Dr. Kalam : Prerna Ki Udaan
Author:
Dr. Unnat PanditPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Available
ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक, विचारक, दाशर्निक और शिक्षक के रूप में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने प्रत्येक भारतीय को सदैव प्रेरित किया है। उनके जीवन, कॅरियर और लेखन ने कोटि-कोटि भारतीयों का मार्गदर्शन किया है, उन्हें प्रोत्साहित किया है। वे हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन हर भारतीय के हृदय में हमेशा उनका स्थान रहेगा। वे समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को लेकर हमारे मन में सदैव ज्ञान की ज्योति जलाते रहेंगे।
प्रस्तुत पुस्तक ‘डॉ. कलाम : प्रेरणा की उड़ान’ उनके सहज-सरल, अनुकरणीय जीवन का एक विशद् विवेचन करती है। इस पुस्तक का उद्देश्य भारत के सर्वांगीण विकास के डॉ. कलाम के स्वप्न को साकार करने की प्रबल इच्छाशक्ति जाग्रत् कराना है, ताकि भारत के छात्र-युवा-आमजन प्रेरणा ले सकें।
यह पुस्तक पढ़कर छात्रों को भारतीय रक्षा और अनुसंधान विकास में एरोनॉटिकल इंजीनियर, मिसाइल इंजीनियरिंग, उपग्रह प्रक्षेपण यान तकनीक के क्षेत्र में डॉ. कलाम के अनगिनत योगदानों के विषय में और ज्यादा जानने का अवसर मिलेगा। स्वप्न देखकर उन्हें साकार करने की क्षमता प्राप्त करने की उड़ान भरने में यह पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी।
ISBN: 9789390101917
Pages: 104
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Main Arvind Bol Raha Hoon
- Author Name:
Giriraj Sharan Agrawal
- Book Type:

- Description: संसार को आध्यात्मिकता, राष्ट्र को राजनीतिक चेतना तथा समाज को समन्वय की संस्कृति का ज्ञान देकर जिसने हमारे सांस्कृतिक इतिहास तथा राजनीतिक चिंतनधारा को सबसे अधिक अलंकृत किया, उस व्यक्तित्व का नाम है—महर्षि अरविंद घोष। अरविंद ने भारत की आराधना माता के समान की। भारतमाता को स्वाधीन कराने के लिए उन्होंने निरंतर संघर्ष किया। भारत की स्वतंत्रता के माध्यम से वे विश्व-मानवता की सेवा करना चाहते थे। भारतीय स्वतंत्रता के संदर्भ में उन्होंने कहा था—‘किसी भी राष्ट्र के सुस्वास्थ्य तथा जीवंतता के लिए स्वतंत्रता पहली आवश्यकता है।’ राष्ट्रवाद को उन्होंने राष्ट्र तथा नागरिकों के लिए वरदान माना। उनका मत था कि स्वराज्य के बिना राष्ट्र समान है। अरविंद मूलत: अध्यात्म-पुरुष थे। वे प्रकांड पांडित्य और गहन अंतर्दृष्टि के व्यक्ति थे। ऐसे क्रांतिकारी विचारक, महान् योगी, विश्व-मानवता के उन्नायक, आध्यात्मिक महापुरुष महर्षि अरविंद घोष की चिंतनधारा से परिचित कराने के संकल्प के साथ यह संकलन प्रस्तुत है।
Ramkatha In Indian Language
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ramcharitmanas Ke Rachnashilp Ka Vishleshan
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

-
Description:
रामकथा से सम्बद्ध विविध युग सापेक्ष कृतियाँ मानव-मूल्यों एवं साहित्यिक मानकों के बदलावों के फलस्वरूप निरन्तर बदलती रही हैं। परम्परा की प्रमुख रामकथा से सम्बद्ध कृतियों यथा वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण एवं ‘रामचरितमानस’ आदि को केन्द्र में रखकर देखा जाए तो रामकाव्य के कथाशिल्प एवं रचनाविधान में परिवर्तन सामाजिक मूल्यों के बदलाव के कारण आए हैं और उनमें इस दृष्टि से शाश्वतता की तलाश का कोई अर्थ नहीं हैं।
‘रामचरितमानस के रचनाशिल्प का विश्लेषण’ शीर्षक कृति इसी युग सापेक्ष्य परिवर्तन की मौलिकता से सम्बद्ध है और यह मौलिकता परम्परा से नहीं कवि की सर्जन सामर्थ्य से सम्बद्ध है। गोस्वामी तुलसीदास की अजेय कृति ‘श्रीरामचरितमानस’ की रचना-सामर्थ्य की मौलिकता का विश्लेषण परम्परा से मुक्त होकर करना—इस कृति का मंतव्य है—जिससे एक कालजयी मौलिक रचनाधर्मिकता से सम्बद्ध कवि को भविष्य में परम्परावादी कहकर उसकी प्रतिभा पर प्रश्नचिन्ह न लगाया जा सके।
SOCH BADI KAMYABI BADI
- Author Name:
Dale Carnegie
- Book Type:

