Acharya Sohanlal Ramrang
आचार्य सोहनलाल रामरंग स्वांतः सुखाय कृतिकार, ओजस्वी वक्ता, सरस प्रवचनकर्ता, इतिहास तथा ज्योतिष के गंभीर अध्येता। काव्य-क्षेत्र में विविध विधाओं के आविष्कर्ता के साथ गद्य-क्षेत्र में भी उनकी गहरी पैठ है। अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं। देश की अनेक धार्मिक-सामाजिक-साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से संबंधित होने के अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय तुलसी संगम के संस्थापक प्रधानमंत्री भी हैं। अनेक कृतियों पर पी-एच.डी. हेतु शोध प्रबंध स्वीकृत। दो विद्वान् डी.लिट्. में भी कार्यरत हैं। प्रकाशित कृतियाँ : उत्तर साकेत (महाकाव्य) दो खंड, युगपुरुष तुलसी (बृहद् उपन्यास) दो खंड, श्रीराम कथा की कथा (शोध कृति) दो खंड, स्वातंत्र्य समर सत्र (1857-1947), श्रीहरि कीर्ति प्रभा (श्रीमद्भागवत संक्षिप्त रूप), दिल्ली की रामलीलाएँ (शोधकृति) के अतिरिक्त ग्यारह कृतियाँ प्रकाशित। नौ कृतियाँ प्रकाशनाधीन। कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से विभूषित।
Acharya Sohanlal Ramrang
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About Acharya Sohanlal Ramrang
अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं। देश की अनेक धार्मिक-सामाजिक-साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से संबंधित होने के अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय तुलसी संगम के संस्थापक प्रधानमंत्री भी हैं। अनेक कृतियों पर पी-एच.डी. हेतु शोध प्रबंध स्वीकृत। दो विद्वान् डी.लिट्. में भी कार्यरत हैं।
प्रकाशित कृतियाँ : उत्तर साकेत (महाकाव्य) दो खंड, युगपुरुष तुलसी (बृहद् उपन्यास) दो खंड, श्रीराम कथा की कथा (शोध कृति) दो खंड, स्वातंत्र्य समर सत्र (1857-1947), श्रीहरि कीर्ति प्रभा (श्रीमद्भागवत संक्षिप्त रूप), दिल्ली की रामलीलाएँ (शोधकृति) के अतिरिक्त ग्यारह कृतियाँ प्रकाशित। नौ कृतियाँ प्रकाशनाधीन।
कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से विभूषित।