Pushpa Sinha
2
Books
0
Rating
0
Follow
30 मार्च, 1953 को बिहार के पटना शहर में जन्म। बचपन कोलकाता में बीता, अध्ययन भी वहीं हुआ। विज्ञान, शिक्षा, कानून तथा मानवाधिकार की उपाधियाँ प्राप्त कीं। दिल्ली में अध्यापन के दौरान बच्चों के प्रति गहरी रुचि जागी, परिणामस्वरूप बच्चों के अधिकारों पर ‘ह्यूमन राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ नामक पुस्तक लिखी, जो अत्यधिक चर्चित हुई। अब तक विभिन्न विषयों पर पंद्रह पुस्तकें प्रकाशित। ‘इंडिया सोसाइटी ऑफ ऑथर्स’ की सदस्या हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा मौलिक कृति ‘मानव अधिकार एवं महिलाएँ (महिलानामा)’ वर्ष 2006 में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित। संप्रति : स्वतंत्र लेखन एवं अपनी आत्मकथा ‘पुष्पांजलि’ लिखने में संलग्न।
Pushpa Sinha
2
Books
Filters Options
Categories
+
- Academics And References
- Action Adventure
- Art And Design
- Bilingual Kids
- Biographies And Autobiographies
- Board Books
- Business
- Contemporary Fiction
- Cookbooks
- Crime Thriller Mystery
- Economics
- Fantasy
- Folktales
- General Non Fiction
- Graphic Novels And Comic Books
- Health
- Health Fitness Nutrition
- Higher Education
- Historical Fiction
- History And Politics
- Horror
- Humour
- Language Linguistics
- Law
- Lifestyle And Wellness
- Literary Fiction
- Lyrics Songs
- Magazine
- Management
- Media
- Mythology
- Other
- Picture Books
- Plays
- Poetry
- Religion Spirituality
- Romance
- Satire
- Science
- Science Fiction
- Self Help
- Short Story Collections
- Society Social Sciences
- Sports
- Stem Books
- Technology
- Textbooks
- Travelogues
- Young Adults
Featured Authors
+
Featured Writers
+
About Pushpa Sinha
30 मार्च, 1953 को बिहार के पटना शहर में जन्म। बचपन कोलकाता में बीता, अध्ययन भी वहीं हुआ। विज्ञान, शिक्षा, कानून तथा मानवाधिकार की उपाधियाँ प्राप्त कीं। दिल्ली में अध्यापन के दौरान बच्चों के प्रति गहरी रुचि जागी, परिणामस्वरूप बच्चों के अधिकारों पर ‘ह्यूमन राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ नामक पुस्तक लिखी, जो अत्यधिक चर्चित हुई। अब तक विभिन्न विषयों पर पंद्रह पुस्तकें प्रकाशित।
‘इंडिया सोसाइटी ऑफ ऑथर्स’ की सदस्या हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा मौलिक कृति ‘मानव अधिकार एवं महिलाएँ (महिलानामा)’ वर्ष 2006 में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित।
संप्रति : स्वतंत्र लेखन एवं अपनी आत्मकथा ‘पुष्पांजलि’ लिखने में संलग्न।
‘इंडिया सोसाइटी ऑफ ऑथर्स’ की सदस्या हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा मौलिक कृति ‘मानव अधिकार एवं महिलाएँ (महिलानामा)’ वर्ष 2006 में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित।
संप्रति : स्वतंत्र लेखन एवं अपनी आत्मकथा ‘पुष्पांजलि’ लिखने में संलग्न।