Khel-Khel Mein Shishu Shiksha
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Author:
Pratapmal DevpuraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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किसी शिशु के जीवन के प्रारम्भिक छह वर्ष सामान्य मान्यता के अनुसार अत्यधिक नाजुक वर्ष माने गए हैं। क्योंकि इस दौरान उसके विकास की गति बहुत तेज़ होती है। इन वर्षों में उसे गुणात्मक रूप से उत्प्रेरक एवं समृद्ध वातावरण की आवश्यकता होती है, जिससे कि उसके समग्र विकास को उस बिन्दु तक ले जाना सम्भव हो, जहाँ उसकी समस्त आन्तरिक सम्भावनाएँ फलीभूत हो सकें। प्रस्तुत सन्दर्भिका शिशुओं के विकास में विद्यालयों के साथ ही परिवार की भूमिका को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। सन्दर्भिका में दी गई प्रेरक गतिविधियाँ केवल मार्गदर्शन के लिए दी गई हैं। इन गतिविधियों में आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन कर सकते हैं। अन्त में कुछ वैसी ही गतिविधियाँ करने के संकेत लिखे गए हैं। इस सन्दर्भिका का उपयोग करते समय यह ध्यान में रखना चाहिए कि अधिकांश गतिविधियाँ, खेल-खिलौने जो कि छोटी आयु वर्ग के लिए दिए गए हैं, वे बड़ी आयु वर्ग के लिए भी उपयोग में लाए जा सकते हैं। आशा है, यह पुस्तिका विद्यालयों, शिक्षकों, माता-पिताओं सभी के लिए उपयोगी होगी जिससे वे शिशुओं की सहायता करने में अधिक सक्रिय हो सकेंगे।
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किसी शिशु के जीवन के प्रारम्भिक छह वर्ष सामान्य मान्यता के अनुसार अत्यधिक नाजुक वर्ष माने गए हैं। क्योंकि इस दौरान उसके विकास की गति बहुत तेज़ होती है। इन वर्षों में उसे गुणात्मक रूप से उत्प्रेरक एवं समृद्ध वातावरण की आवश्यकता होती है, जिससे कि उसके समग्र विकास को उस बिन्दु तक ले जाना सम्भव हो, जहाँ उसकी समस्त आन्तरिक सम्भावनाएँ फलीभूत हो सकें।
प्रस्तुत सन्दर्भिका शिशुओं के विकास में विद्यालयों के साथ ही परिवार की भूमिका को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
सन्दर्भिका में दी गई प्रेरक गतिविधियाँ केवल मार्गदर्शन के लिए दी गई हैं। इन गतिविधियों में आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन कर सकते हैं। अन्त में कुछ वैसी ही गतिविधियाँ करने के संकेत लिखे गए हैं। इस सन्दर्भिका का उपयोग करते समय यह ध्यान में रखना चाहिए कि अधिकांश गतिविधियाँ, खेल-खिलौने जो कि छोटी आयु वर्ग के लिए दिए गए हैं, वे बड़ी आयु वर्ग के लिए भी उपयोग में लाए जा सकते हैं।
आशा है, यह पुस्तिका विद्यालयों, शिक्षकों, माता-पिताओं सभी के लिए उपयोगी होगी जिससे वे शिशुओं की सहायता करने में अधिक सक्रिय हो सकेंगे।
Book Details
-
ISBN9789382193029
-
Pages103
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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