Shahryar

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शहरयार उर्दू के अग्रणी आधुनिक शायरों में शामिल हैं और बतौर गीतकार , 'फ़िल्म उमराव जान', के गीतों के लिए मशहूर हैं। शहरयार अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिन्द) अलीगढ़ में लिटरेरी सहायक भी रहे और अंजुमन की पत्रिकाओं 'उर्दू दब' और 'हमारी ज़बान' के संपादक के तौर पर भी काम किया। उनकी किताब 'ख़्वाब के दर बंद हैं ' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी अवार्ड से भी नवाज़ा गया। शहरयार साहब फ़िराक़ गोरखपुरी, कुर्रतुलऐन हैदर, और अली सरदार जाफ़री के बाद चौथे ऐसे उर्दू साहित्यकार हैं जिन्हे ज्ञानपीठ सम्मान भी मिला। उर्दू शायरी में अहम भूमिका निभाने के लिए उन्हें और भी कई ख़िताब दिए गए हैं जिनमें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार, फ़िराक़ सम्मान, और दिल्ली उर्दू पुरस्कार प्रमुख हैं। संग-ए-मील पब्लिकेशंस, पाकिस्तान से उनका कुल्लियात प्रकाशित हुआ जिसमें उनकी शायरी के छ: संग्रह शामिल हैं । यही कुल्लियात 'सूरज को निकलता देखूँ' के नाम से भारत में भी प्रकाशित हो चुका है। उनके कलाम का अनुवाद फ्रेंच, जर्मन, रूसी, मराठी, बंगाली और तेलगू में हो चुका है।

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