Kamta Prasad Guru
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जन्म : सागर में सन् 1875 ई. में हुआ। शिक्षा : 17 वर्ष की अवस्था में इंट्रेंस की परीक्षा पास की। 1920 में प्राय: एक वर्ष तक प्रयाग के इंडियन प्रेस में ‘बालसखा’ और ‘सरस्वती’ का सम्पादन किया। विविध भाषाओं का इन्हें अच्छा ज्ञान था। हिन्दी व्याकरण के ये अधिकारी विद्वान् माने जाते हैं। वैसे रचनात्मक प्रतिभा बहुमुखी थी। प्रमुख कृतियाँ : ‘सत्य’, ‘प्रेम’, ‘पार्वती’, ‘यशोदा’ (उपन्यास); ‘भौमासुर वध’ तथा ‘विनय पचासा’ (ब्रजभाषा काव्य) ; ‘पद्य पुष्पावली’, ‘सुदर्शन’ (पौराणिक नाटक) ‘हिन्दुस्तानी शिष्टाचार’ आदि। निधन : 15 नवम्बर, 1947 ई.।
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About Kamta Prasad Guru
जन्म : सागर में सन् 1875 ई. में हुआ।
शिक्षा : 17 वर्ष की अवस्था में इंट्रेंस की परीक्षा पास की।
1920 में प्राय: एक वर्ष तक प्रयाग के इंडियन प्रेस में ‘बालसखा’ और ‘सरस्वती’ का सम्पादन किया। विविध भाषाओं का इन्हें अच्छा ज्ञान था। हिन्दी व्याकरण के ये अधिकारी विद्वान् माने जाते हैं। वैसे रचनात्मक प्रतिभा बहुमुखी थी।
प्रमुख कृतियाँ : ‘सत्य’, ‘प्रेम’, ‘पार्वती’, ‘यशोदा’ (उपन्यास); ‘भौमासुर वध’ तथा ‘विनय पचासा’ (ब्रजभाषा काव्य) ; ‘पद्य पुष्पावली’, ‘सुदर्शन’ (पौराणिक नाटक) ‘हिन्दुस्तानी शिष्टाचार’ आदि।
निधन : 15 नवम्बर, 1947 ई.।
शिक्षा : 17 वर्ष की अवस्था में इंट्रेंस की परीक्षा पास की।
1920 में प्राय: एक वर्ष तक प्रयाग के इंडियन प्रेस में ‘बालसखा’ और ‘सरस्वती’ का सम्पादन किया। विविध भाषाओं का इन्हें अच्छा ज्ञान था। हिन्दी व्याकरण के ये अधिकारी विद्वान् माने जाते हैं। वैसे रचनात्मक प्रतिभा बहुमुखी थी।
प्रमुख कृतियाँ : ‘सत्य’, ‘प्रेम’, ‘पार्वती’, ‘यशोदा’ (उपन्यास); ‘भौमासुर वध’ तथा ‘विनय पचासा’ (ब्रजभाषा काव्य) ; ‘पद्य पुष्पावली’, ‘सुदर्शन’ (पौराणिक नाटक) ‘हिन्दुस्तानी शिष्टाचार’ आदि।
निधन : 15 नवम्बर, 1947 ई.।