Vaigyanik Kosh
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Author:
Shanti Gunakar MuleyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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विज्ञान और वैज्ञानिकों का मनुष्य-जीवन और सभ्यता के लिए अतुल्य योगदान रहा है। विकास के रथ को तीव्र गति से आगे बढ़ाने में उन्होंने बहुधा अपने जीवन और जीवन की सुख-सुविधाओं तक को महत्त्व नहीं दिया। यह ‘वैज्ञानिक कोश’ संसार के ऐसे ही वैज्ञानिकों से हमारा परिचय कराता है जिनके आविष्कारों और खोजों ने दुनिया को इतना उन्नत और सुविधाजनक बनाया है जिसमें रहते हुए हम मानव-जाति के भविष्य के बारे में सोच सकते हैं। इनमें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक भी शामिल हैं जिनका परिचय अलग से दिया गया है। हिन्दी में अभी तक ऐसी और इतनी विस्तृत पुस्तक उपलब्ध नहीं थी। यह हिन्दी के प्रमुख विज्ञान-लेखक गुणाकर मुळे के बरसों के श्रम का नतीजा है, जिसे अन्तिम रूप उनकी पत्नी और सुपुत्र ने सावधानी और यत्नपूर्वक दिया है। हर पाठक के लिए उपयोगी यह कोश न सिर्फ़ विश्व के महान वैज्ञानिकों के जीवन, उनके आविष्कारों और उपलब्धियों के विषय में आवश्यक जानकारी देता है, बल्कि हमें वैज्ञानिक ढंग से सोचने को भी प्रेरित करता है। परिशिष्ट में प्रस्तुत की गई सामग्री इस अध्ययन को और भी उपयोगी बनाती है जिसमें भौतिकी, रसायन और चिकित्सा विज्ञान आदि विषयों की संक्षिप्त एवं सारगर्भित जानकारी दी गई है।
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विज्ञान और वैज्ञानिकों का मनुष्य-जीवन और सभ्यता के लिए अतुल्य योगदान रहा है। विकास के रथ को तीव्र गति से आगे बढ़ाने में उन्होंने बहुधा अपने जीवन और जीवन की सुख-सुविधाओं तक को महत्त्व नहीं दिया। यह ‘वैज्ञानिक कोश’ संसार के ऐसे ही वैज्ञानिकों से हमारा परिचय कराता है जिनके आविष्कारों और खोजों ने दुनिया को इतना उन्नत और सुविधाजनक बनाया है जिसमें रहते हुए हम मानव-जाति के भविष्य के बारे में सोच सकते हैं। इनमें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक भी शामिल हैं जिनका परिचय अलग से दिया गया है। हिन्दी में अभी तक ऐसी और इतनी विस्तृत पुस्तक उपलब्ध नहीं थी। यह हिन्दी के प्रमुख विज्ञान-लेखक गुणाकर मुळे के बरसों के श्रम का नतीजा है, जिसे अन्तिम रूप उनकी पत्नी और सुपुत्र ने सावधानी और यत्नपूर्वक दिया है। हर पाठक के लिए उपयोगी यह कोश न सिर्फ़ विश्व के महान वैज्ञानिकों के जीवन, उनके आविष्कारों और उपलब्धियों के विषय में आवश्यक जानकारी देता है, बल्कि हमें वैज्ञानिक ढंग से सोचने को भी प्रेरित करता है। परिशिष्ट में प्रस्तुत की गई सामग्री इस अध्ययन को और भी उपयोगी बनाती है जिसमें भौतिकी, रसायन और चिकित्सा विज्ञान आदि विषयों की संक्षिप्त एवं सारगर्भित जानकारी दी गई है।
Book Details
-
ISBN9789360860714
-
Pages424
-
