Shimazaki Tosone
शिमाज़ाकी तोसोन का जन्म 1872 में चिकुमा प्रान्त के मागोमे गाँव में हुआ। पिता मासाकी, माँ नुई की ये सात सन्तानों में से आख़िरी सन्तान थे। इनके द्वारा बाल किशोरों के लिए लिखी गई मुख्य रचनाएँ हैं : ‘ओसानाकी मोनो’ (‘नन्हे बच्चे,’ 1917), ‘फुरुसातो’ (‘अपना गाँव’, 1920), ‘ओसानामोनोगातारी’ (‘बच्चों की कहानी’, 1924), ‘नोबिजिताकू’ (‘किशोरावस्था’ 1925)। सन् 1906 में प्रकृतिवादी शिमाजाकी तोसोन ने ‘हाकाई’ (अवज्ञा) प्रकाशित की जिसमें ‘बुराकु’ (पददलित) समुदाय के प्रति पक्षपात एवं इनसे सम्बन्धित अन्य पहलुओं को उठाया गया है। इनकी अन्य मुख्य रचनाएँ हैं : ‘हारू’ (‘बसंत’, 1908), ‘इये’ (‘घर’, 1911), ‘योआकेमाये’ (‘पौ फटने के पहले’, 1932)। शिवाज़ाकी तासोन ने लोककथाओं की मौखिक परम्परा को काफ़ी महत्त्व दिया। इनके साहित्य में आम लोगों एवं ग्रामीण जीवन की संवेदनाएँ झलकती हैं। इन्होंने साहित्यिक जीवन के शुरुआत में ‘वाकानाशू’ (1897) नामक कविता-संग्रह लिखा, जिसके द्वारा जापान की कविता को नया आयाम मिला। इन्होंने किसानों, मज़दूर और ग्रामीण जीवन पर उस समय लिखा जब जापान में औद्योगिक विकास के तहत बड़े-बड़े कारख़ाने बन रहे थे। ये जवानी के दिनों में जितने ख़ुशमिज़ाज या रूमानी थे, उतने ही समय के साथ-साथ अन्तर्मुखी होते गए। निधन : सन् 1943
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About Shimazaki Tosone
सन् 1906 में प्रकृतिवादी शिमाजाकी तोसोन ने ‘हाकाई’ (अवज्ञा) प्रकाशित की जिसमें ‘बुराकु’ (पददलित) समुदाय के प्रति पक्षपात एवं इनसे सम्बन्धित अन्य पहलुओं को उठाया गया है।
इनकी अन्य मुख्य रचनाएँ हैं : ‘हारू’ (‘बसंत’, 1908), ‘इये’ (‘घर’, 1911), ‘योआकेमाये’ (‘पौ फटने के पहले’, 1932)।
शिवाज़ाकी तासोन ने लोककथाओं की मौखिक परम्परा को काफ़ी महत्त्व दिया। इनके साहित्य में आम लोगों एवं ग्रामीण जीवन की संवेदनाएँ झलकती हैं। इन्होंने साहित्यिक जीवन के शुरुआत में ‘वाकानाशू’ (1897) नामक कविता-संग्रह लिखा, जिसके द्वारा जापान की कविता को नया आयाम मिला। इन्होंने किसानों, मज़दूर और ग्रामीण जीवन पर उस समय लिखा जब जापान में औद्योगिक विकास के तहत बड़े-बड़े कारख़ाने बन रहे थे।
ये जवानी के दिनों में जितने ख़ुशमिज़ाज या रूमानी थे, उतने ही समय के साथ-साथ अन्तर्मुखी होते गए।
निधन : सन् 1943