का काव्य-संग्रह 'लै परेङ', मातृ-भाषा प्रेम, विश्व-मानवतावाद, सामाजिक-सांस्कृतिक जागरण, प्रकृति-सौंदर्य, कल्पना और स्वच्छन्दतावादी-चेतना का अमूल्य भंडार है। उनका उपन्यास 'माधवी' शक्तिशाली कथ्य के साथ ही भाषा-सौष्ठव के लिए भी जाना जाता है। इसमें लेखक की कल्पनाशक्ति, सौंदर्य-भावना, वर्णन-लालित्य और प्रकृति के बिम्बधर्मी प्रयोग के साथ ही प्रेम के लौकिक तथा अलौकिक स्तर भी दर्शाए गए हैं। कमल की कहानी 'ब्रजेन्द्रगी लुहोङबा' सामाजिक चलन और युवा-पीढ़ी के वैचारिक टकराव को सामने लाती है और उनका नाटक 'देवयानी' ब्राह्मणवाद पर सटीक प्रहार करता है। निज भाषा के प्रति प्रेम जगाने की दृष्टि से उन्हें हिन्दी के भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, बांग्ला के माइकेल मधुसूदन दत्त और तमिल के सुब्रह्मण्यम भारती की पंक्ति में रखा जाता है।
मणिपुरी साहित्य परिषद, इम्फाल ने सन् 1948 में उन्हें मरणोपरान्त 'कवि रत्न' उपाधि से अलंकृत किया।
सन् 1935 में तमेङलौङ के सरकारी आवास में उनका निधन हुआ।