- Description: दुनिया के सबसे महानतम स्वयं-सहायता गुरुओं में से एक से उत्कृष्टता के सबक 2 ऐसा कॅरियर चुनें, जो आपको सबसे ज्यादा अनुकूल हो। 2 पब्लिक स्पीकिंग के गुण सीखें, जो आपको एक प्रभावी कम्यूनिकेटर बनाएगा। 2 काम की चार अच्छी आदतों को अपनाकर तनाव और थकान को दूर करें। 2 अपने जीवन में वित्तीय योजना के ग्यारह मौलिक सिद्धांतों को लागू करें। अत्यंत सफल लेखक और प्रेरक वक्ता डेल कारनेगी ने दुनिया भर में लाखों लोगों को अपने जीवन और कॅरियर में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी। डेल कारनेगी की शिक्षा के जरूरी सिद्धांतों का संग्रह ‘सोच बड़ी, कामयाबी बड़ी’ एक ऐसी मूल्यवान पुस्तक है, जो आपके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में आपकी मदद करेगी। प्रत्येक सिद्धांत को सफल कारोबारियों और कॉरपोरेट जगत् की हस्तियों के साथ ही इतिहास की महान् राजनीतिक विभूतियों की जीवन-घटनाओं वाक्यों और कहानियों से समझाया गया है। इसमें डेल कारनेगी तथा उन विचारकों और कामयाब लोगों की प्रेरक उक्तियों का एक संग्रह भी है, जिनकी वह सबसे अधिक प्रशंसा करते थे, जैसे कि रॉल्फ वाल्डो इमर्सन, थॉमस ए एडिसन, हेनरी फोर्ड और कई अन्य प्रसिद्ध व्यक्ति।
Awadh Ke Pramukh Vrat-Parva-Tyohar Evam Riti-Rivaj
- Author Name:
Vidya Vindu Singh
- Book Type:

-
Description:
हमारा भारतवर्ष मुख्य रूप से कथा धर्मी देश है। तप-साधना से तो नव-नव ज्ञान की सूझें मिलती ही हैं पर चित्त की रस तृप्ति द्वारा प्रेरित संरचनात्मक धर्मिता से भी हमारे देश ने कुछ कम उपलब्धियाँ नहीं पाईं। इस बात को मैं बार-बार कहते हुए भी नही अघाता हूँ कि मुख्य रूप से भारत ही एक ऐसा देश है जिसने पुराण कथाओं के संग्रह और भारत जैसे आसमुद्र हिमालय वाले महादेश में वैष्णवधर्मी एक राष्ट्रीयता का निर्माण करने के लिए नैमिषारण्य में कथा यूनिवर्सिटी बनाई थी।
लोक साहित्य-संगीत और कला में गहन रुचि रखने के साथ ही डॉ. विद्या विन्दु सिंह स्वयं भी कथाएँ लिखती हैं। कामना करता हूँ कि विदुषी लेखिका का कर्म और यश उत्तरोत्तर वर्द्धमान हो।
—अमृतलाल नागर
A Complete Guide To Astrology
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: This book is a complete guide to astrology. It provides readers with an impartial, objective and well-constructed understanding of the science of astrology so that they can make decisions based on their inner knowledge rather than belief-based superstitions.
Philosophy of Hinduism & Waiting For A Visa
- Author Name:
DR. B.R. Ambedkar
- Book Type:

