Murari Madhusudan Thakur
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित और अंग्रेजी साहित्य में गोल्ड मेडलिस्ट प्रो. मुरारी मधुसूदन ठाकुर का जन्म सिंहवाड़ा इस्टेट गांव में 17 अक्टूबर 1932 को हुआ था। वे अंग्रेजी साहित्य के प्रकांड विद्वान थे। पटना विवि में ख्याति प्राप्त प्राध्यापक और कनाडा के मैक्मास्टर व नेपाल के त्रिभुवन विवि में विजिटिंग प्रोफेसर रहे। दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का अंग्रेजी, हिंदी व मैथिली में रचना, अनुवाद और संपादन किया था। तुलसीदास की विनय पत्रिका और 'हनुमान बाहुक', फणीश्वर नाथ रेणु की 'परती परिकथा' का अंग्रेजी अनुवाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की चयनित कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद (साहित्य अकादमी प्रकाशित), नयनतारा सहगल के उपन्यास 'रिच लाइक अस' का मैथिली अनुवाद 'हमरे सभ सन मातबर' और ताराशंकर वंद्योपाध्याय के 'आरोग्य निकेतन' का मैथिली रूपांतरण विशेष उल्लेखनीय हैं। उनकी अपनी रचनाओं में भीष्म पितामह के जीवनचरित पर आधारित पुस्तक 'दस स्पेक भीष्म' (मोतीलाल बनारसीदास) महत्वपूर्ण है। वे अस्वस्थता के बावजूद अंतिम समय तक सरस्वती की साधना करते रहे।
Murari Madhusudan Thakur
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About Murari Madhusudan Thakur
तुलसीदास की विनय पत्रिका और 'हनुमान बाहुक', फणीश्वर नाथ रेणु की 'परती परिकथा' का अंग्रेजी अनुवाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की चयनित कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद (साहित्य अकादमी प्रकाशित), नयनतारा सहगल के उपन्यास 'रिच लाइक अस' का मैथिली अनुवाद 'हमरे सभ सन मातबर' और ताराशंकर वंद्योपाध्याय के 'आरोग्य निकेतन' का मैथिली रूपांतरण विशेष उल्लेखनीय हैं। उनकी अपनी रचनाओं में भीष्म पितामह के जीवनचरित पर आधारित पुस्तक 'दस स्पेक भीष्म' (मोतीलाल बनारसीदास) महत्वपूर्ण है। वे अस्वस्थता के बावजूद अंतिम समय तक सरस्वती की साधना करते रहे।