Gopal Ray
गोपाल राय का जन्म 13 जुलाई, 1932 को बक्सर, बिहार के गाँव चुन्नी में हुआ था। उनकी आरम्भिक शिक्षा गाँव और निकटस्थ कस्बे के स्कूल में हुई। उन्होंने हिन्दी विभाग, पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर किया। पटना विश्वविद्यालय से ही 1964 में ‘हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव’ विषय पर डी.लिट. की उपाधि प्राप्त की। 21 फरवरी, 1957 को पटना विश्वविद्यालय, पटना में हिन्दी प्राध्यापक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई जहाँ से 4 दिसम्बर, 1992 को सेवानिवृत्त हुए। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव’, ‘हिन्दी उपन्यास कोश’ (दो खंडों में), ‘उपन्यास का शिल्प’, ‘अज्ञेय और उनके उपन्यास’, ‘हिन्दी भाषा का विकास’, ‘हिन्दी कहानी का इतिहास’ (तीन खंडों में), ‘उपन्यास की पहचान श्रृंखला’ के अन्तर्गत—‘शेखर : एक जीवनी’, ‘गोदान : नया परिप्रेक्ष्य’, ‘रंगभूमि : पुनर्मूल्यांकन’, ‘मैला आँचल’, ‘दिव्या’, ‘महाभोज’, ‘हिन्दी उपन्यास का इतिहास’, ‘उपन्यास की संरचना’, ‘अज्ञेय और उनका कथा-साहित्य’। उन्होंने पं. गौरीदत्त कृत ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’, ‘राष्ट्रकवि दिनकर’ का सम्पादन किया। कई वर्षों तक समीक्षा पत्रिका का सम्पादन-प्रकाशन भी किया। 25 सितम्बर, 2015 को उनका निधन हुआ।
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About Gopal Ray
उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव’, ‘हिन्दी उपन्यास कोश’ (दो खंडों में), ‘उपन्यास का शिल्प’, ‘अज्ञेय और उनके उपन्यास’, ‘हिन्दी भाषा का विकास’, ‘हिन्दी कहानी का इतिहास’ (तीन खंडों में), ‘उपन्यास की पहचान श्रृंखला’ के अन्तर्गत—‘शेखर : एक जीवनी’, ‘गोदान : नया परिप्रेक्ष्य’, ‘रंगभूमि : पुनर्मूल्यांकन’, ‘मैला आँचल’, ‘दिव्या’, ‘महाभोज’, ‘हिन्दी उपन्यास का इतिहास’, ‘उपन्यास की संरचना’, ‘अज्ञेय और उनका कथा-साहित्य’। उन्होंने पं. गौरीदत्त कृत ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’, ‘राष्ट्रकवि दिनकर’ का सम्पादन किया। कई वर्षों तक समीक्षा पत्रिका का सम्पादन-प्रकाशन भी किया।
25 सितम्बर, 2015 को उनका निधन हुआ।