Zehra Nigah

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ज़ेहरा निगाह का जन्म भारत के हैदराबाद में 1936 में हुआ और 1947 में उनका परिवार कराची पाकिस्तान चला गया। 1950 में महज़ चौदह बरस की उम्र से उनकी शायरी का सफ़र शुरू हुआ, और अब तक जारी है। ज़ेहरा निगाह की शायरी ज़्यादातर औरत की ज़िन्दगी और आवाज़ की आईना-दार है, मगर उनकी शायरी के मैदान में विषयों के दूसरे पड़ाव भी आते हैं। जनरल ज़िया के दौर-ए-हुकूमत में आपने दमनकारी हुदूद अध्यादेश के ख़िलाफ़ भी आवाज़ उठाई। ज़ेहरा निगाह की किताबों में ‘शाम का पहला तारा’, ‘वरक़’, और ‘फ़िराक़’ जैसे शेरी मजमूए शामिल हुए हैं। उनकी नज़्मों, ग़ज़लों का हिन्दी और अंग्रेज़ी के साथ दूसरी कई ज़बानों में तर्जुमा भी हो चुका है। ज़ेहरा निगाह को पाकिस्तान में अल्लामा इक़बाल अवार्ड और अवार्ड बरा-ए-हुस्न-ए-कारकर्दगी (प्राइड ऑफ़ परफ़ॉरमेंस) से नवाज़ा जा चुका है। ज़ेहरा निगाह का कलाम मुख़्तसर मगर असर-अंगेज़ है।

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