About Jibanananda Das
जीवनानन्द दास
बांग्ला आधुनिक कविता के अन्यतम जनप्रिय कवि, कथाकार और निबन्धकार जीवनानन्द दास का जन्म 18 फ़रवरी, 1899 को बंगाल (अब बांग्लादेश) के बरिशाल शहर में हुआ। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. किया और जीवन भर नियमित-अनियमित रूप से विभिन्न महाविद्यालयों में पढ़ाते रहे। इसी सिलसिले में उन्होंने दिल्ली के रामजस कॉलेज में भी कुछ समय तक अध्यापन किया था। वे कुछ पत्रिकाओं के सम्पादक भी रहे। 'झरा पालक', 'धूसर पांडुलिपि', 'वनलता सेन', 'महापृथिवी', 'सातटि तारार तिमिर', 'श्रेष्ठ कविता', 'रूपसी बांग्ला', 'बेला अबेला कालबेला' आदि उनके चर्चित कविता-संग्रह और 'माल्यवान' तथा 'सुतीर्थ' उनके लोकप्रिय उपन्यास हैं। उन्होंने प्रचुर कहानियाँ भी लिखीं। उनके द्वारा लिखे गए प्रबन्ध भी प्रकाशित हो चुके हैं। अब्दुल मन्नान सैयद के सम्पादन में उनकी चिट्ठियाँ 'जीवनानन्द दासेर पत्रावलि' शीर्षक से छपी हैं। उन्हें 'वनलता सेन' कविता-संग्रह के लिए 'रवीन्द्र स्मृति पुरस्कार' तथा 'श्रेष्ठ कविता' के लिए 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। वे 14 अक्टूबर, 1954 को कोलकाता के बालीगंज इलाके में एक ट्राम-दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हो गए जिसके बाद उपचार के दौरान कोलकाता के शम्भुनाथ पंडित अस्पताल में 22 अक्टूबर, 1954 को उनका देहान्त हो गया।