T.M. Krishna

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थोडुर मादाबुसी कृष्णा कर्नाटिक शास्त्रीय संगीत के विख्यात गायक और गुरु होने के अलावा, लेखक, विचारक, शोधकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। वे पर्यावरण, साम्प्रदायिकता, सामाजिक-धार्मिक सुधार और संगीत बिरादरी के बारे में लगातार लिखते रहे हैं। संगीत में नये प्रयोग और नवाचार के लिए जाने जाते हैं। कला पर केन्द्रित ‘रीशेपिंग आर्ट’ (2013), कर्नाटिक संगीत के दर्शन, सौन्दर्यबोध, समाजशास्त्र और इतिहास पर केन्द्रित किताब ‘सदर्न म्यूज़िक : द कर्नाटिक स्टोरी’ (2013), ‘सेबस्टियन एंड संस’ (2020) उनकी प्रकाशित पुस्तकें है। एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी पर केन्द्रित उनके निबन्ध को 2017 में पेंगुइन बुक्स द्वारा प्रकाशित ‘कैरेवन बुक ऑफ़ प्रोफ़ाइल्स’ में शामिल किया गया। मशहूर गायिका बॉम्बे जयश्री और मैथिली चन्द्रशेखर के साथ मिलकर उन्होंने कर्नाटिक संगीत की पहली कॉफ़ी टेबल बुक ‘वॉयसेस विदिन’ भी प्रकाशित की जिसमें कर्नाटिक संगीत के सात मूर्धन्य कलाकारों के व्यक्तिचित्र हैं। देश-भर में अपने संगीत प्रस्तुतियों के अलावा वे विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में स्तम्भ एवं टिप्पणियाँ भी लिखते हैं। बतौर कलासाधक उन्होंने इस बात की पुरज़ोर वकालत की है कि कला अपनी ताक़त से भारतीय समाज के गहरे विभाजनों को पाट सकती है। उनके इस योगदान के लिए उन्हें 2016 के ‘रमन मैग्सेसे पुरस्कार’ से पुरस्कृत किया गया। 2014 में उनकी किताब ‘सदर्न म्यूज़िक : द कर्नाटिक स्टोरी’ को नॉन फ़िक्शन वर्ग में सर्वश्रेष्ठ पहली किताब का ‘टाटा लिटरेचर अवार्ड’ मिला। भारत में एकता बचाने और बढ़ाने के लिए उन्हें 2017 में ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय एकता सम्मान’, तमिल ईसाई संगम की तरफ़ से ‘ईसाई पेरारिंगनार सम्मान’, केरल राज्य सरकार की तरफ़ से संगीतज्ञों को दिया जाने वाला महत्‍वपूर्ण सम्मान ‘स्वाति संगीत पुरस्कार’ दिया गया है।

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