- Description: "Philosophy of Hinduism is a profound and critical analysis by Dr. B.R. Ambedkar that examines the foundations and philosophical underpinnings of Hinduism. Written with an intent to investigate the principles of justice, equality and morality within Hindu religious and social doctrines, the book delves into key concepts of Hindu philosophy, such as the idea of karma, dharma and the caste system. Waiting for a Visa is a powerful and eye-opening work by Dr. B.R. Ambedkar, one of India's foremost social reformers and the chief architect of the Indian Constitution. Written in 1935-36, this autobiographical account is a collection of personal and real-life incidents that expose the harsh realities of caste discrimination faced by Ambedkar and other Dalits in the Pre-independent India."
Andhshraddha Ki Gutthi
- Author Name:
Narendra Dabholkar
- Book Type:

-
Description:
विश्वास और अंधविश्वास में अंतर समझते समय मूल दिक्कत यह आती है कि एक समय में जिस विश्वास को सराहा जाता था वही दूसरे समय में अंधविश्वास बन जाता है। समाज का एक हिस्सा जिसे अंधविश्वास मानता है, वही किसी दूसरे समूह को पवित्र लगता है। सती प्रथा और मेलों में दी जानेवाली बलि ऐसी ही परंपराएँ थीं। एक सदी पूर्व का यह विश्वास आज नृशंस अंधविश्वास की श्रेणी में आ गया है।
इसीलिए श्रद्धाओं की जाँच करनी पड़ती है। विज्ञान के विकास का इतिहास ऐसी ही श्रद्धाओं की जाँच करने का इतिहास है। कोपर्निकस, गैलिलियो ने इन श्रद्धाओं को जाँचा, और जो पाया, उसे व्यक्त करने पर यातना भी सही। क्या समाज सुधार का इतिहास भी ऐसा ही नहीं है? इस पर गौर करें तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि श्रद्धा की जाँच करना और जिन्हें वह श्रद्धा सामाजिक जीवन के लिए अनिष्ट व अनुचित लगती है, उन्हें उन श्रद्धाओं के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए संगठित करने की आजादी आज की बड़ी जरूरत है।
अंधविश्वास उन्मूलन के बारे में सुधीजन एक सलाह और देते हैं कि असहमति जताओ लेकिन विरोध मत करो। लेकिन सामाजिक परिवर्तन के लिए असहमति तक सीमित रहना संभव नहीं है। उसके लिए सक्रिय आंदोलन की जरूरत होती है। सचेत संघर्ष की जरूरत होती है। इस पुस्तक में ऐसे ही संघर्षों का विवरण डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने अपने शब्दों में दिया है। ‘बोलता पत्थर’, ‘लंगर का चमत्कार’, ‘कमर अली दरवेश की पुकार’, ‘अनुराधा देवी की बंद मुट्ठी’ और अन्य ऐसी ही अंधविश्वास-पूर्ण गतिविधियों के विरुद्ध डॉ. नरेंद्र दाभोलकर और उनके संगठन के ये आंदोलन निस्संदेह पठनीय है।
Shankha Mein Samaye Huye Shabda
- Author Name:
Dr. Umesh Prasad Singh
- Book Type:

- Description: भारतीय मनीषा की चिरंतन चिंतन-परंपरा हमेशा ही अखंड, असीम और शाश्वत रही है। शाश्वत अस्तित्व का अवबोध ही अध्यात्म कहा जाता है। इस अवबोध की सूक्ष्म अभिव्यक्ति हमारे आर्ष ग्रंथों की गरिमामय विरासत है। गीता हमारे आर्ष साहित्य की उत्कृष्ट उपलब्धि है। गीता के संपूर्ण कथ्य का आधार दैहिक सत्ता और चेतनतत्त्व की पृथकता की समझ का परिज्ञान है। मनुष्य के जीवन के साथ संपूर्ण सृजन खंडित और सीमित स्वरूप में नहीं है। वह अखंड, असीम और अनंत है। अपरिवर्तनशील सत्य की धुरी पर समस्त परिवर्तनशील दृश्यप्रपंच की परिधि गतिशील है। परिवर्तनशीलता के उद्दाम प्रवाह में अपरिवर्तनशील को अभिज्ञात करके उसे उपलब्ध हो लेने को कृष्ण ने ज्ञान कहा है। गीता का कथ्य किसी विशेष समय और परिस्थिति के सापेक्ष नहीं है। उसमें असीम जीवन-प्रवाह में सामंजस्य की सनातन संगति है। इस पुस्तक में विराट् जीवन-बोध के मर्म को साहित्यिक संवेदना के धरातल पर पकड़ने की कोशिश है। विराट् अवबोध के परिप्रेक्ष्य में ही मनुष्य जीवन की अर्थवत्ता के फलित होने का विधान गीता में उद्घाटित होता है। अध्यात्म दूरारूढ़ परिकल्पनाओं की भूल भुलैया में भटकने का नाम नहीं, बल्कि सत्य से संवलित होकर द्वंद्वहीन सहज हो लेने की अनुभूति है। गीता के इस अनुभूति योग की रसमयता को ग्रहण कर सकने की उत्कंठा ही इस पुस्तक के प्रणयन की उत्प्रेरणा रही है।
Sahaj Gita
- Author Name:
Arvind Kumar
- Book Type:

