About Sanjay Sinha
संजय सिन्हा जन्म से ही पत्रकार हैं। लिखना इनका पेशा है। रोज सुबह एक कहानी लिखते हैं। बचपन में ही अपनी माँ को खो दिया था। फिर पिता को और उसके बाद छोटे भाई को। रिश्तों की तलाश में फेसबुक पर लिखने लगे। वहीं माँ मिल गई। बहनें मिल गईं। भाई मिल गए। पचास हजार से ज्यादा लोगों का एक परिवार बन गया। संजय सिन्हा फेसबुक परिवार। इसके अलावा संजय सिन्हा का और कोई परिचय नहीं। उन्होंने एम.ए. तक पढ़ाई की है, ‘आजतक’ चैनल में कार्यकारी संपादक हैं, वे पूरी दुनिया घूम चुके हैं—ये बातें आज मायने नहीं रखतीं। आज तो बस इतना ही महत्त्वपूर्ण है कि संजय सिन्हा रिश्तों को जीते हैं। कहते हैं कि आदमी भावनाओं से संचालित होता है, कारणों से नहीं। कारणों से तो मशीनें चला करती हैं। एक उपन्यास—‘6.9 रिक्टर स्केल’, के बाद बाद उनकी कहानियों की कई किताबें आ चुकी हैं—‘रिश्ते’, ‘जिंदगी’, ‘समय’, ‘उम्मीद’, और ‘शुक्रिया’। आज एक बार फिर उनका सोचा, उनका लिखा आपके सामने है। अच्छा लगे तो अपनों से बाँटिएगा।.