B. L. Gaur

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12 जून, 1936 को उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ के गभाना क़स्‍बे के निकट एक छोटे से गाँव कौमला में आपका जन्म हुआ। आप अपनी कुशाग्र बुद्धि के बल पर एक प्रतिभाशाली छात्र के रूप में जाने जाते रहे। आपने अपनी उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से विज्ञान के स्नातक के रूप में प्राप्त करने के पश्चात् सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। उसके बाद इटालियन भाषा में डिप्लोमा प्राप्त किया, फिर ‘हिन्दी साहित्य रत्न’ की उपाधि प्राप्त की। 30 वर्ष तक आप रेल विभाग की निर्माण शाखा में कार्यरत रहे तथा अपने सेवाकाल के दौरान विन्ध्यांचल के बीहड़ जंगलों के बीच सर्वे के साथ-साथ अनेकानेक रोमांचित कर देनेवाले निर्माण कार्यों को अंजाम दिए। देश की विख्यात और अग्रणी कम्पनी गौड़सन्स इंडिया लि. जिसने भवन निर्माण के क्षेत्र में एक कीर्तिमान स्थापित किया है, आप उसके चेयरमैन हैं। आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘थोड़ी-सी रोशनी’, ‘दूसरी काव्याकृति’, ‘आखिर कब तक’, ‘कब पानी में डूबा सूरज’, ‘एक दिन यूँ ही’, ‘जाती हुई धूप’ (कविता-संग्रह); ‘तंत्र के पंजों में लोकतंत्र’, ‘लोकतंत्र में खोया लोकतंत्र’, ‘यथार्थ से संवाद’ (मीडिया); ‘मीठी ईद’ (कहानी-संग्रह); ‘नींद से नाली तक’ (सिविल इंजीनियरिंग पर पहली बार हिन्‍दी में प्रकाशित पुस्‍तक) आदि। आप समाचार-पत्र ‘गौड़सन्स टाइम्स’ के सम्‍पादक हैं तथा गीत-काव्य को समर्पित संस्था ‘गीताभ’ के संरक्षक भी हैं। आप पूरी तरह समाज सेवा से भी जुड़े हैं। अपने स्वर्गीय बेटे डॉ. राकेश गौड़ के नाम से स्थापित ‘डॉ. राकेश गौड़ चैरिटेबल ट्रस्ट’ के आप मुख्य ट्रस्टी हैं। आप हिन्दी अकादमी दिल्ली सरकार की गवर्निंग बॉडी में सदस्य के रूप में मनोनीत किए गए और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग परिषद (भारत) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट भी चुने जा चुके हैं।

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