Rajgopal Singh Verma

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राजगोपाल सिंह वर्मा का जन्म 14 मई, 1957 को मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने पत्रकारिता तथा इतिहास में स्नातकोत्तर किया है। अब तक कुल 32 पुस्तकें प्रकाशित जिनमें 26 मूल तथा उर्दू, पंजाबी और अंग्रेज़ी में अनूदित चार पुस्तकें भी शामिल हैं। उन्होंने मुख्यतः ऐतिहासिक विषयों और जीवनीपरक किताबों का लेखन किया है। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘बेगम समरू का सच : सरधना की चर्चित बेगम की कथा’, ‘पहली औरत : बेगम राना लियाकत अली की जीवनी’, ‘1857 का शंखनाद : उत्तर दोआब के लोक का संघर्ष’, ‘चिनहट : 1857 संघर्ष की गौरव-गाथा’, ‘किंगमेकर्स : मुग़ल बादशाहों पर भारी दो सैयद भाइयों की गाथा’, ‘औपनिवेशिक काल की जुनूनी महिलाएँ’, ‘जाने वो कैसे लोग थे : 1857 के क्रान्तिकारी’, ‘आख़िरी मुग़ल बादशाह का कोर्ट मार्शल’, ‘स्वर्णा : टैगोर की अल्पचर्चित विदुषी बहन की जीवनी’, ‘फ़िरंगी राजा’ (ऐतिहासिक उपन्यास), ‘दुर्गावती : गढ़ा की पराक्रमी रानी’, ‘जॉर्ज थॉमस : हांसी का फ़िरंगी राजा’, ‘सुभाष-एमिली : अधूरे प्रेम की पूरी कहानी’। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की साहित्यिक पत्रिका ‘उत्तर प्रदेश’ का पाँच वर्ष तक सम्पादन किया तथा केन्द्र सरकार के अधीन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और लघु उद्योग मंत्रालय की पत्रिकाओं के सम्पादकीय दायित्व का भी निर्वहन किया। उन्हें ‘पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान’, ‘पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ सम्मान’, कमलेश्वर स्मृति कथा सम्मान, ‘प्रेमचन्द सम्मान’ तथा ‘हरिवंशराय ‘बच्चन’ सम्मान से सम्मानित किया गया है। ई-मेल : rgsverma.home@gmail.com

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