Avg Reading Time14 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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फ़ारसी भाषा, हिन्दी की ही तरह, भारतीय आर्य भाषा उपकुल का एक भाग है। ईरान एवं भारत, दोनों कृषि–प्रधान देश रहे हैं। दोनों की संस्कृतियों में अनेक समानताएँ आज भी विद्यमान हैं। मुग़ल–पूर्व, मुग़ल और मुग़लोत्तर शासन के दौरान हिन्दुस्तान में फ़ारसी भाषा का प्रसार एवं प्रचार अपनी चरम सीमा पर था। कबीरदास, सूरदास, मलिक मुहम्मद जायसी जैसे हिन्दी के कालजयी महान कवियों ने फ़ारसी भाषा के अनेक शब्दों को अपनी भावाभिव्यक्ति का साधन बनाया और उनका रचनात्मक प्रयोग किया। इस प्रकार कहा जा सकता है कि फ़ारसी ने हिन्दी साहित्य की रचनाधर्मिता पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। फ़ारसी के अनेक शब्द ऐसे भी हैं, जिनका चलन आज ईरान में लगभग समाप्त हो चला है, लेकिन हिन्दी में वे अब भी जीवित हैं और साहित्य में ही नहीं, आम बोलचाल की भाषा में प्रयोग किए जा रहे हैं। फ़ारसी के अनेक मुहावरे अनूदित होकर हिन्दी की निधि बन चुके हैं। प्रस्तुत ‘फ़ारसी–हिन्दी शब्दकोश’ हज़ारों वर्षों में फैले भारत–ईरान के सांस्कृतिक सम्बन्धों को रेखांकित करनेवाला प्रथम शब्दकोश है। विभिन्न विषयों एवं अलग–अलग परिप्रेक्ष्यों से सम्बन्धित लगभग 25,000 शब्द–प्रविष्टियों से सम्पन्न यह शब्दकोश, जिसमें पुरातन और नवीन दोनों प्रकार की अर्थ–परम्पराओं का समावेश है, प्राचीन और अर्वाचीन शब्दों का सुन्दर मिश्रण है। आशा है, यह शब्दकोश विभिन्न प्रकार के अध्ययनकर्ताओं तथा सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।
Hindustani Shastriya Sangeet Ka Shabd Kosh
- Author Name:
Pandit Amarnath
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पंडित अमरनाथ को ‘संगीतकारों का संगीतकार’ कहा जाता है। इस कोश में उन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तकनीकी शब्दावली को जन साधारण के हितार्थ बहुत आसान शब्दों में प्रस्तुत किया है। ‘आवर्त’ और ‘खरज भरना’ जैसे जटिल पदों से लेकर ‘मूर्छना’ और ‘श्रुति’ जैसी सांगीतिक शब्दावली को व्याख्यायित करते हुए यहाँ वे हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की उन परम्पराओं, उसके दार्शनिक और कला-पक्षों को सहृदय श्रोताओं-पाठकों के लिए बोधगम्य कर रहे हैं जिनका ज्ञान अभी तक उस्तादों और पारखी जनों तक ही सीमित था। संगीत क्षेत्र के महान गुरुओं की प्रसिद्ध उक्तियों और प्रचलित कहावतों-मुहावरों की पृष्ठभूमि और अर्थ-विश्लेषण इस शब्दकोश को और भी पठनीय तथा रुचिकर बनाता है। पंडित अमरनाथ इनकी व्युत्पत्ति व संगीत के अभ्यास व प्रस्तुति में उनके निहितार्थों को दिलचस्प ढंग से स्पष्ट करते हैं। पुस्तक की विशेष उपलब्धि रेखा भारद्वाज की प्रस्तावना और पंडितजी की सुपुत्री बिन्दु चावला द्वारा लिखित उनका जीवन- परिचय है। संगीतप्रेमी पाठकों, छात्रों, भाषाविदों और इतिहास अध्येताओं के लिए यह पुस्तक समान रूप से उपयोगी है।
Vishva Kala Gyan Kosh
- Author Name:
Roop Narayan Batham
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‘विश्व कला ज्ञान कोश’ भारत की किसी भी भाषा में कला और कलाकार विषयक पहला सन्दर्भ ज्ञान कोश है, जिसमें विद्यार्थियों, अध्यापकों तथा सामान्य कला प्रेमियों के लिए विश्व की कला और कलाकारों से जुड़ी हजारों सामान्य ज्ञान की जानकारियाँ एक ही स्थान पर जुटाई गई हैं। कला और कलाकारों की समग्रता की संक्षिप्त, सरल और रोचक ढंग से जानकारी देना इस कोश का मुख्य उद्देश्य है। कला के तकनीकी शब्दों की पारिभाषिक जानकारी, देशी तथा विदेशी कलाकारों के नाम तथा उच्चारण, जीवन-काल, योगदान, प्रेरक संस्मरण, कालानुक्रमिक विश्व कला का विकास, विश्व के कलातीर्थ, शैक्षणिक व शोध-संस्थान, कला के क्षेत्र में छात्रवृत्ति देने वाले विश्वविद्यालय तथा फाउण्डेशन आदि से सम्बन्धित जानकारियाँ भी इसमें संग्रहित हैं। छात्रों और प्राध्यापकों के लिए मार्गदर्शक और संग्रहणीय कोश।
