Rajendra Singh
राजेन्द्र सिंह समृद्ध किसान के घर 6 अगस्त, 1959 में जन्मे राजेन्द्र सिंह 12 वर्ष की आयु में ही सामाजिक कार्यों में जुट गए थे। अपने विद्यार्थी जीवन में ही सम्पूर्ण क्रान्ति आन्दोलन से जुड़ने के बाद इन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर 1980 से भारत सरकार के नेहरू युवक केन्द्र, जयपुर में 4 वर्ष तक कार्य किया। 1985 में राजस्थान के सूखे और उजड़े क्षेत्र थानागाजी के गोपालपुरा में जल संरक्षण कार्य शुरू करके मिट्टी का कटाव रोकने और धरती का पेट पानी से भरने में जुट गए। इन्होंने इस तरह की जल संरचनाओं का निर्माण किया जिनमें जल का वाष्पीकरण न हो और धरती का पेट पानी से भरकर जलस्तर ऊपर आए। यह सारा काम मेवात क्षेत्र में किया गया है। इस क्षेत्र की 7 नदियों—अरवरी, रूपारेल, साबी, जहाजवाली, महेश्वरा, भगाणी एवं सरसा को पुनर्जीवित करने में अपना जीवन लगाया है। गाँव स्तर पर जल-सभा, ग्राम-सभा संगठित की, पूरे नदी क्षेत्र में नदी संगठन बनाए। इन संगठनों ने एक तरफ़ वर्षा जल का संरक्षण किया और दूसरी तरफ़ इस जल का अनुशासित उपयोग करना सिखाया। ये वर्षा जल को संरक्षित करने और नदी को पुनर्जीवित करनेवाले समाज के साथ सदैव जुड़े रहे हैं। दिल्ली में यमुना नदी की भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए सत्याग्रह किया। आजकल गंगा नदी की अविरलता और निर्मलता हेतु संघर्षरत हैं। भारत सरकार के नदी जोड़ योजना के पर्यावरण विशेषज्ञ समिति एवं योजना आयोग के अन्तर मंत्रालय गंगा समूह और राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के सदस्य हैं। सम्मान : 2001 में जल संरक्षण के लिए सामुदायिक नेतृत्व के क्षेत्र में एशिया का प्रतिष्ठित ‘रेमन मैग्सेसे पुरस्कार’। 2005 में ‘जमनालाल बजाज पुरस्कार’। सम्प्रति : अध्यक्ष, ‘तरुण भारत संघ’। ई-मेल : jalpurushtbs@gmail.com
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About Rajendra Singh
समृद्ध किसान के घर 6 अगस्त, 1959 में जन्मे राजेन्द्र सिंह 12 वर्ष की आयु में ही सामाजिक कार्यों में जुट गए थे। अपने विद्यार्थी जीवन में ही सम्पूर्ण क्रान्ति आन्दोलन से जुड़ने के बाद इन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर 1980 से भारत सरकार के नेहरू युवक केन्द्र, जयपुर में 4 वर्ष तक कार्य किया।
1985 में राजस्थान के सूखे और उजड़े क्षेत्र थानागाजी के गोपालपुरा में जल संरक्षण कार्य शुरू करके मिट्टी का कटाव रोकने और धरती का पेट पानी से भरने में जुट गए। इन्होंने इस तरह की जल संरचनाओं का निर्माण किया जिनमें जल का वाष्पीकरण न हो और धरती का पेट पानी से भरकर जलस्तर ऊपर आए। यह सारा काम मेवात क्षेत्र में किया गया है। इस क्षेत्र की 7 नदियों—अरवरी, रूपारेल, साबी, जहाजवाली, महेश्वरा, भगाणी एवं सरसा को पुनर्जीवित करने में अपना जीवन लगाया है।
गाँव स्तर पर जल-सभा, ग्राम-सभा संगठित की, पूरे नदी क्षेत्र में नदी संगठन बनाए। इन संगठनों ने एक तरफ़ वर्षा जल का संरक्षण किया और दूसरी तरफ़ इस जल का अनुशासित उपयोग करना सिखाया।
ये वर्षा जल को संरक्षित करने और नदी को पुनर्जीवित करनेवाले समाज के साथ सदैव जुड़े रहे हैं। दिल्ली में यमुना नदी की भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए सत्याग्रह किया। आजकल गंगा नदी की अविरलता और निर्मलता हेतु संघर्षरत हैं। भारत सरकार के नदी जोड़ योजना के पर्यावरण विशेषज्ञ समिति एवं योजना आयोग के अन्तर मंत्रालय गंगा समूह और राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के सदस्य हैं।
सम्मान : 2001 में जल संरक्षण के लिए सामुदायिक नेतृत्व के क्षेत्र में एशिया का प्रतिष्ठित ‘रेमन मैग्सेसे पुरस्कार’। 2005 में ‘जमनालाल बजाज पुरस्कार’।
सम्प्रति : अध्यक्ष, ‘तरुण भारत संघ’।
ई-मेल : jalpurushtbs@gmail.com