Bhagwatilal Rajpurohit

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जन्म : 2 नवम्बर, 1943; चन्दोड़िया, धार, (मध्य प्रदेश)। शिक्षा : हिन्दी, संस्कृत तथा प्राचीन इतिहास में एम.ए., पीएच.डी.। डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित भारतीय विद्वत्परम्परा के अनन्य साधक, सर्जक और अनुसन्धाता रहे। साहित्य, संस्कृति, हिन्दी, मालवी में सतत लेखन करते रहे। प्रमुख कृतियाँ : ‘भारतीय कला और संस्कृति’, ‘भारतीय अभिलेख और इतिहास’, ‘राजा भोज’, ‘भारत के प्राचीन राजवंश’ (तीन भाग)—पं. विश्वेश्वरनाथ रेउकृत का सम्पादन, ‘राजा भोज का रचनाविश्व’, ‘प्रतिभा भोजराजस्य’, ‘भोजराज’, ‘कालिदास’, ‘कालिदास का वागर्थ’, ‘उज्जयिनी और महाकाल’, ‘विद्योत्तमा’ (उपन्यास); ‘वीणावासवदत्ता’ (हिन्दी में), ‘पद्यप्राभृतक’ (हिन्दी में), ‘सेज को सरोज’ (मालवी में), ‘हलकारो बादल’ (‘मेघदूत’ का मालवी में) का रूपान्‍तर; ‘मालवी लोकगीत’ (सम्पादन-अनुवाद)। सम्‍मान : मध्य प्रदेश संस्कृत अकादमी का ‘भोज पुरस्कार’ (1984, 1990), म.प्र. उच्च शिक्षा अनुदान आयोग द्वारा ‘डॉ. राधाकृष्णन सम्मान’ (1990, 1992), म.प्र. साहित्य परिषद् का ‘बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ पुरस्कार’ (1988) आदि। उज्जैन के सांदीपनि महाविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग में आचार्य और अध्यक्ष रहे।

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