Murshidabad Ki Mallika
(0)
Author:
Rajgopal Singh VermaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Historical-fiction₹
299
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राजगोपाल सिंह वर्मा इतिहास मर्मज्ञ तो हैं ही, वे इतिहास के अनूठे, लीक से हटकर चले महिला पात्रों को अपने कथा-साहित्य का विषय बनाते रहे हैं। वे महीन से महीन तथ्यों की कीलों पर कथा की बारीक मनोवैज्ञानिक जरदोजी करते हैं। कथा है तो मन और उसके खेल भी होंगे। यह मन और मस्तिष्क अकसर ऐतिहासिक उपन्यासों में अनुपस्थित मिलता है, लेकिन राजगोपाल सिंह वर्मा तथ्यों के घटनाक्रमों के चक्र में भी मुन्नी बेगम के अन्तर्द्वन्द्व और बौद्धिक-राजनैतिक दाँव-पेंच, व्यवहारकुशलता के चलते ईस्ट इंडिया कम्पनी के अफसरों से सौहार्द के दृश्य इस उपन्यास को जीवन्त बनाते हैं। मुन्नी बेगम, मीर जाफर की पत्नी रही है, गद्दारी के इतिहास की सियाही मुन्नी के हिस्से भी आ सकती थी, मगर वह व्यवहारकुशल रही। लेखक स्वीकार करते हैं कि मुन्नी बेगम राष्ट्रभक्त किसी तरह भी नहीं थी। सो, नायिका होने के वे उदात्त तत्व उसमें न हों, मगर एक अनाथ, बंजारा नर्तकी के पहले बेमन से मीर जाफर की पत्नी बनने, फिर अपने वजूद को पहचानने, जाफर की मृत्यु के बाद अपने अस्तित्व को बनाए रखने की कूटनीतिक व्यवहारकुशलता उसे नायिका बनने की सलाहियत जरूर देती है। एक ऐसी स्त्री जिसे लेकर ब्रिटिश संसद में भारत के सर्वशक्तिशाली, सम्पन्न और कार्यकुशल गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स जैसे व्यक्ति पर महाभियोग चला हो, मुन्नी बेगम के नाम की गूँज उठी हो; उसमें कुछ खास तो होगा ही। —मनीषा कुलश्रेष्ठ
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राजगोपाल सिंह वर्मा इतिहास मर्मज्ञ तो हैं ही, वे इतिहास के अनूठे, लीक से हटकर चले महिला पात्रों को अपने कथा-साहित्य का विषय बनाते रहे हैं। वे महीन से महीन तथ्यों की कीलों पर कथा की बारीक मनोवैज्ञानिक जरदोजी करते हैं। कथा है तो मन और उसके खेल भी होंगे। यह मन और मस्तिष्क अकसर ऐतिहासिक उपन्यासों में अनुपस्थित मिलता है, लेकिन राजगोपाल सिंह वर्मा तथ्यों के घटनाक्रमों के चक्र में भी मुन्नी बेगम के अन्तर्द्वन्द्व और बौद्धिक-राजनैतिक दाँव-पेंच, व्यवहारकुशलता के चलते ईस्ट इंडिया कम्पनी के अफसरों से सौहार्द के दृश्य इस उपन्यास को जीवन्त बनाते हैं।
मुन्नी बेगम, मीर जाफर की पत्नी रही है, गद्दारी के इतिहास की सियाही मुन्नी के हिस्से भी आ सकती थी, मगर वह व्यवहारकुशल रही। लेखक स्वीकार करते हैं कि मुन्नी बेगम राष्ट्रभक्त किसी तरह भी नहीं थी। सो, नायिका होने के वे उदात्त तत्व उसमें न हों, मगर एक अनाथ, बंजारा नर्तकी के पहले बेमन से मीर जाफर की पत्नी बनने, फिर अपने वजूद को पहचानने, जाफर की मृत्यु के बाद अपने अस्तित्व को बनाए रखने की कूटनीतिक व्यवहारकुशलता उसे नायिका बनने की सलाहियत जरूर देती है।
एक ऐसी स्त्री जिसे लेकर ब्रिटिश संसद में भारत के सर्वशक्तिशाली, सम्पन्न और कार्यकुशल गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स जैसे व्यक्ति पर महाभियोग चला हो, मुन्नी बेगम के नाम की गूँज उठी हो; उसमें कुछ खास तो होगा ही।
—मनीषा कुलश्रेष्ठ
Book Details
-
ISBN9789347043666
-
Pages208
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Shri Naresh Mehta
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- Description: कालजयी उपन्यास यह ‘पथ बन्धु था’ के बाद भारतीय जीवन का सर्वांगीण परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करनेवाला यह उपन्यास ‘उत्तरकथा’ आधुनिक कथा-साहित्य की न केवल निष्णात ही, बल्कि सम्पूर्ण सांस्कृतिक औपन्यासिक कृति है। स्वरूप का नहीं, प्रयोजन का नाम है महाकाव्य। आज उपन्यास ही महाकाव्य है, एतदर्थ ‘उत्तरकथा' महाकाव्य भी है। देश और काल के विशाल फलक पर चलते साधारण मनुष्य की बड़ी-छोटी परछाइयाँ ही यह संसार है। जब इसी मानवीय संसार की यथार्थता को प्रयोजन-दृष्टि प्राप्त हो जाती है तब मनुष्य सृष्टि मात्र, प्राणि मात्र का प्रतिनिधित्व करनेवाला 'पुरुष' हो जाता है। बड़ी रचनात्मकता कभी भी केवल यथार्थ को ही अन्तिम नहीं मान सकती, क्योंकि मनुष्य की रचना उदात्तता के लिए ही हुई है। इस प्रथम खंड के सारे साधारण एवं अनाम पात्र कोई बड़ा कार्य नहीं करते परन्तु रोज का तपता हुआ जीवन जीते हैं। यह साधारण उदात्तता प्रकारान्तर से हमें भी पूर्ण बनाती है। दूसरे खंड में जब परिवेश का दबाव और अधिक गहराएगा तब मानवीय विवशता तथा व्यवहार के जल का परिवृत्त और भी सुदूर के तटों तक लहराएगा। यह शती मनुष्य की परीक्षा की शती रही है जिसमें अनाम लोगों की साधारणता, विश्वास खंडित एवं क्षत-विक्षत हुए हैं। इस मानवीय जय-पराजय की गाथा से बड़ी कौन-सी भागवत है?
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