- Description: गीता के अनगिनत अनुवादों और भाष्यों के बावजूद आज ऐसे संस्करण उपलब्ध नहीं हैं जो आम आदमी को गीता पढ़ने में और उसके उपदेशों के बारे में निजी राय क़ायम करने में बहुत सहायता दे सकें—हालत यह है कि आम आदमी न तो गीता का मूल संस्कृत पाठ पढ़ पाता है, न अधिकतर अनुवादों की उलझी भाषा के कारण श्लोकों के अर्थ समझ पाता है—पाठकों की कठिनाइयाँ दूर करने के लिए यह सहज संस्करण एक साथ दो काम करता है—इसमें गीता के मूल संस्कृत पाठ को आम आदमी की सुविधा मात्र के लिए एक बिलकुल नई और सहज शैली में लिखा गया है—इस शैली के कारण संस्कृत के श्लोकों को पढ़ना काफ़ी हद तक सहज हो गया है। कहीं भी गीता के प्रवाह में व्यवधान नहीं आया है और न कहीं किसी प्रकार संस्कृत व्याकरण की हानि हुई है—वहीं इसमें गीता के श्लोकों का हिन्दी गद्य अनुवाद सीधे-सादे और छोटे-छोटे वाक्यों में किया गया है—भाषा आसान, आधुनिक और गैर–पंडिताऊ है, जिसे आज का आम पाठक बड़ी सहजता से समझ सकता है।
Shri Ramnagar Ramleela
- Author Name:
Bhanushankar Mehta
- Book Type:

-
Description:
‘रामचरितमानस’ सोलहवीं सदी में पुनः कही गई रामकथा है जिसमें राम का दर्पण रूप प्रतिबिम्बित है और यहाँ राम देवपद पर प्रतिष्ठित हो गए हैं। यहाँ राम द्विज हैं और उनकी कथा भी दो बार कही गई।
रामकथा का एक तृतीयांश आदर्श पुरुष राम का, दूसरी तिहाई राजाराम की और अन्तिम अंश वैरागी यात्री राम का है। यहाँ रामनगर में समानान्तर अंक हैं—नगर में जहाँ सुख-सुविधा है, अविकसित ग्राम हैं और वन हैं, वहीं आदिवासी, साधु-सन्त और वैरागी भी रहते हैं। ‘रामनगर रामलीला’ का अद्भुत प्रसंग है—कोट बिदाई। एक राजा द्वारा दूसरे राजा का स्वागत-सत्कार और फिर स्वरूपों को देवरूप मानकर विधिवत् पूजा करता है।
‘रामनगर रामलीला’ की यात्राएँ देखें—एक तो राम जी की बारात है जो अयोध्या से जनकपुर जाती है, फिर विदाई यात्रा है जिसमें वर-वधू जनकपुर से अयोध्या आते हैं। वनयात्रा और भरत की चित्रकूट नंदीग्राम की लम्बी यात्रा है। भरत-मिलन लंका से अयोध्या की यात्रा है।
‘रामनगर रामलीला’ में लोककला चरम उत्कर्ष पर पहुँच गई है। लोककला की सीमा में सौन्दर्यबोध का अपूर्व विकास हुआ।
‘रामलीला’—नाटक, धर्म, राजनीति और समाज की संयुक्त अवतारणा है।
‘रामलीला’ में पुराणकथा, दर्शक सहभागिता, राजनीति की माया, पर्यावरण का सभी स्तरों पर प्रदर्शन होता है।
अन्यत्र कहीं भी रामनगर का अनुकरण नहीं हो सकता, हाँ, इससे कुछ सीख सकते हैं।
Kapilgita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description: अहं ममाभिमानोत्थैः कामलोभादिभिर्मलैः। वीतं यदा मनः शुद्धं अदुःखं असुखं समम्॥ जब मन अहंकार और काम-लोभ से मुक्त हो जाता है, तब वह दुःख और सुख से मुक्त हो जाता है। इस अवस्था में आत्मा प्रकृति से परे, अखंडित और स्वयं प्रकाशित रूप प्राप्त कर लेती है।
Shri Leela Ramayan
- Author Name:
Bhanushankar Mehta
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक ‘श्रीलीला रामायण’ में तुलसी की रामकथा है, उनका मानस है और गद्य-पद्य में उन्हीं की पंक्तियाँ हैं। प्रत्येक प्रसंग का मानस के अनुसार स्वरूप दिया गया है। यदि लीला करनेवाले चाहें तो उनका कवित्त-छन्द रीति से शृंगार कर सकते हैं, पर ध्यान रहे अतिरेक न हो, कथा का रस भंग न हो। क्षेपक जोड़ने से कथा का विस्तार होगा और यदि समय अनुमति दे तो वैसा कर सकते हैं। इस लीला-संग्रह में कोई दुराग्रह नहीं है, कोई बाध्यता नहीं है पर जो केवल तुलसी के ‘रामचरितमानस’ को रूपायित करना चाहते हैं, उनके लिए यह उपयोगी होगा। इसका पाठ आपको ‘रामचरितमानस’ के संक्षिप्त पाठ का सुख देगा। रामजी की प्रेरणा से यह लिखा गया और उन्हीं के युगल चरणों में अर्पित है।
Ram Utkarsh Ka Itihas
- Author Name:
Shriram Mehrotra
- Book Type:

