About Helle Helle
अर्चना पैन्यूली मूलतः उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून से हैं। विगत तेईस वर्षों से डेनमार्क में रह रही हैं। वहाँ नॉर्थ-सेलैंड इंटरनेशनल स्कूल में अध्यापन करती हैं। वे मुख्यतः इंडियन डायस्पोरा एवं स्कॉण्डिनेवियन देशों में बसे भारतीय समुदाय पर कहानियाँ और लेख लिखती रही हैं। उनका लेखन वर्तमान जातीय और प्रवासी मुद्दों तथा प्रवास के अनुभवों को दरशाता है, साथ ही यूरोपीय, विशेषकर स्कॉण्डिनेवियन देशों के भौगोलिक और सामाजिक परिवेश पर भी उन्होंने खुलकर अपनी लेखनी चलाई है। उनके उपन्यासों और कहानियों में भारतीय पात्रों के साथ-साथ यूरोपीय पात्रों की सहज उपस्थिति है।
अब तक उनके चार उपन्यास और दो कहानी-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनका उपन्यास ‘वेयर डू आई बिलॉन्ग’ डेनिश समाज पर हिंदी में लिखा प्रथम उपन्यास है, जिसके लिए उनको अगस्त 2011 में इंडियन कल्चरल सोसाइटी, डेनमार्क द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह पर प्राइड ऑफ इंडिया सम्मान से सम्मानित किया गया तथा अगस्त 2012 में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा राष्ट्रकवि प्रवासी साहित्यकार पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।
उपन्यास पॉल की तीर्थयात्रा की गणना फेमिना सर्वे द्वारा वर्ष 2016 के सर्वश्रेष्ठ दस उपन्यासों में की गई है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा वर्ष 2018 के पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार से सम्मानित।