Suman Keshari
सुमन केशरी का जन्म मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार में हुआ। वे मूलतः कवि हैं किन्तु उन्होंने लेख, कहानी, नाटक, यात्रा-वृत्तान्त जैसी विधाओं में भी पर्याप्त काम किया है। कविताओं की व्याख्याओं के साथ-साथ आर्मेनियाई जनसंहार पर एक पुस्तक तैयार की है। उन्हें प्रशासन, अध्यापन और सामाजिक क्षेत्र में काम करने के गहरे अनुभव हैं। मिथकीय चरित्रों की मूल संवेदना को बनाए-बचाए रखते हुए, मिथकों को आज के लिए प्रासंगिक बनाने की कला में वे निष्णात हैं। उन्होंने रामायण और महाभारत के अनेक चरित्रों और प्रसंगों पर कविताएँ व लेख लिखे हैं। सुमन जी की प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘याज्ञवल्क्य से बहस’ (2008), ‘मोनालिसा की आँखें’ (2013), ‘शब्द और सपने’ (2015), ‘पिरामिडों की तहों में’ (2018), ‘निमित्त नहीं!!’ (2022) (कविता-संग्रह); ‘गांधारी’ (नाटक); ‘कोराना काल में शादी’ (लघु नाटक)। ‘जेएनयू में नामवर सिंह’ (2009), ‘आर्मेनियाई जनसंहार : ऑटोमन साम्राज्य का कलंक’ (2021, सुश्री माने मकर्तच्यान के साथ सम्पादन)। ‘मोनालिसा की आँखें’ संकलन का मराठी और राजस्थानी में अनुवाद प्रकाशित है। जीवन और लेखन दोनों में प्रयोगधर्मी सुमन केशरी इन दिनों ‘कथानटी सुमन केशरी’ के नाम से सोशल मीडिया पर कहानियाँ भी सुनाती हैं।
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About Suman Keshari
सुमन जी की प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘याज्ञवल्क्य से बहस’ (2008), ‘मोनालिसा की आँखें’ (2013), ‘शब्द और सपने’ (2015), ‘पिरामिडों की तहों में’ (2018), ‘निमित्त नहीं!!’ (2022) (कविता-संग्रह); ‘गांधारी’ (नाटक); ‘कोराना काल में शादी’ (लघु नाटक)। ‘जेएनयू में नामवर सिंह’ (2009), ‘आर्मेनियाई जनसंहार : ऑटोमन साम्राज्य का कलंक’ (2021, सुश्री माने मकर्तच्यान के साथ सम्पादन)।
‘मोनालिसा की आँखें’ संकलन का मराठी और राजस्थानी में अनुवाद प्रकाशित है।
जीवन और लेखन दोनों में प्रयोगधर्मी सुमन केशरी इन दिनों ‘कथानटी सुमन केशरी’ के नाम से सोशल मीडिया पर कहानियाँ भी सुनाती हैं।