- Description: प्राचीन इतिहास में इक्ष्वाकु वंश में एक से बढ़कर एक यशस्वी, उत्तम प्रजापालक, वचन के धनी, महात्मा नरेशों में 39वीं पीढ़ी के श्रीरामचन्द्र श्रेष्ठतम नरेश ही नहीं, पृथ्वी के अप्रतिम पुरुषोत्तम हुए जिन्होंने मानवता के उत्कर्ष देवों को भी बौना कर दिया। राज्य छोड़कर वनवास करने की, छोटे से समय की, माता के आज्ञापालन की बात एक पुत्र को पुरुषोत्तम और देवोत्तम बना सकती है, यह श्रीराम के आचरण से प्रमाणित हुआ। राम की आयु ग्यारह हज़ार वर्ष की रही हो या मात्र एक सौ ग्यारह वर्ष की, इसमें चौदह वर्ष का छोटा काल-खंड उनकी चरित्रगत सम्पत्ति को अयोध्या के चक्रवर्ती अधिपति के पद से भी ऊँचा उठानेवाला हुआ। कठोर दंडकवन के लिए वनवासी होने की विमाता की आज्ञा शिरोधार्य कर राम ने वन में असम्भव को सम्भव करने की जो उपलब्धियाँ पाईं, उनसे वे पुरुषोत्तम-ईशोत्तम दोनों ही हुए। राम के जीवन का यह काल उन्हें ‘राम' बनाने का उत्कर्ष काल था। जीवन में यह संयोग न होने पर उत्तम प्रजापालन की रघुवंश की परम्परा में एक और श्रेष्ठ राजा की गिनती हो जाती, किन्तु वे देश-देशान्तर के विश्व-राम नहीं होते। पीड़ादायक राक्षसों के साथ अजेय रावण से संसार को मुक्ति दिलाना इस वन प्रदेश में प्रवेश से सम्भव हुआ। विमाता की आज्ञा और पुत्र की शिरोधार्यता में ऐसा क्या था कि विश्व में ऐसा दूसरा इतिहास नहीं हुआ, यह इस ग्रन्थ की विषय वस्तु है। वनवास की कठोर कसौटी से रामराज्य के नाम से वनों में ही अंकुरित हुई थी। माता-पिता के आज्ञा-पालन की साधारण सी बात से कोई इतना असाधारण लोकादर्श हो सकता है, राजा बनने से अधिक महत्त्व कर्तव्यों में है, यह राम-चरित्र बताता है। परम्परागत प्रसंगों से अलग ऐसे अनेक अज्ञात व उपेक्षित प्रसंग यहाँ प्रकाशित हुए हैं जो राम इतिहास पर नई रोशनी डालते हैं। महान इतिहास की नवीन दिशा में राम के समकक्ष शत्रु-नायक पौलस्त्य रावण-कुल के इतिहास का भी विस्तार से यहाँ वर्णन है। यह ग्रन्थ हिन्दी, अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में प्रकाशित उन सामग्रियों का उत्तर है जो पूर्वग्रह से लिखे गए हैं, जिनमें अध्ययन का अभाव है और विशेषतः युवा वर्ग को भ्रमित करने का प्रयास है।
Dharamsatta Aur Pratirodh Ki Sanskriti
- Author Name:
Rajaram Bhadu
- Book Type:

