Shankar

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शंकर बंगला के सर्वाधिक चर्चित उपन्यासकार। ‘पथेर पांचाली’ की विश्वविश्रुत भूमि में 7 दिसम्बर, 1933 को जन्म। छोटी उम्र में ही बनगाँव से कलकत्ता चले आए। शिक्षा-दीक्षा वहीं हुई। प्रारम्भ से ही साहित्यानुरागी। आगे चलकर वैविध्यपूर्ण जीवनानुभव की तीव्रता के चलते लेखन की ओर प्रवृत्त हुए। प्रायः प्रत्येक कृति ख्याति के नए शिखर को छूती रही है। प्रथम उपन्यास ‘ये अनजाने’ 1954 में सुप्रसिद्ध बंगला पत्र ‘देश’ में प्रकाशित हुआ था जिसका इनकी अपनी कृतियों में ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण बंगला साहित्य में विशिष्ट स्थान है। 1958 में इनकी रम्य-रचना ‘जा बोलो ताई बोलो’ तथा 1960 में कहानी-संग्रह ‘एक दुई तीन’ प्रकाशित हुए। बहुचर्चित उपन्यास ‘चौरंगी’ 1962 में प्रकाशित। ‘योग-वियोग’, ‘स्थानीय समाचार’, ‘आशा-आकांक्षा’, ‘सीमाबद्ध सोने का घरौंदा’, ‘मरुभूमि’, ‘वित्त वासना’, ‘जन अरण्य’ आदि उल्लेखनीय उपन्यास हैं। ‘पात्र-पात्री’ इनका व्यंग्योपन्यास है तथा ‘ए पार बांग्ला ओ पार बांग्ला’ यात्रा-वृत्त। ‘सीमाबद्ध’ के आधार पर ही विश्वविख्यात सिने-निर्देशक सत्यजित रे ने बहुप्रशंसित फ़िल्म ‘कंपनी लिमिटेड’ बनाई थी। सत्यजित रे ने ‘जन अरण्य’ पर भी फ़िल्म बनाई जो अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर चुकी है। निधन : 20 फरवरी, 2026

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