About Kumar Vivek
कुमार विवेक कथा लेखन की दुनिया में अपनी मौजूदगी का एहसास कराने लगे हैं। इनका नाम उन लेखकों में शुमार किया जाता हैं जो फेसबुक जैसी सोशल साइट्स पर सक्रिय दिखते हैं। वैसे तो ये हर समसामयिक मुद्दे पर लिखते रहते हैं पर क्रिकेट से संबंधित इनकी समीक्षाएं खेल प्रेमियों के बीच अति पसंद की जाती हैं। साथ ही, इनके द्वारा लिखे जाने वाले वन लाइनर अति चुटीले होते हैं।
“प्यारान जिंदगी का” उपन्यास लेखन के क्षेत्र में इनका पहला सृजन था जिसे पाठकों ने खूब प्यार और दुलार दिया।
कुमार विवेक मूलतः श्रीराम जन्मभूमि स्थल अयोध्या से सटे जनपद अम्बेडकरनगर के गाँव करतोरा के रहने वाले हैं।
बकौल विवेक “पढ़ना और पढ़ाना मेरे जीवन का शौक है। अखबार के संपादकीय और साहित्य पढ़ने की लत लिखने की तरफ खींच लाई।” इसी नाते राजस्व विभाग की जॉब को छोड़कर वर्तमान में ये शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
अध्यापन के बाद बचे खाली समय का उपयोग ये लिखने और पढ़ने में करते हैं। इनके कई लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। सिटीजन जर्नलिज़्म प्लेटफार्म यूथ की आवाज और WSSCC के साथ मिलकर माहवारी के संबंध में प्रचलित गलत धारणाओं के विरोध और सैनेटरी पैड के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ये काम कर चुके हैं।
किताब के तौर पर करंटऽहवा इनका दूसरा उपन्यास है।