Mohammed Aslam Parvez
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उर्दू साहित्य की दुनिया में मोहम्मद असलम परवेज़ का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। एक लंबे समय से वे रंगकर्मी के तौर पर हिंदी, उर्दू और हिंदुस्तानी रंगमंच से जुड़े हैं। उनके लिखे कई नाटक मुंबई के पृथ्वी और टाटा थिएटर के अलावा दूसरे शहरों में खेले जाते हैं। इसके अलावा मराठी और गुजराती प्रोफेशनल स्टेज पर भी उनके नाटक खेले जाते हैं। मोहम्मद असलम परवेज़ की एक पहचान मंटो आलोचक के रूप में भी है। उन्होंने मंटो को नई नज़रियों से समझने की कोशिश की। मंटो के हवाले से उनकी किताबें ‘आप का मंटो’, ‘मंटो और चचा सैम’, ‘मंटो:अफ़सानों के दरमियान’, और ‘मंटो:सियाह हाशिए और हाशिया अराइयाँ’ अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं।
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About Mohammed Aslam Parvez
उर्दू साहित्य की दुनिया में मोहम्मद असलम परवेज़ का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। एक लंबे समय से वे रंगकर्मी के तौर पर हिंदी, उर्दू और हिंदुस्तानी रंगमंच से जुड़े हैं। उनके लिखे कई नाटक मुंबई के पृथ्वी और टाटा थिएटर के अलावा दूसरे शहरों में खेले जाते हैं। इसके अलावा मराठी और गुजराती प्रोफेशनल स्टेज पर भी उनके नाटक खेले जाते हैं। मोहम्मद असलम परवेज़ की एक पहचान मंटो आलोचक के रूप में भी है। उन्होंने मंटो को नई नज़रियों से समझने की कोशिश की। मंटो के हवाले से उनकी किताबें ‘आप का मंटो’, ‘मंटो और चचा सैम’, ‘मंटो:अफ़सानों के दरमियान’, और ‘मंटो:सियाह हाशिए और हाशिया अराइयाँ’ अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं।