Vasudev Sharan Agarwal
जन्म : 1904 शिक्षा : 1929 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.ए., 1946 में पीएच.डी. तथा में डी.लिट् की उपाधियाँ प्राप्त कीं। प्रकाशित कृतियाँ : ‘पृथ्वी-पुत्र’ (1949), ‘उरुज्योति’ (1952), ‘कला और संस्कृति’ (1952), ‘कल्पवृक्ष’ (1953), ‘माता भूमि’ (1953), ‘हर्षचरित - एक सांस्कृतिक अध्ययन’ (1953), ‘पोद्दार अभिनन्दन ग्रन्थ’ (1953), ‘भारत की मौलिक एकता’ (1954), ‘मलिक मुहम्मद जायसी : पद्मावत’ (1955), ‘पाणिनिकालीन भारतवर्ष’ (1955), ‘भारतसावित्री’ (1957), ‘कादम्बरी’ (1958)। राधाकुमुद मुखर्जी कृत ‘हिन्दू सभ्यता’ का अनुवाद (1955)। ‘शृंगारहाट’ का सम्पादन डॉ. मोती चन्द के साथ मिलकर। कालिदास के मेघदूत एवं बाणभट्ट के हर्षचरित की नवीन पीठिका प्रस्तुत की। भारतीय साहित्य और संस्कृति के गम्भीर अध्येता के रूप में देश के विद्वानों में अग्रणी। 1940 तक मथुरा के पुरातत्व संग्रहालय के अध्यक्ष पद पर रहे। 1946 से लेकर 1951 तक ‘सेंट्रल एशियन एक्टिविटीज म्यूजियम’ के सुपरिंटेंडेंट और ‘भारतीय पुरातत्व विभाग’ के अध्यक्ष पद पर कार्य। 1951 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ‘कॉलेज ऑफ इंडोलॉजी’ में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए। 1952 में ‘लखनऊ विश्वविद्यालय’ में राधाकुमुद मुखर्जी व्याख्यान निधि की ओर से व्याख्याता नियुक्त हुए। आप ‘भारतीय मुद्रा परिषद’ (नागपुर), ‘भारतीय संग्रहालय परिषद’ (पटना) और ‘ऑल इंडिया ओरियंटल कांग्रेस’, फ़ाइन आर्ट सेक्शन (मुम्बई) आदि संस्थाओं के सभापति भी रहे। निधन : 1966
Vasudev Sharan Agarwal
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About Vasudev Sharan Agarwal
शिक्षा : 1929 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.ए., 1946 में पीएच.डी. तथा में डी.लिट् की उपाधियाँ प्राप्त कीं।
प्रकाशित कृतियाँ : ‘पृथ्वी-पुत्र’ (1949), ‘उरुज्योति’ (1952), ‘कला और संस्कृति’ (1952), ‘कल्पवृक्ष’ (1953), ‘माता भूमि’ (1953), ‘हर्षचरित - एक सांस्कृतिक अध्ययन’ (1953), ‘पोद्दार अभिनन्दन ग्रन्थ’ (1953), ‘भारत की मौलिक एकता’ (1954), ‘मलिक मुहम्मद जायसी : पद्मावत’ (1955), ‘पाणिनिकालीन भारतवर्ष’ (1955), ‘भारतसावित्री’ (1957), ‘कादम्बरी’ (1958)।
राधाकुमुद मुखर्जी कृत ‘हिन्दू सभ्यता’ का अनुवाद (1955)। ‘शृंगारहाट’ का सम्पादन डॉ. मोती चन्द के साथ मिलकर। कालिदास के मेघदूत एवं बाणभट्ट के हर्षचरित की नवीन पीठिका प्रस्तुत की। भारतीय साहित्य और संस्कृति के गम्भीर अध्येता के रूप में देश के विद्वानों में अग्रणी।
1940 तक मथुरा के पुरातत्व संग्रहालय के अध्यक्ष पद पर रहे। 1946 से लेकर 1951 तक ‘सेंट्रल एशियन एक्टिविटीज म्यूजियम’ के सुपरिंटेंडेंट और ‘भारतीय पुरातत्व विभाग’ के अध्यक्ष पद पर कार्य। 1951 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ‘कॉलेज ऑफ इंडोलॉजी’ में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए। 1952 में ‘लखनऊ विश्वविद्यालय’ में राधाकुमुद मुखर्जी व्याख्यान निधि की ओर से व्याख्याता नियुक्त हुए। आप ‘भारतीय मुद्रा परिषद’ (नागपुर), ‘भारतीय संग्रहालय परिषद’ (पटना) और ‘ऑल इंडिया ओरियंटल कांग्रेस’, फ़ाइन आर्ट सेक्शन (मुम्बई) आदि संस्थाओं के सभापति भी रहे।
निधन : 1966