Kunwar Bechain
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जन्म : 1 जुलाई, 1942; ग्राम—उमरी, ज़िला—मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश। शिक्षा : एम.कॉम., एम.ए., पीएच.डी.। एमएमएच, कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद के हिन्दी विभाग में विभागाध्यक्ष रहे। कुँवर बेचैन ने ग़ज़लों को आम आदमी के दैनिक जीवन से जोड़ा। यही कारण है कि वे नीरज के बाद मंच पर सराहे जानेवाले कवियों में अग्रगण्य रहे। उन्होंने गीतों में भी इसी परम्परा को क़ायम रखा। सात गीत-संग्रह, बारह ग़ज़ल-संग्रह, दो कविता-संग्रह, एक महाकाव्य तथा एक उपन्यास के रचयिता कुँवर बेचैन ने ग़ज़ल की संरचना को समझने के लिए ‘ग़ज़ल का व्याकरण’ पुस्तक भी लिखी। उन्होंने कई विदेश यात्राएँ कीं और अनेक महत्त्वपूर्ण संस्थानों के साहित्य सम्मानों द्वारा सम्मानित हुए। निधन : 29 अप्रैल, 2021
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About Kunwar Bechain
जन्म : 1 जुलाई, 1942; ग्राम—उमरी, ज़िला—मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश।
शिक्षा : एम.कॉम., एम.ए., पीएच.डी.।
एमएमएच, कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद के हिन्दी विभाग में विभागाध्यक्ष रहे।
कुँवर बेचैन ने ग़ज़लों को आम आदमी के दैनिक जीवन से जोड़ा। यही कारण है कि वे नीरज के बाद मंच पर सराहे जानेवाले कवियों में अग्रगण्य रहे। उन्होंने गीतों में भी इसी परम्परा को क़ायम रखा। सात गीत-संग्रह, बारह ग़ज़ल-संग्रह, दो कविता-संग्रह, एक महाकाव्य तथा एक उपन्यास के रचयिता कुँवर बेचैन ने ग़ज़ल की संरचना को समझने के लिए ‘ग़ज़ल का व्याकरण’ पुस्तक भी लिखी।
उन्होंने कई विदेश यात्राएँ कीं और अनेक महत्त्वपूर्ण संस्थानों के साहित्य सम्मानों द्वारा सम्मानित हुए।
निधन : 29 अप्रैल, 2021
शिक्षा : एम.कॉम., एम.ए., पीएच.डी.।
एमएमएच, कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद के हिन्दी विभाग में विभागाध्यक्ष रहे।
कुँवर बेचैन ने ग़ज़लों को आम आदमी के दैनिक जीवन से जोड़ा। यही कारण है कि वे नीरज के बाद मंच पर सराहे जानेवाले कवियों में अग्रगण्य रहे। उन्होंने गीतों में भी इसी परम्परा को क़ायम रखा। सात गीत-संग्रह, बारह ग़ज़ल-संग्रह, दो कविता-संग्रह, एक महाकाव्य तथा एक उपन्यास के रचयिता कुँवर बेचैन ने ग़ज़ल की संरचना को समझने के लिए ‘ग़ज़ल का व्याकरण’ पुस्तक भी लिखी।
उन्होंने कई विदेश यात्राएँ कीं और अनेक महत्त्वपूर्ण संस्थानों के साहित्य सम्मानों द्वारा सम्मानित हुए।
निधन : 29 अप्रैल, 2021