Shyam Manohar
जन्म : 27 फरवरी, 1942। मराठी के बहुचर्चित लेखक और चिन्तक हैं। पिछले पचास बरसों से लिख रहे श्याम मनोहर भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक रहे हैं। वे लगभग 7-8 वर्ष पुणे विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग से सृजनात्मक लेखन (नाटक) के अतिथि प्रोफ़ेसर के नाते भी जुड़े हुए थे। उनके अब तक दो कहानी-संकलन, आठ नाटक, नौ उपन्यास और एक भाषणों तथा समीक्षापरक लेखों का संकलन प्रकाशित हुए हैं और उन्हें मराठी के नामचीन प्रकाशकों ने प्रकाशित किया है। उनकी कई सारी रचनाएँ हिन्दी, कन्नड़, तेलुगू, तमिल, मलयालम तथा अन्य भाषाओं में अनूदित हुई हैं जिनमें उनका हिन्दी में अनूदित एक उपन्यास ‘बहुत लोग हैं’ (अनुवाद : निशिकान्त ठकार) विशेष उल्लेखनीय है। उनके उपन्यास पर ‘लिमिटेड माणुसकी’ फ़िल्म भी बनी है। उन्हें कहानी, उपन्यास और नाटकों के लिए कई राष्ट्रीय तथा राज्यस्तरीय पुरस्कार मिले हैं जिनमें ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘कुवेम्पु राष्ट्रीय पुरस्कार’, ‘सुमनांजलि राष्ट्रीय पुरस्कार’, ‘जीवन गौरव’ आदि पुरस्कार शामिल हैं।
Shyam Manohar
Filters Options
- Academics And References
- Action Adventure
- Art And Design
- Bilingual Kids
- Biographies And Autobiographies
- Board Books
- Business
- Contemporary Fiction
- Cookbooks
- Crime Thriller Mystery
- Economics
- Fantasy
- Folktales
- General Non Fiction
- Graphic Novels And Comic Books
- Health
- Health Fitness Nutrition
- Higher Education
- Historical Fiction
- History And Politics
- Horror
- Humour
- Language Linguistics
- Law
- Lifestyle And Wellness
- Literary Fiction
- Lyrics Songs
- Magazine
- Management
- Media
- Mythology
- Other
- Picture Books
- Plays
- Poetry
- Religion Spirituality
- Romance
- Satire
- Science
- Science Fiction
- Self Help
- Short Story Collections
- Society Social Sciences
- Sports
- Stem Books
- Technology
- Textbooks
- Travelogues
- Young Adults
About Shyam Manohar
मराठी के बहुचर्चित लेखक और चिन्तक हैं। पिछले पचास बरसों से लिख रहे श्याम मनोहर भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक रहे हैं। वे लगभग 7-8 वर्ष पुणे विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग से सृजनात्मक लेखन (नाटक) के अतिथि प्रोफ़ेसर के नाते भी जुड़े हुए थे।
उनके अब तक दो कहानी-संकलन, आठ नाटक, नौ उपन्यास और एक भाषणों तथा समीक्षापरक लेखों का संकलन प्रकाशित हुए हैं और उन्हें मराठी के नामचीन प्रकाशकों ने प्रकाशित किया है। उनकी कई सारी रचनाएँ हिन्दी, कन्नड़, तेलुगू, तमिल, मलयालम तथा अन्य भाषाओं में अनूदित हुई हैं जिनमें उनका हिन्दी में अनूदित एक उपन्यास ‘बहुत लोग हैं’ (अनुवाद : निशिकान्त ठकार) विशेष उल्लेखनीय है। उनके उपन्यास पर ‘लिमिटेड माणुसकी’ फ़िल्म भी बनी है। उन्हें कहानी, उपन्यास और नाटकों के लिए कई राष्ट्रीय तथा राज्यस्तरीय पुरस्कार मिले हैं जिनमें ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘कुवेम्पु राष्ट्रीय पुरस्कार’, ‘सुमनांजलि राष्ट्रीय पुरस्कार’, ‘जीवन गौरव’ आदि पुरस्कार शामिल हैं।