Tehzeebi Shabdkosh
- Author Name:
Naima Jafri Pasha
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इंसानी ज़िन्दगी लगातार विकसित होती रही है जो समय का बुनियादी सच है, इस विकास के जुलूस में ज़बान की बहुत सी शक्लें और आवाज़ें मिटती और नई शक्लें और आवाज़ें उभरती रहती हैं जिन्हें वापस नहीं लाया जा सकता। लेकिन फिर भी हम समय के बहाव में चली जाने वाली अपनी सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को सहेजने और समेटने का काम तो कर ही सकते हैं। ये किताब भी इसी उर्दू विरासत को महफ़ूज़ रखने की एक कोशिश है। इस शब्दकोश में आज से कोई सौ-डेढ़ सौ साल पहले तक उर्दू कल्चर का प्रतिनिधित्व करने वाली शब्दावली को संकलित किया गया है। इस शब्दावली में, उस ज़माने में आम और ख़ास लोगों की ज़िन्दगी, ज़िन्दगी गुज़ारने के तरीक़ों, विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों से सम्बन्धित शब्द और मुहावरे शामिल किए गए हैं।
Persian Hindi Dictionary : Vols. 1
- Author Name:
Chandrashekhar
- Book Type:

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फ़ारसी भाषा, हिन्दी की ही तरह, भारतीय आर्य भाषा उपकुल का एक भाग है। ईरान एवं भारत, दोनों कृषि–प्रधान देश रहे हैं। दोनों की संस्कृतियों में अनेक समानताएँ आज भी विद्यमान हैं। मुग़ल–पूर्व, मुग़ल और मुग़लोत्तर शासन के दौरान हिन्दुस्तान में फ़ारसी भाषा का प्रसार एवं प्रचार अपनी चरम सीमा पर था। कबीरदास, सूरदास, मलिक मुहम्मद जायसी जैसे हिन्दी के कालजयी महान कवियों ने फ़ारसी भाषा के अनेक शब्दों को अपनी भावाभिव्यक्ति का साधन बनाया और उनका रचनात्मक प्रयोग किया। इस प्रकार कहा जा सकता है कि फ़ारसी ने हिन्दी साहित्य की रचनाधर्मिता पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। फ़ारसी के अनेक शब्द ऐसे भी हैं, जिनका चलन आज ईरान में लगभग समाप्त हो चला है, लेकिन हिन्दी में वे अब भी जीवित हैं और साहित्य में ही नहीं, आम बोलचाल की भाषा में प्रयोग किए जा रहे हैं। फ़ारसी के अनेक मुहावरे अनूदित होकर हिन्दी की निधि बन चुके हैं।
प्रस्तुत ‘फ़ारसी–हिन्दी शब्दकोश’ हज़ारों वर्षों में फैले भारत–ईरान के सांस्कृतिक सम्बन्धों को रेखांकित करनेवाला प्रथम शब्दकोश है। विभिन्न विषयों एवं अलग–अलग परिप्रेक्ष्यों से सम्बन्धित लगभग 25,000 शब्द–प्रविष्टियों से सम्पन्न यह शब्दकोश, जिसमें पुरातन और नवीन दोनों प्रकार की अर्थ–परम्पराओं का समावेश है, प्राचीन और अर्वाचीन शब्दों का सुन्दर मिश्रण है।
आशा है, यह शब्दकोश विभिन्न प्रकार के अध्ययनकर्ताओं तथा सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।
Angrezi-Hindi Prashasanik Kosh
- Author Name:
Dr. Kailash Chandra Bhatia
- Book Type:

- Description:
Angrezi-Hindi Prashasanik Kosh
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