Tarashankar Bandyopadhyay
ताराशंकर बंद्योपाध्याय आपका जन्म वीरभूमि (बंगाल) के अन्तर्गत लाभपुर ग्राम के एक ज़मींदार परिवार में 23 जुलाई, 1898 में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा के बाद आप सेंट जेवियर्स कॉलेज में प्रविष्ट हुए, किन्तु राजनीतिक हलचल से आपके अध्ययन में विघ्न पड़ा और आप अपने ग्राम में नज़रबन्द कर दिए गए। मुक्ति के बाद भी स्वास्थ्य गिर जाने के कारण आगे अध्ययन जारी न रखा जा सका। 1921 के असहयोग आन्दोलन में फिर कारावास हुआ। जेल से छूटने पर कुछ समय के लिए नौकरी की। तदनन्तर काव्य और नाटक के माध्यम से साहित्य में प्रवेश किया। उपन्यास-क्षेत्र में आपने अद्वितीय सफलता प्राप्त की। प्रारम्भिक साहित्यिक जीवन में ही आपने अपने उपन्यास ‘हाँसुली बाँकेर उपकथा’ लिखकर ‘शरद-स्मृति पुरस्कार’ प्राप्त किया। 1956 में आपको ‘आरोग्य निकेतन’ उपन्यास के लिए ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से इसी उपन्यास पर आपको ‘रवीन्द्र स्मारक पुरस्कार’ भी प्राप्त हुआ। ‘गणदेवता’ नामक उपन्यास पर ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्रदान किया गया। 14 सितम्बर, 1971 को कोलकाता में आपका निधन हुआ।
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About Tarashankar Bandyopadhyay
आपका जन्म वीरभूमि (बंगाल) के अन्तर्गत लाभपुर ग्राम के एक ज़मींदार परिवार में 23 जुलाई, 1898 में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा के बाद आप सेंट जेवियर्स कॉलेज में प्रविष्ट हुए, किन्तु राजनीतिक हलचल से आपके अध्ययन में विघ्न पड़ा और आप अपने ग्राम में नज़रबन्द कर दिए गए। मुक्ति के बाद भी स्वास्थ्य गिर जाने के कारण आगे अध्ययन जारी न रखा जा सका। 1921 के असहयोग आन्दोलन में फिर कारावास हुआ। जेल से छूटने पर कुछ समय के लिए नौकरी की। तदनन्तर काव्य और नाटक के माध्यम से साहित्य में प्रवेश किया।
उपन्यास-क्षेत्र में आपने अद्वितीय सफलता प्राप्त की। प्रारम्भिक साहित्यिक जीवन में ही आपने अपने उपन्यास ‘हाँसुली बाँकेर उपकथा’ लिखकर ‘शरद-स्मृति पुरस्कार’ प्राप्त किया।
1956 में आपको ‘आरोग्य निकेतन’ उपन्यास के लिए ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से इसी उपन्यास पर आपको ‘रवीन्द्र स्मारक पुरस्कार’ भी प्राप्त हुआ। ‘गणदेवता’ नामक उपन्यास पर ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
14 सितम्बर, 1971 को कोलकाता में आपका निधन हुआ।