Sitanshu Yashashchandra

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समकालीन गुजराती साहित्य के एक मूर्धन्य लेखक हैं—कवि, नाटककार, विचारक, अनुवादक। आपके रचनात्मक, आलोचनात्मक और अकादेमिक कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा देश-विदेश में होती रही हैं। आप के.के. बिड़ला फ़ाउंडेशन के ‘सरस्वती सम्मान’ से विभूषित हैं और आपको केन्द्रीय साहित्य अकादेमी का पुरस्कार (1987), ‘राष्ट्रीय कबीर सम्मान’ (म.प्र.), ‘गंगाधर महेर सम्मान’ (ओडिसा), ‘कवि कुसुमाग्रज राष्ट्रीय पुरस्कार’ (महाराष्ट्र) 2013, ‘नेशनल हारमनी अवार्ड’, ‘रंजीतराम सुवर्ण चन्द्रक’ (अहमदाबाद) 1987, ‘गुजरात गौरव पुरस्कार’ (2014) आदि प्राप्त हुए हैं। अन्तरराष्ट्रीय फलक पर आपने अनेक संस्थानों, साहित्य-उत्सवों, विश्वविद्यालयों आदि में काव्य-पाठ किए हैं और अनेक देशों के प्रमुख निर्देशकों ने आपके नाटक मंचित किए हैं। आप फुलब्राइट स्कॉलर रहे हैं और आपको ‘फ़ोर्ड वेस्ट यूरोपियन शोधवृत्ति’ भी प्राप्त हुई है। आपने ‘सौराष्ट्र विश्वविद्यालय’ के कुलपति के रूप में अपनी सेवाएँ दी हैं और ‘यूजीसी’ के एमेरिटस प्रोफ़ेसर भी रहे हैं। आप ‘एम.एस. विश्वविद्यालय, बडौदा’ में गुजराती भाषा के प्रोफ़ेसर और अध्यक्ष रहे हैं और ‘सोरबन विश्वविद्यालय’ (पेरिस), ‘यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेनसिल्विया’, ‘लॉयला मेरीमाउंट यूनिवर्सिटी’ (लॉस एंजिल्स) और ‘जादवपुर विश्वविद्यालय’ (कोलकाता) में विजि़टिंग प्रोफ़ेसर भी रहे हैं। गुजराती भाषा में आपके चार से अधिक कविता-संग्रह, छ: नाटक और आलोचना-विमर्श की तीन पुस्तकें प्रकाशित हैं और अनेक कृतियों के देश-विदेश की भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हुए हैं। इन दिनों वडोदरा (गुजरात) में रहते हैं।

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