Vijay Joshi
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जन्म : 15 मार्च, 1948 पूर्व ग्रुप महाप्रबन्धक, बी.एच.ई.एल., विजय जोशी न केवल प्रबन्धन के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम हैं, बल्कि साहित्य के क्षेत्र में भी उनके कविता-संग्रह ‘भला लगता है’ (भूमिका : श्री गुलज़ार) के तीन संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। ‘मैनेजमेंट सीखें महात्मा से’, ‘मैनेजमेंट मंत्र’, ‘प्रबन्धन में 5 का मंत्र’, ‘प्रबन्धन की पाठशाला’, ‘प्रबन्धन के सुर : गांधी के गुर’, ‘सफल प्रबन्धन : गांधी दर्शन’, ‘प्रबन्धन के पाँच सूत्र’ आदि प्रबन्धन से जुड़ी उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ हैं। सम्मान : फ़ेलोशिप, इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स (इंडिया) एवं इंस्टीट्यूशन ऑफ़ प्लांट इंजीनियर्स। सम्प्रति : कौंसिल मेम्बर, इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स (इंडिया)
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About Vijay Joshi
जन्म : 15 मार्च, 1948
पूर्व ग्रुप महाप्रबन्धक, बी.एच.ई.एल., विजय जोशी न केवल प्रबन्धन के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम हैं, बल्कि साहित्य के क्षेत्र में भी उनके कविता-संग्रह ‘भला लगता है’ (भूमिका : श्री गुलज़ार) के तीन संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। ‘मैनेजमेंट सीखें महात्मा से’, ‘मैनेजमेंट मंत्र’, ‘प्रबन्धन में 5 का मंत्र’, ‘प्रबन्धन की पाठशाला’, ‘प्रबन्धन के सुर : गांधी के गुर’, ‘सफल प्रबन्धन : गांधी दर्शन’, ‘प्रबन्धन के पाँच सूत्र’ आदि प्रबन्धन से जुड़ी उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ हैं।
सम्मान : फ़ेलोशिप, इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स (इंडिया) एवं इंस्टीट्यूशन ऑफ़ प्लांट इंजीनियर्स।
सम्प्रति : कौंसिल मेम्बर, इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स (इंडिया)
पूर्व ग्रुप महाप्रबन्धक, बी.एच.ई.एल., विजय जोशी न केवल प्रबन्धन के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम हैं, बल्कि साहित्य के क्षेत्र में भी उनके कविता-संग्रह ‘भला लगता है’ (भूमिका : श्री गुलज़ार) के तीन संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। ‘मैनेजमेंट सीखें महात्मा से’, ‘मैनेजमेंट मंत्र’, ‘प्रबन्धन में 5 का मंत्र’, ‘प्रबन्धन की पाठशाला’, ‘प्रबन्धन के सुर : गांधी के गुर’, ‘सफल प्रबन्धन : गांधी दर्शन’, ‘प्रबन्धन के पाँच सूत्र’ आदि प्रबन्धन से जुड़ी उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ हैं।
सम्मान : फ़ेलोशिप, इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स (इंडिया) एवं इंस्टीट्यूशन ऑफ़ प्लांट इंजीनियर्स।
सम्प्रति : कौंसिल मेम्बर, इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स (इंडिया)