Murshidabad Ki Mallika

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राजगोपाल सिंह वर्मा इतिहास मर्मज्ञ तो हैं ही, वे इतिहास के अनूठे, लीक से हटकर चले महिला पात्रों को अपने कथा-साहित्य का विषय बनाते रहे हैं। वे महीन से महीन तथ्यों की कीलों पर कथा की बारीक मनोवैज्ञानिक जरदोजी करते हैं। कथा है तो मन और उसके खेल भी होंगे। यह मन और मस्तिष्क अकसर ऐतिहासिक उपन्यासों में अनुपस्थित मिलता है, लेकिन राजगोपाल सिंह वर्मा तथ्यों के घटनाक्रमों के चक्र में भी मुन्नी बेगम के अन्तर्द्वन्द्व और बौद्धिक-राजनैतिक दाँव-पेंच, व्यवहारकुशलता के चलते ईस्ट इंडिया कम्पनी के अफसरों से सौहार्द के दृश्य इस उपन्यास को जीवन्त बनाते हैं। मुन्नी बेगम, मीर जाफर की पत्नी रही है, गद्दारी के इतिहास की सियाही मुन्नी के हिस्से भी आ सकती थी, मगर वह व्यवहारकुशल रही। लेखक स्वीकार करते हैं कि मुन्नी बेगम राष्ट्रभक्त किसी तरह भी नहीं थी। सो, नायिका होने के वे उदात्त तत्व उसमें न हों, मगर एक अनाथ, बंजारा नर्तकी के पहले बेमन से मीर जाफर की पत्नी बनने, फिर अपने वजूद को पहचानने, जाफर की मृत्यु के बाद अपने अस्तित्व को बनाए रखने की कूटनीतिक व्यवहारकुशलता उसे नायिका बनने की सलाहियत जरूर देती है। एक ऐसी स्त्री जिसे लेकर ब्रिटिश संसद में भारत के सर्वशक्तिशाली, सम्पन्न और कार्यकुशल गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स जैसे व्यक्ति पर महाभियोग चला हो, मुन्नी बेगम के नाम की गूँज उठी हो; उसमें कुछ खास तो होगा ही। —मनीषा कुलश्रेष्ठ

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ISBN
9789347043666
Pages
208
Avg Reading Time
7 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

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About the Book

राजगोपाल सिंह वर्मा इतिहास मर्मज्ञ तो हैं ही, वे इतिहास के अनूठे, लीक से हटकर चले महिला पात्रों को अपने कथा-साहित्य का विषय बनाते रहे हैं। वे महीन से महीन तथ्यों की कीलों पर कथा की बारीक मनोवैज्ञानिक जरदोजी करते हैं। कथा है तो मन और उसके खेल भी होंगे। यह मन और मस्तिष्क अकसर ऐतिहासिक उपन्यासों में अनुपस्थित मिलता है, लेकिन राजगोपाल सिंह वर्मा तथ्यों के घटनाक्रमों के चक्र में भी मुन्नी बेगम के अन्तर्द्वन्द्व और बौद्धिक-राजनैतिक दाँव-पेंच, व्यवहारकुशलता के चलते ईस्ट इंडिया कम्पनी के अफसरों से सौहार्द के दृश्य इस उपन्यास को जीवन्त बनाते हैं।

मुन्नी बेगम, मीर जाफर की पत्नी रही है, गद्दारी के इतिहास की सियाही मुन्नी के हिस्से भी आ सकती थी, मगर वह व्यवहारकुशल रही। लेखक स्वीकार करते हैं कि मुन्नी बेगम राष्ट्रभक्त किसी तरह भी नहीं थी। सो, नायिका होने के वे उदात्त तत्व उसमें न हों, मगर एक अनाथ, बंजारा नर्तकी के पहले बेमन से मीर जाफर की पत्नी बनने, फिर अपने वजूद को पहचानने, जाफर की मृत्यु के बाद अपने अस्तित्व को बनाए रखने की कूटनीतिक व्यवहारकुशलता उसे नायिका बनने की सलाहियत जरूर देती है।

एक ऐसी स्त्री जिसे लेकर ब्रिटिश संसद में भारत के सर्वशक्तिशाली, सम्पन्न और कार्यकुशल गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स जैसे व्यक्ति पर महाभियोग चला हो, मुन्नी बेगम के नाम की गूँज उठी हो; उसमें कुछ खास तो होगा ही।

—मनीषा कुलश्रेष्ठ

Book Details

  • ISBN
    9789347043666
  • Pages
    208
  • Avg Reading Time
    7 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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