-
Description:
कभी धर्म राजनीतिक सत्ता के बावजूद पूर्ण स्वायत्त था। मध्यकालीन भारत में धर्म अपनी स्वायत्तता की रक्षा के लिए सैन्य-संघर्ष तक पर उतारू हो जाता था। मौजूदा दौर में राजनीति धर्म की पारम्परिक सत्ता पर क़ब्ज़ा कर उसे अपनी सफलता की सीढ़ी बनाना चाहती है। पिछले दो दशकों से धर्म इसीलिए बौद्धिक विमर्श के केन्द्र में रहा है। अतः धर्म-सत्ता में आई विकृति के अध्ययन में अन्य अनुशासनों के विचारकों के तत्पर होने की आवश्यकता बनती है कि धार्मिक टकराव के कारण क्या हैं? क्या इसका कारण धर्म के बाहर है या धर्म के भीतर?
बहुदेववादी हिन्दू धर्म की सत्ता कभी केन्द्रीकृत नहीं रही, जबकि एकेश्वरवादी इस्लाम, ईसाइयत, यहूदी, पारसी धार्मिक सत्ता केन्द्रीकृत रही। इस अन्तर के बावजूद सबमें उभयबिन्दु यह है कि सभी धर्म महत् तत्त्व, सुप्रीम बीइंग, में आस्था रखते हैं। धर्म ने स्वयं को दर्शन और सामाजिक कर्तव्यशास्त्र से जोड़ा, इसलिए उसका असर मनुष्य के समस्त ज्ञान-विज्ञान, साहित्य और कलाओं में दिखता है। अपने यहाँ धर्मनिरपेक्षता पर अधिक अध्ययन हुए, धर्म उपेक्षित रह गया। धर्मनिरपेक्षता के प्रवर्तक होली ओक ने 1860 में कहा था, “धर्मनिरपेक्षतावाद न तो धर्मशास्त्र की उपेक्षा करता है, न उसकी स्तुति करता है और न उसे अस्वीकार करता है।” इसीलिए लेखक ने धर्म-निषेध वाले नज़रिए के बजाय धर्म की स्वीकार्यता को प्रस्थान-बिन्दु बनाया है।
प्रकृतिदेव से शुरू हुई अवधारणा ईश्वर के रूप में विकसित हुई। बीसवीं सदी में ईश्वर की अवधारणा क्या है? कहाँ तक विकसित हुई? हिन्दू धर्म के संजाल में पीठ, आश्रम, मठ, धामों के बाद हिन्दू अध्यात्म के नए केन्द्र और नए पैग़म्बर कौन-कौन से हैं? नई धर्म-सत्ता का बाज़ार से क्या रिश्ता है? हिन्दू धर्म सिकुड़ या फैल रहा है? बहुदेववादी हिन्दू धर्म अनुदारता, धार्मिक कट्टरता और बर्बरता की राह पर कैसे चलने लगा? आज हिन्दू धर्म के सम्बन्ध इस्लाम, बौद्ध, जैन और ईसाइयत से तनावपूर्ण हैं। यह तनाव हमारे वृहत्तर समाज के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देगा। ऐसे में हिन्दू धर्म के लिए आत्म-परीक्षण का ही मार्ग बचता है। हिन्दू धर्म, उसके सम्प्रदायों, धर्मों के पारस्परिक सम्बन्ध, अद्यतन धार्मिक विकास के विस्तृत विवरणों और विश्लेषण से सजी यह पुस्तक प्रखर आलोचक और समाज-अध्येता राजाराम भादू का गम्भीर प्रयास है। पाठक आस्थावादी हों या अनास्थावादी, यह दोनों के लिए ज़रूरी किताब है।
—अरुण प्रकाश।
Shri Ramcharitmanas : Shasth Sopan (Lankakand)
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

