Abhayanand
बिहार कैडर (1977 बैच) के आई.पी.एस. अधिकारी रहे अभयानंद ने डी.जी.पी. के रूप में बिहार पुलिस का नेतृत्व किया। अपने अनोखे अन्दाज़ में उन्होंने विभाग में अनदेखे-अनसुने आविष्कारों से अपनी एक अलग पहचान बनाई। समाज उन्हें एक समाज-सेवी और शिक्षाविद् के रूप में भी जानता है। ‘सुपर 30’ के माध्यम से उन्होंने पिछले बीस वर्षों में असंख्य ग़रीब मेधावी विद्यार्थियों के जीवन का नव-निर्माण किया है। 2015 में सेवानिवृत्ति के पश्चात वे शहर की भीड़भाड़ से दूर, प्रकृति की गोद में निवास करते हैं और जनहित की ओर प्रयासरत हैं। बच्चों को पढ़ाने के अतिरिक्त आजकल बिहार के कृषि-संस्कार और उससे जुड़े स्वास्थ्य पोषण के सुधार में जुटे हैं। इस कार्य में उनका आह्वान उनकी सुपुत्री ऋचा ने किया है। उनका मानना है कि पारम्परिक खान-पान की पुनःस्थापना अत्यन्त आवश्यक है जिससे सम्भवतः समाज में हो रहे स्वास्थ्य तथा संस्कृति सम्बन्धी क्षरण को रोका जा सकता है।
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About Abhayanand
‘सुपर 30’ के माध्यम से उन्होंने पिछले बीस वर्षों में असंख्य ग़रीब मेधावी विद्यार्थियों के जीवन का नव-निर्माण किया है। 2015 में सेवानिवृत्ति के पश्चात वे शहर की भीड़भाड़ से दूर, प्रकृति की गोद में निवास करते हैं और जनहित की ओर प्रयासरत हैं। बच्चों को पढ़ाने के अतिरिक्त आजकल बिहार के कृषि-संस्कार और उससे जुड़े स्वास्थ्य पोषण के सुधार में जुटे हैं। इस कार्य में उनका आह्वान उनकी सुपुत्री ऋचा ने किया है। उनका मानना है कि पारम्परिक खान-पान की पुनःस्थापना अत्यन्त आवश्यक है जिससे सम्भवतः समाज में हो रहे स्वास्थ्य तथा संस्कृति सम्बन्धी क्षरण को रोका जा सकता है।