Nemichandra Jain

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जन्म : 16 अगस्त, 1919 (आगरा)। शिक्षा : एम.ए. (अंग्रेज़ी)। 1959-76 तक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में वरिष्ठ प्राध्यापक। 1976-82 तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कला अनुशीलन केन्द्र में फेलो एवं प्रभारी। अंग्रेज़ी दैनिक ‘स्टेट्समैन’ और ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ के नाट्य-समीक्षक; ‘दिनमान’ तथा ‘नवभारत टाइम्स’ के स्तंभकार; रंगमंच की विख्यात पत्रिका ‘नटरंग’ के संस्थापक-सम्पादक एवं ‘नटरंग प्रतिष्ठान’ के संस्थापक अध्यक्ष। जीवन-यात्रा के दौरान अपने कार्यों में अन्यता सिद्ध करनेवाले नेमिचन्द्र जैन को भारत के राष्ट्रपति की ओर से ‘पद्मश्री’ अलंकरण, संगीत नाटक अकादमी द्वारा ‘राष्ट्रीय सम्मान’ तथा दिल्ली हिन्दी अकादमी के 'शलाका’ सम्मान से विभूषित किया गया था। कविताएँ : ‘तार-सप्तक’ (1944), ‘एकान्त’ (1973)। आलोचना : ‘अधूरे साक्षात्कार’ (उपन्यास-समीक्षा : 1966, 1989); ‘रंगदर्शन’ (रंगमंचीय समस्याओं का विवेचन, 1967, 1983, 1993); ‘बदलते परिप्रेक्ष्य’ (कविता और आलोचनात्मक निबन्ध, 1968); ‘जनांतिक’ (आलोचनात्मक निबन्ध, 1981); ‘पाया पत्र तुम्हारा’ (मुक्तिबोध के साथ पत्र-व्यवहार, 1984); ‘भारतीय नाट्य परम्परा’ (1989); ‘दृश्य अदृश्य’ (संस्कृति और रंगमंच सम्बन्धी निबन्ध, 1993); ‘इंडियन थिएटर’ (अंग्रेज़ी में भारत की नाट्य परम्परा का विवेचन, 1992); ‘रंग परम्परा’ (1996); ‘रंगकर्म की भाषा’ (1996); ‘तीसरा पाठ’ (चार दशक की नाट्य समीक्षाएँ, 1998)। सम्पादन : ‘मुक्तिबोध रचनावली’, 6 खंड (1980, 1985, 1998); ‘आधुनिक हिन्दी नाटक और रंगमंच’ (1979); ‘नए हिन्दी लघु नाटक’ (1986); ‘मोहन राकेश के सम्पूर्ण नाटक’ (1993)। अनुवाद : नाटक, उपन्यास, कविता, समालोचना, इतिहास, समाजशास्त्र, दर्शन, राजनीति सम्बन्धी अनेक ग्रन्थ। नाट्य-विशेषज्ञ के रूप में रूस, अमरीका, इंग्लैंड, पश्चिमी एवं पूर्वी जर्मनी, फ़्रांस, युगोस्लाविया, चेकोस्लोवाकिया, पोलैंड आदि देशों की यात्रा। निधन : 2005 All Nemichandra Jain Books

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