-
Description:
‘श्रीरामचरितमानस’ लीलान्वयी काव्य है। इनकी मान्यताएँ वाल्मीकि रामायण से न जुड़कर भागवत पुराण से जुड़ती हैं। वाल्मीकि अपनी ‘रामायण’ के ‘लंकाकांड’ में ‘रावण वध’ की समापन कथा कहते हैं, किन्तु तुलसीकृत मानस का ‘लंकाकांड’ रावण का मुक्ति का आख्यान है।
प्रभु के प्रति द्वेष भी भक्ति ही है और उस अमर्ष भाव में आकंठ डूबे रावण जैसे व्यक्तित्व के प्रति श्रीराम का क्रोध उनकी कृपा तथा अनुग्रह है। इसलिए तुलसीदासकृत लंकाकांड को कथा समापन के रूप में नहीं लेना चाहिए, वरन् मध्यकालीन लीलाभक्ति की उस अवधारणा से जोड़कर देखना चाहिए, जहाँ शत्रु-मित्र, साधु-असाधु, राक्षस-मानव के बीच स्थिर दीवार को तोड़कर सभी को एक मंच पर बैठाने की तत्परता दिखाई पड़ती है। हिन्दू-अहिन्दू को एक तार से जोड़नेवाली यह भक्ति निश्चित ही भारतीय संस्कृति की विषमता के युग में एक बहुत बड़ी सम्बल थी।
तुलसी अपने इस ‘लंकाकांड’ में ‘रावण वध’ की कथा न कहकर राम एवं रावण के बीच रागात्मक ऐक्य की स्थापना की कथा कहते हैं। रावण के भौतिक शरीर को विनष्ट करके उसकी तेजोमयी चेतना का श्रीराम के शरीर में विलयन भक्ति द्वारा स्थापित रागात्मक समन्वय का सबसे बड़ा साक्ष्य है।
Hindu Devi Devta
- Author Name:
K.K. Tripathi
- Book Type:

- Description: हिंदू धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। हिंदू धर्मग्रंथों—वेद, पुराण, उपनिषद्, रामायण, महाभारत, गीता आदि ने संपूर्ण मानव जाति को दिशा दिखाई है तथा जीवन में आदर्श और नैतिकता का मार्ग प्रशस्त किया है। इस उच्च धर्म के वाहक चौंसठ करोड़ देवी-देवता हैं। विद्या की देवी माँ सरस्वती हैं, धन-धान्य की देवी माँ लक्ष्मी हैं, शक्ति की प्रतीक माँ दुर्गा हैं। ब्रह्माजी जन्मदाता हैं, विष्णु पालक और शिवजी संहारक। हिंदू धर्म उपासक अपनी श्रद्धा और भक्ति में सराबोर होकर अपने इष्ट देवी-देवता की पूजा-अर्चना करते हैं। वही अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं, उनका कल्याण करते हैं। इस ग्रंथ में विद्वान् लेखक ने हिंदू धर्म के कुछ प्रमुख देवी-देवताओं के अलौकिक जीवन की झाँकी प्रस्तुत की है, जो श्रद्धा और भक्ति के आकाश को नया क्षितिज प्रदान करेगी। आस्था, विश्वास और समर्पण का भाव जगानेवाली पठनीय व मननीय कृति।
The Gita For Children
- Author Name:
Roopa Pai
- Book Type:

- Description: It's one of the oldest books in the world and India's biggest blockbuster bestseller! - But isn't it meant only for religious old people? - But isn't it very long... and, erm, super difficult to read? - But isn't the stuff it talks about way too complex for regular folks to understand? Prepare to be surprised. Roopa Pai's spirited, one-of-a-kind retelling of the epic conversation between Pandava prince Arjuna and his mentor and friend Krishna busts these and other such myths about the Bhagavad Gita. Lucid, thought-provoking and brimming with fun trivia, this book will stay with you long after you have turned the last page.
Magh Mela
- Author Name:
Vincent Van Ross +2
- Book Type:

