Shri Ram Janmabhoomi Ki Shaurya Gatha
(0)
Author:
Saroj UpadhyayaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
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यह गाथा है प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या की। यह गाथा है श्रीरामजन्मभूमि के शौर्य की। । यह गाथा है, सनातन धर्म के वीरों की। यह गाथा है, लाखों सनातनियों के अमर बलिदान की। इस ऐतिहासिक उपन्यास 'श्रीरामजन्मभूमि की शौर्य गाथा' में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर व अयोध्या के पूरे इतिहास व उससे जुड़ी पौराणिक-धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसके ऐतिहासिक और कानूनी लड़ाई के प्रत्येक पहलुओं को कुछ शब्दों में समेटने का प्रयास किया गया है। उपन्यास का प्रारंभ 5 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी द्वारा श्रीराममंदिर निर्माण के भूमि-पूजन करने से होता है। भूमि-पूजन के इस पावन क्षण में अयोध्या को लाखों रामभक्तों का बलिदान स्मरण हो जाता है और वह उनके संघर्ष व बलिदानों को सजल नेत्रों से स्मरण करते हुए अपने अतीत में खो जाती हैं और इतिहास का एक-एक पन्ना पलटती हैं। प्रत्येक घटना एवं दृश्य उनके समक्ष जीवंत हो जाता है। इस प्रकार अयोध्या अपनी आत्मकथा के माध्यम से इस उपन्यास में श्रीरामजन्मभूमि के संघर्ष की शौर्य गाथा व अनेक रहस्योद्घाटन देशवासियों के समक्ष करती है।
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यह गाथा है प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या की। यह गाथा है श्रीरामजन्मभूमि के शौर्य की। । यह गाथा है, सनातन धर्म के वीरों की। यह गाथा है, लाखों सनातनियों के अमर बलिदान की।
इस ऐतिहासिक उपन्यास 'श्रीरामजन्मभूमि की शौर्य गाथा' में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर व अयोध्या के पूरे इतिहास व उससे जुड़ी पौराणिक-धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसके ऐतिहासिक और कानूनी लड़ाई के प्रत्येक पहलुओं को कुछ शब्दों में समेटने का प्रयास किया गया है। उपन्यास का प्रारंभ 5 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी द्वारा श्रीराममंदिर निर्माण के भूमि-पूजन करने से होता है।
भूमि-पूजन के इस पावन क्षण में अयोध्या को लाखों रामभक्तों का बलिदान स्मरण हो जाता है और वह उनके संघर्ष व बलिदानों को सजल नेत्रों से स्मरण करते हुए अपने अतीत में खो जाती हैं और इतिहास का एक-एक पन्ना पलटती हैं। प्रत्येक घटना एवं दृश्य उनके समक्ष जीवंत हो जाता है। इस प्रकार अयोध्या अपनी आत्मकथा के माध्यम से इस उपन्यास में श्रीरामजन्मभूमि के संघर्ष की शौर्य गाथा व अनेक रहस्योद्घाटन देशवासियों के समक्ष करती है।
Book Details
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ISBN9789349116108
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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"‘गीतगोविंद’ संस्कृत के प्रसिद्ध कवि जयदेव द्वारा रचित एक अनुपम काव्य-ग्रंथ है, जिसमें राधा-कृष्ण की केलि-कथाओं तथा उनकी अभिसार-लीलाओं के अत्यंत रसमय चित्रण के साथ ही प्रेम के सभी भारतीय रूपों का बड़ी तन्मयता और कुशलता के साथ वर्णन किया गया है। समग्र संस्कृत साहित्य में इस कोटि की मधुर रचना दूसरी कोई नहीं। यह आध्यात्मिक शृंगार का अत्यंत मनोरम काव्य-ग्रंथ है, जिसमें शब्द और अर्थ का मनोमुग्धकारी सामंजस्य है। कृष्ण-भक्ति साहित्य में ‘गीतगोविंद’ को धर्मग्रंथ का स्थान प्राप्त है। श्रीवल्लभ संप्रदाय में भी ‘गीतगोविंद’ को श्रीमद्भागवत पुराण के समान प्रतिष्ठा प्राप्त है। यह ग्रंथ देश-विदेश के अनेक मूर्धन्य एवं लब्धप्रतिष्ठ विद्वान् समीक्षकों द्वारा मुक्त कंठ से प्रशंसित है। प्रस्तुत है, धर्म और दर्शन के क्षेत्र में सुप्रतिष्ठित इस ग्रंथ-रत्न का सुमधुर हिंदी अनुवाद। आध्यात्मिक साधकों के लिए ही नहीं आम पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी पुस्तक। "
Hindutva
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
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‘हिंदुत्व’ एक ऐसा शब्द है, जो संपूर्ण मानवजाति के लिए आज भी अपूर्व स्फूर्ति तथा चैतन्य का स्रोत बना हुआ है। इस शब्द से संबद्ध विचार, महान् ध्येय, रीति-रिवाज तथा भावनाएँ कितनी विविध तथा श्रेष्ठ हैं। ‘हिंदुत्व’ कोई सामान्य शब्द नहीं है। यह एक परंपरा है। एक इतिहास है। यह इतिहास केवल धार्मिक अथवा आध्यात्मिक इतिहास नहीं है। अनेक बार ‘हिंदुत्व’ शब्द को उसी के समान किसी अन्य शब्द के समतुल्य मानकर बड़ी भूल की जाती है। वैसे यह इतिहास मात्र नहीं है, वरन् एक सर्वसंग्रही इतिहास है। ‘हिंदू धर्म’, यह शब्द ‘हिंदुत्व’ से ही उपजा उसी का एक रूप है, उसी का एक अंश है। ‘हिंदुत्व’ शब्द में एक राष्ट्र, हिंदूजाति के अस्तित्व तथा पराक्रम के सम्मिलित होने का बोध होता है। इसीलिए ‘हिंदुत्व’ शब्द का निश्चित आशय ज्ञात करने के लिए पहले हम लोगों को यह समझना आवश्यक है कि ‘हिंदू’ किसे कहते हैं। इस शब्द ने लाखों लोगों के मानस को किस प्रकार प्रभावित किया है तथा समाज के उत्तमोत्तम पुरुषों ने, शूर तथा साहसी वीरों ने इसी नाम के लिए अपनी भक्तिपूर्ण निष्ठा क्यों अर्पित की, इसका रहस्य ज्ञात करना भी आवश्यक है। प्रखर राष्ट्रचिंतक एवं ध्येयनिष्ठ क्रांतिधर्मा वीर सावरकर की लेखनी से निःसृत ‘हिंदुत्व’ को संपूर्णता में परिभाषित करती अत्यंत चिंतनपरक एवं पठनीय पुस्तक।
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