Mori Ogai

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मोरी ओगाई के बग़ैर आधुनिक जापानी साहित्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उन्होंने जापानी साहित्य को नई मान्यताओं, विचारधारा और शैली से लैस किया। वह अपने अनुवर्ती रचनाकारों के लिए बड़े प्रेरणास्रोत बने कि विश्वप्रसिद्ध कृति ‘राशोमोन’ के रचयिता र् यूनोसुके आकुतागावा जैसे नवोदित लेखकों ने उन्हें अपना गुरु माना। ओगाई 1884 में चिकित्साशास्त्र का अध्ययन करने जर्मनी गए। चार साल बाद वह जापान लौटे तो उनके पास चिकित्सा का उच्च ज्ञान ही नहीं, यूरोपीय साहित्य और संस्कृति का विशद अध्ययन भी था। यही कारण है कि उनके साहित्य में पाश्चात्य चिन्तन और दर्शन की गहरी छाप देखने को मिलती है। ओगाई को जापानी साहित्य में रोमानीवाद का सूत्रधार माना जाता है। इस सन्दर्भ में उनकी कृतियाँ ‘माहिहिमे’, ‘सेइनेने’ और ‘गान’ महत्त्वपूर्ण हैं।

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