Aao Chalen Gram-Sabha
About the book
आपको गाँवों के पंचायतीराज के बारे में जानने-समझने की जिज्ञासा रहती है। पंचायतें किस प्रकार कार्य करती हैं? इनका ढाँचा कैसा है? ग्राम पंचायत क्या है? हमारे देश में पंचायतीराज की व्यवस्था किस प्रकार की है? ग्रामसभा में क्या होता है? पंचायत विकास के कौन से कार्य करवाती है? कार्यों की निगरानी पंचायतें कैसे करती हैं? मनरेगा योजना में कैसे काम होता है?—इन सभी प्रश्नों के उत्तर आपको इस पुस्तक में पढ़ने को मिलेंगे। ये सारी जानकारियाँ ‘पंचायतीराज की छह कहानियों’ के माध्यम से दिया गया हैं। आपको पंचायत की नई-नई जानकारियाँ मिलेंगी। बाद की तीन कहानियों में जंगल में चुनाव के बहाने आपको यह जानने का मौक़ा भी मिलेगा कि चुनाव में क्या गड़बड़ियाँ होती हैं। अगली कहानियों में हमारे देश की जनगणना की ख़ास बातें भी पता लगेंगी। थर्मामीटर, सिलाई मशीन, बल्ब की कहानियाँ आपको विज्ञान की खोजों में आनेवाली कठिनाइयों का पता भी देंगी। साथ ही यह बताएँगी कि निरन्तर परिश्रम करके कठिनाइयों पर कैसे पार पाया जा सकता है। दो कहानियों में बैंक से लेन-देन की विधि भी जान पाएँगे। ‘प्याऊ-परम्परा’ को जीवित करने पर ज़ोर देती एक कहानी है। कहानियाँ सरल भाषा में लिखी गई हैं। एक बहुत ही महत्वपूर्ण कृति।
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About the Book
आपको गाँवों के पंचायतीराज के बारे में जानने-समझने की जिज्ञासा रहती है। पंचायतें किस प्रकार कार्य करती हैं? इनका ढाँचा कैसा है? ग्राम पंचायत क्या है? हमारे देश में पंचायतीराज की व्यवस्था किस प्रकार की है? ग्रामसभा में क्या होता है? पंचायत विकास के कौन से कार्य करवाती है? कार्यों की निगरानी पंचायतें कैसे करती हैं? मनरेगा योजना में कैसे काम होता है?—इन सभी प्रश्नों के उत्तर आपको इस पुस्तक में पढ़ने को मिलेंगे। ये सारी जानकारियाँ ‘पंचायतीराज की छह कहानियों’ के माध्यम से दिया गया हैं। आपको पंचायत की नई-नई जानकारियाँ मिलेंगी। बाद की तीन कहानियों में जंगल में चुनाव के बहाने आपको यह जानने का मौक़ा भी मिलेगा कि चुनाव में क्या गड़बड़ियाँ होती हैं। अगली कहानियों में हमारे देश की जनगणना की ख़ास बातें भी पता लगेंगी। थर्मामीटर, सिलाई मशीन, बल्ब की कहानियाँ आपको विज्ञान की खोजों में आनेवाली कठिनाइयों का पता भी देंगी। साथ ही यह बताएँगी कि निरन्तर परिश्रम करके कठिनाइयों पर कैसे पार पाया जा सकता है। दो कहानियों में बैंक से लेन-देन की विधि भी जान पाएँगे। ‘प्याऊ-परम्परा’ को जीवित करने पर ज़ोर देती एक कहानी है। कहानियाँ सरल भाषा में लिखी गई हैं। एक बहुत ही महत्वपूर्ण कृति।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2016
- Weight
- 272 grams
- ISBN-13
- 9789381863398
- Pages
- 112
- Reading time
- ~4 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 22 cm
- Language
- Hindi
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