- Description: This might come as a surprise to many readers. But, this is indeed the very first book on Magh Mela. As of now, the only book relevant to Magh Mela that is available in the market is a reproduction of the chapter on Magh Mahatmaya appearing in Padma Purana. But, that is purely mythological in content and does not deal with many aspects of the Magh Mela as it plays out in Allahabad. Everybody has heard of Kumbh Mela. But, how many of us have heard of Magh Mela? Does it surprise you to learn that Kumbh Mela is nothing but Magh Mela that is celebrated every twelfth year and Ardh Kumbh is nothing but the sixth Magh Mela celebrated between two Kumbh Melas? In other words, a mini version of the Kumbh Mela is celebrated in Allahabad year after year in the form of Magh Mela which goes almost unnoticed and unreported outside of Allahabad and Uttar Pradesh. Magh Mela is an incredible annual phenomenon in Allahabad (Prayag) from time immemorial. It is a monthlong Hindu festival that is celebrated in the month of Magh at Sangam or the confluence of rivers Ganga, Yamuna and the mythical river Saraswati. Magh Mela is marked by (snan) ritual bathing and taking up temporary residence near Sangam in the month Magh and leading an austere life devoted to prayers and rituals (kalpavas) according to their vows. The month of Magh begins with Paush Purnima and ends with Magh Purnima. But, the Magh Mela begins on Makkar Sankranti or Paush Purnima (whichever is earlier) and ends with Maha Shivaratri because of administrative reasons. Lord Vishnu is the presiding deity of Allahabad as well as the month of Magh which is considered to be the most auspicious month for Hindus. Allahabad is also known as Tirthraj Prayag. In other words, Allahabad is the king of pilgrimage sites for Hindus. Separate chapters are devoted to the most auspicious months of the Hindu calendar in the Puranas in the form of Vaishak Mahatmaya, Kartik Mahatmaya and Magh Mahatmaya explaining the significance of each month. The most important ritual for Vaishak is charity (daan). Similarly, the main ritual for Kartik is offerings in the form of earthen lamps (deep daan); and, the main ritual for Magh is ritual bathing (snan). Therefore, Magh Mela is essentially a bathing festival coupled with kalpavas. And, Tirthraj Prayag is the sacred land that has been designated for Magh Mela by Hindu scriptures. That is the secret of Magh Mela.
Prayag Ki Ramlila
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

-
Description:
प्रयाग की रामलीला कब से आयोजित हो रही है, इसका साक्ष्य मुगल शासक अकबर काल से मिलने लगता है, किन्तु अर्थ यह नहीं कि प्रयाग की रामलीला अकबर के समय से शुरू हुई थी। प्रयाग में रामलीला का आयोजन मुगल काल के पहले से होता रहा है। जहाँ तक, भारत का प्रश्न है, इस देश में रामलीला ईसा की आरम्भिक शतियों से होती चली आ रही है। इसका सबसे प्राचीन साक्ष्य पंतजलि का महाभाष्य है, जिसमें वानरों तथा राक्षसों एवं उनके दलों के युद्धों का संकेत मिलता है—एते श्वेतमुखा: एते कृष्णमुखा:.....आदि। नाट्य परम्परा में इसके सबसे प्राचीनतम साक्ष्य भास कृत प्रतिमा तथा अभिषेक नाटक के हैं। यही नहीं, यह रामकथा नाट्य तथा लीला के साथ-साथ प्रारम्भ से ही मधुर संगीत परम्परा से भी सम्बद्ध रही है। वाल्मीकि स्वयं कहते हैं, रामकथा में प्रवीण कुशीलव नामक चारण जातियाँ राजदरबारों में इसका तंत्रीस्वरों के साथ गायन करती रही हैं।
इस संदर्भ को केन्द्र में रखते हुए ‘ऐतिहासिकता तथा समसामयिकता’ इन दोनों से समन्वित पुस्तक ‘प्रयाग की रामलीला’ आपके सामने है। आज प्रयाग नगर के प्रत्येक मुहल्लों तथा जनपद की प्रत्येक तहसीलों के विविध कस्बों तथा गांवों में इस समय जिस उत्साह के साथ लीला आयोजन की चमक दिखाई पड़ती है, लगता है, लोक-जीवन की त्यागमयी, आदर्श आचरणमयी तथा कल्याणमयी नयी चेतना फिर से ग्यारह दिनों के लिए जन-जन के बीच परमोन्मेष के साथ उमंगित हो उठी है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book