Vimlesh Kanti Verma
जन्म : 1943, इलाहाबाद। डॉ. विमलेश कान्ति वर्मा लब्धप्रतिष्ठ भाषावैज्ञानिक हैं। लगभग पाँच दशकों से दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी भाषा और अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान का अध्यापन कर रहे हैं। आप रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड (लन्दन) के फेलो भी हैं। विदेश में हिन्दी के प्रचार-प्रसार से दीर्घकाल तक सम्बद्ध। टोरंटो विश्वविद्यालय, कनाडा, सोफिया विश्वविद्यालय, बल्गारिया तथा यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ पेसिफिक, फीजी में हिन्दी भाषा और साहित्य का अध्यापन तथा फीजी के भारतीय उच्चायोग में प्रथम सचिव (हिन्दी और शिक्षा) के पद पर हिन्दी की महती सेवा। ‘फीजी में हिन्दी : स्वरूप और विकास’ तथा ‘फीजी का सृजनात्मक हिन्दी साहित्य’ आपकी महत्त्वपूर्ण शोधपरक कृतियाँ हैं। हिन्दी भाषा अध्ययन और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान को देखते हुए भारत के राष्ट्रपति उन्हें महापंडित राहुल सांकृत्यायन सम्मान तथा विदेश में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘हिन्दी विदेश प्रसार सम्मान’ दिया है। बल्गारिया और भारत के सांस्कृतिक सम्बन्धों को सुदृढ़ करने में उनके योगदान के लिए बल्गारिया की सरकार ने उन्हें-1300 बल्गारिया तथा क्लोंका लावरोवा पुरस्कार से सम्मानित किया है।
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About Vimlesh Kanti Verma
डॉ. विमलेश कान्ति वर्मा लब्धप्रतिष्ठ भाषावैज्ञानिक हैं। लगभग पाँच दशकों से दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी भाषा और अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान का अध्यापन कर रहे हैं। आप रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड (लन्दन) के फेलो भी हैं। विदेश में हिन्दी के प्रचार-प्रसार से दीर्घकाल तक सम्बद्ध। टोरंटो विश्वविद्यालय, कनाडा, सोफिया विश्वविद्यालय, बल्गारिया तथा यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ पेसिफिक, फीजी में हिन्दी भाषा और साहित्य का अध्यापन तथा फीजी के भारतीय उच्चायोग में प्रथम सचिव (हिन्दी और शिक्षा) के पद पर हिन्दी की महती सेवा।
‘फीजी में हिन्दी : स्वरूप और विकास’ तथा ‘फीजी का सृजनात्मक हिन्दी साहित्य’ आपकी महत्त्वपूर्ण शोधपरक कृतियाँ हैं।
हिन्दी भाषा अध्ययन और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान को देखते हुए भारत के राष्ट्रपति उन्हें महापंडित राहुल सांकृत्यायन सम्मान तथा विदेश में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘हिन्दी विदेश प्रसार सम्मान’ दिया है। बल्गारिया और भारत के सांस्कृतिक सम्बन्धों को सुदृढ़ करने में उनके योगदान के लिए बल्गारिया की सरकार ने उन्हें-1300 बल्गारिया तथा क्लोंका लावरोवा पुरस्कार से सम्मानित किया है।