Achala Bansal
अचला बंसल, अंग्रेज़ी की सम्मानित लेखिका हैं। उनकी कहानियाँ देश-विदेश की पत्रिकाओं में ससम्मान छपती रही हैं। अंग्रेज़ी में उनके चार कहानी-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ‘वन्स ए इयर इट्स मार्च’, ‘ऐस अपोन किंग’, ‘चैकमेट’ और 2016 में प्रकाशित ‘आई कॉन्टेक्ट’। ‘चैकमेट’ अचला बंसल की लीक से हटी पाँच कहानियों के संग्रह का नाम है, जो स्के्रव प्रेस, यू.के. से 2009 में प्रकाशित हुआ। उसमें प्रकाशित कहानी ‘चैकमेट’ को 2007 में यू.के. का ‘ए बुक $फॉर बोर्गेस’ पुरस्कार प्राप्त हुआ। अचला बंसल की कथा-शैली में सहजता, मौलिकता और बतरस का अद्भुत समन्वय देखा जा सकता है। हिन्दी में अनूदित उनकी कई कहानियाँ 2009-10 में ‘आउटलुक’, ‘जनसत्ता’, ‘पाखी’, ‘हंस’ आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। कुछ कहानियाँ तेलुगू आदि अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनूदित हैं। 2014 में अन्य दो लेखिका बहनों के साथ उनकी कहानी ‘कैरम की गोटियाँ’ ‘बिसात : तीन बहनें तीन आख्यान’ नामक पुस्तक में संकलित हुई है और विशेष रूप से चर्चित-प्रशंसित रही है। मनीष त्रिपाठी के शब्दों में, ‘‘इनके लेखन में ऐसी विविधता है जैसे रोशनी की एक लकीर प्रिज़्म से गुज़रकर सात रंगों में बदल जाती है।’’
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About Achala Bansal
‘चैकमेट’ अचला बंसल की लीक से हटी पाँच कहानियों के संग्रह का नाम है, जो स्के्रव प्रेस, यू.के. से 2009 में प्रकाशित हुआ। उसमें प्रकाशित कहानी ‘चैकमेट’ को 2007 में यू.के. का ‘ए बुक $फॉर बोर्गेस’ पुरस्कार प्राप्त हुआ।
अचला बंसल की कथा-शैली में सहजता, मौलिकता और बतरस का अद्भुत समन्वय देखा जा सकता है। हिन्दी में अनूदित उनकी कई कहानियाँ 2009-10 में ‘आउटलुक’, ‘जनसत्ता’, ‘पाखी’, ‘हंस’ आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। कुछ कहानियाँ तेलुगू आदि अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनूदित हैं।
2014 में अन्य दो लेखिका बहनों के साथ उनकी कहानी ‘कैरम की गोटियाँ’ ‘बिसात : तीन बहनें तीन आख्यान’ नामक पुस्तक में संकलित हुई है और विशेष रूप से चर्चित-प्रशंसित रही है। मनीष त्रिपाठी के शब्दों में, ‘‘इनके लेखन में ऐसी विविधता है जैसे रोशनी की एक लकीर प्रिज़्म से गुज़रकर सात रंगों में बदल जाती है।’’