Hindu Dharma Vishwakosh
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हिंदू धर्म को सर्वाधिक प्राचीन और शाश्वत धर्म होने का गौरव प्राप्त है। भारत की लगभग तीन-चौथाई आबादी हिंदू धर्मावलंबी है। दुनिया के दूसरे देशों में भी हजारों हिंदू मतावलंबी रहते हैं। हिंदू धर्म का कोई संस्थापक नहीं है, न ही इसका प्रतिपादन किसी एक व्यक्ति अथवा ईश्वर द्वारा हुआ है—जैसा कि पहले ही कहा गया है—यह शाश्वत धर्म है। हिंदू धर्म में लोग अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। यह इस धर्म की विविधता, उदारता और उदात्तता है कि इसमें नदियों, वृक्षों और पर्वतों को भी देवी-देवताओं की भाँति पूजा जाता है। पूजा, प्रार्थना, आराधना, स्तुति—मार्ग के अंतिम और सर्वोच्च पड़ाव हैं, इसलिए हिंदू धर्म ग्रंथ मोक्ष-प्राप्ति के उपायों से भरे पड़े हैं। प्रस्तुत विश्वकोश हिंदू-धर्म के बारे में व्यापक रूप से प्रकाश डालता है। इससे हिंदू-धर्म के बारे में अब तक अज्ञात कई विषयों के बारे में जानकारी पाई जा सकती है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि इस पुस्तक द्वारा हिंदू धर्म एवं उसकी संस्कृति को न केवल जाना जा सकता है वरन् उसे सीखा भी जा सकता है। हिंदू धर्म के गौरव और श्रेष्ठता को रेखांकित और पुनर्स्थापित करनेवाली पठनीय कृति।
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हिंदू धर्म को सर्वाधिक प्राचीन और शाश्वत धर्म होने का गौरव प्राप्त है। भारत की लगभग तीन-चौथाई आबादी हिंदू धर्मावलंबी है। दुनिया के दूसरे देशों में भी हजारों हिंदू मतावलंबी रहते हैं। हिंदू धर्म का कोई संस्थापक नहीं है, न ही इसका प्रतिपादन किसी एक व्यक्ति अथवा ईश्वर द्वारा हुआ है—जैसा कि पहले ही कहा गया है—यह शाश्वत धर्म है। हिंदू धर्म में लोग अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। यह इस धर्म की विविधता, उदारता और उदात्तता है कि इसमें नदियों, वृक्षों और पर्वतों को भी देवी-देवताओं की भाँति पूजा जाता है। पूजा, प्रार्थना, आराधना, स्तुति—मार्ग के अंतिम और सर्वोच्च पड़ाव हैं, इसलिए हिंदू धर्म ग्रंथ मोक्ष-प्राप्ति के उपायों से भरे पड़े हैं।
प्रस्तुत विश्वकोश हिंदू-धर्म के बारे में व्यापक रूप से प्रकाश डालता है। इससे हिंदू-धर्म के बारे में अब तक अज्ञात कई विषयों के बारे में जानकारी पाई जा सकती है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि इस पुस्तक द्वारा हिंदू धर्म एवं उसकी संस्कृति को न केवल जाना जा सकता है वरन् उसे सीखा भी जा सकता है। हिंदू धर्म के गौरव और श्रेष्ठता को रेखांकित और पुनर्स्थापित करनेवाली पठनीय कृति।
Book Details
-
ISBN9789350484470
-
Pages264
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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