Mewat Ka Johad
(0)
Author:
Rajendra SinghPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
595
476 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
मेवात कैसे बना? मेवात का जनमानस आज क्या चाहता है? क्या कर रहा है? मेवात के संकट से जूझते लोग, बाज़ार की लूट, पानी और खेती की लूट रोकने की दिशा में हुए काम–––क़ुदरत की हिफ़ाज़त के काम हैं। इन क़ुदरती कामों में आज भी महात्मा गांधी की प्रेरणा की सार्थकता है। युगपुरुष बापू के चले जाने के बाद भी युवाओं द्वारा उनसे प्रेरित होकर ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलम्बन के रचनात्मक कार्यों से लेकर सत्याग्रह तक की चरणबद्ध दास्तान इस पुस्तक में है। यह पुस्तक देश–दुनिया और मेवात को बापू के जौहर से प्रेरित करके सबकी भलाई का काम जोहड़ बनाने–बचाने पर राज–समाज को लगाने की कथा है; जौहर से जोहड़ तक की यात्रा है। यह पुस्तक आज के मेवात का दर्शन कराती है। इसमें जोहड़ से जुड़ते लोग, पानी की लूट रोकने का सत्याग्रह, मेवात के 40 शराब कारख़ाने बन्द कराना तथा मेवात के पानीदार बने गाँवों का वर्णन है। मेवात के पानी, परम्परा और खेती का वर्णन बापू के जौहर से जोहड़ तक किया गया है। बापू क़ुदरत के करिश्मे को जानते और समझते थे। इसलिए उन्होंने कहा था, “क़ुदरत सभी की ज़रूरत पूरी कर सकती है लेकिन एक व्यक्ति के लालच को पूरा नहीं कर सकती है।” वे क़ुदरत का बहुत सम्मान करते थे। उन्हें माननेवाले भी क़ुदरत का सम्मान करते हैं। मेवात में उनकी कुछ तरंगें काम कर रही थीं। इसलिए मेवात में समाज–श्रम से जोहड़ बन गए। मेवात में बापू का जौहर जारी है। यह पुस्तक बापू के जौहर को मेवात में जगाने का काम करती है।
Read moreAbout the Book
मेवात कैसे बना? मेवात का जनमानस आज क्या चाहता है? क्या कर रहा है? मेवात के संकट से जूझते लोग, बाज़ार की लूट, पानी और खेती की लूट रोकने की दिशा में हुए काम–––क़ुदरत की हिफ़ाज़त के काम हैं। इन क़ुदरती कामों में आज भी महात्मा गांधी की प्रेरणा की सार्थकता है। युगपुरुष बापू के चले जाने के बाद भी युवाओं द्वारा उनसे प्रेरित होकर ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलम्बन के रचनात्मक कार्यों से लेकर सत्याग्रह तक की चरणबद्ध दास्तान इस पुस्तक में है।
यह पुस्तक देश–दुनिया और मेवात को बापू के जौहर से प्रेरित करके सबकी भलाई का काम जोहड़ बनाने–बचाने पर राज–समाज को लगाने की कथा है; जौहर से जोहड़ तक की यात्रा है। यह पुस्तक आज के मेवात का दर्शन कराती है। इसमें जोहड़ से जुड़ते लोग, पानी की लूट रोकने का सत्याग्रह, मेवात के 40 शराब कारख़ाने बन्द कराना तथा मेवात के पानीदार बने गाँवों का वर्णन है।
मेवात के पानी, परम्परा और खेती का वर्णन बापू के जौहर से जोहड़ तक किया गया है। बापू क़ुदरत के करिश्मे को जानते और समझते थे। इसलिए उन्होंने कहा था, “क़ुदरत सभी की ज़रूरत पूरी कर सकती है लेकिन एक व्यक्ति के लालच को पूरा नहीं कर सकती है।” वे क़ुदरत का बहुत सम्मान करते थे। उन्हें माननेवाले भी क़ुदरत का सम्मान करते हैं। मेवात में उनकी कुछ तरंगें काम कर रही थीं। इसलिए मेवात में समाज–श्रम से जोहड़ बन गए। मेवात में बापू का जौहर जारी है। यह पुस्तक बापू के जौहर को मेवात में जगाने का काम करती है।
Book Details
-
ISBN9788126723348
-
Pages180
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Parva
- Author Name:
S.L. Bhyrappa
- Rating:
- Book Type:

- Description: Parva is a novel written by S. L. Bhyrappa in the Kannada language. It is a retelling of the Sanskrit epic Mahabharata, narrated through the personal reflections of the principal characters. The novel is widely acclaimed as a modern classic. Parva is among Bhyrappa's most widely debated and popular works and is considered by many to be his greatest.
Khuli Hava
- Author Name:
Shakti Trivedi
- Book Type:

- Description: कुछ दिन इसी प्रकार और बीत गए। अभिवादनों का आदान-प्रदान हो गया। और एक दिन जब सायंकाल को दीये जल चुके थे, तभी अलका लौट रही थी। ऊपर से मणिकलाल ने धीरे से कहा— ‘‘भाभी?’’ वह ठिठक गई और उसने भी धीरे से कहा, ‘जी’। ‘‘आप से एक-दो मिनट बात करना चाहता हूँ?’’ मणिकलाल ने नम्रता भरे शब्दों से कहा। ‘‘इस समय?’’ अलका ने घूँघट में से ही पूछा। ‘‘हाँ। अभी! केवल दो मिनट! आप तनिक मेरे पास इधर आ जाए!’’ ‘‘क्या बात है यहीं कह दीजिए!’’ अलका ने वहीं खड़े-खड़े कहा। ‘‘भाभी ये रास्ता है यहाँ ठीक नहीं है, आप डरिए नहीं। तनिक इधर आ जाओ।’’ कहकर वह द्वार से भीतर को बैठक में चला गया। अलका ने मन-ही-मन सोचा कदाचित् आज ही वह दिन आ गया, जिसकी उसे आशंका थी। उसने सोचा ‘नहीं!’ इसके प्रस्ताव को ठुकरा दो, इसे स्पष्ट मना कर दो। पर उन वस्त्रों और खाद्य पदार्थों के दबाव ने उसे ऐसा नहीं करने दिया और वह अपने स्थान से थोड़ी सी हटकर बैठक के द्वार के निकट खड़ी हो गई बोली—‘‘कहिए?’’ ‘‘देखिए, आप घबराएँ नहीं, अंदर ही आ जाएँ!
Dharkan
- Author Name:
Singurdur Palsson
- Book Type:

- Description: बीसवीं सदी के आठवें दशक में आइसलैंड के कवियों का एक ऐसा समर्थ और महत्त्वपूर्ण दल उभरकर सामने आया जिसने वहाँ के कविता संसार में भाषा, बिम्ब एवं शिल्प के स्तर पर बहुत कुछ बदला। सिगुरदुर पॉलसन इसी दल के कवियों में से एक थे। इस दल के कवि अपने आप को ‘पोयट्स लॉरिएट विदाउट लॉरेल’ अर्थात् ‘जयपत्र विहीन राजकवि’ कहते थे। अपने पहले काव्य-संग्रह 'पोयम्स प्ले एट सी-सा' से ही सिगुरदुर पॉलसन ने एक ऐसे सम्भावनाशील युवा कवि के रूप में ख्याति अर्जित की, जिसके पास शब्दों की असाधारण सम्पदा थी और उसके साथ ही थी उनसे खेलने की अप्रितम प्रतिभा। जीवन अपने सम्पूर्ण प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ उसके पास था जिसे वह ‘अभी’ में जीता था—अतीत और भविष्य से परे। पॉलसन की कविताओं में ताज़गी है, रचनात्मक ऊर्जा है, जीवन के प्रति अगाध अनुराग है। लेकिन इसके साथ ही है समाज में व्याप्त बुर्जुआ ठहराव के प्रति एक बेचैनी। वे उन लोगों से क़तई सहमत नहीं, जो पाप और दु:ख को, जीवन के सुखों को, जीवन के अस्तित्व का सार मानते हैं और जीवन में सुखों को नकारते हैं। सिगुरदुर पॉलसन की शिक्षा-दीक्षा पेरिस में हुई और कुछ-कुछ अन्तराल पर वे पन्द्रह वर्ष वहाँ रहे और नाटकों का अध्यापन करते रहे। पेरिस के साथ उनके युवा जीवन की विभिन्न स्मृतियाँ बहुत गहराई से जुड़ी हैं। यही वजह है कि उनकी कविताओं में पेरिस में बिताया गया समय बार-बार आकर जीवन्त हो जाता है।
Is Shahar Mein Ik Shahar Tha
- Author Name:
Jaya Jadwani
- Book Type:

- Description: विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप का ऐसा दारुण जख़्म है जो न जाने कितने दिलों के भीतर मुसलसल टीस रहा है। जया जादवानी का उपन्यास ‘इस शहर में इक शहर था’ विभाजित सिन्ध और उसके लोगों की कसक और पीड़ा का आख्यान है। यह एक जगह से उजड़ और बिखर कर दूसरी जगहों पर जड़ें जमाने की संघर्ष भरी दास्तान भी है जहाँ ऊपरी तौर पर भले ही सब कुछ सहज लगता हो पर उनकी रूह का एक हिस्सा कहीं बहुत पीछे के शहर में फंसा रह गया है। अपनी रूह के इसी गुम हिस्से की तलाश में उपन्यास का वाचक ‘नन्द’ कराची पहुँचता है जहाँ से उसे शिकारपुर जाना है, जहाँ जाने की उसे अनुमति नहीं है। जहाँ उसे अपने ही जैसे बिखरे हुए लोगों से मिलना है, जिन्हें उसकी तलाश में इस तरह से मददगार होना है जैसे वे अपनी ही मदद कर रहे हों। शिकारपुर—जहाँ उसका बचपन बीता है, जहाँ से निकलकर वह बम्बई में रहते हुए दुनिया भर में भटक रहा है। यह स्मृति में धँसी हुई एक ऐसी विलक्षण यात्रा है जहाँ एक बूढ़ा आईने के सामने अपने आपसे सिन्धी में बतिया रहा है; कोई बरसों बाद मिली एक बूढ़ी औरत के साथ रोटी खाते हुए उसकी गोद में रो रहा है, वह श्मशान जहाँ नन्द के लोग जलाए गए, वह गलियाँ जहाँ वे चले, उनमें ठहरते और चलते हुए नन्द अपने पुरखों के तलवों का दुख-दर्द जी रहा है। जहाँ से अपने बचपन के प्यार की एक झलक भर देखकर बिना कुछ कहे वह वापस चला आता है कि बार-बार आने की एक वजह यह भी बनी रहे।
Agnisakshi
- Author Name:
K.K.Nair +1
- Book Type:

- Description: Agnisakshi (meaning, With Fire As Witness) is a Malayalam novel written by Lalithambika Antharjanam. Originally serialised in Mathrubhumi Illustrated Weekly, it was published as a book by Current Books in 1976. It tells the story of a Nambudiri woman, who is drawn into the struggle for social and political emancipation but cannot easily shake off the chains of tradition that bind her. The novel was concerned with implied criticism of aspects of social structure and behaviour. Thethikutty (Devaki or Sumitarananda) is married to Unni Nambudiri of the well-known Brahmin family named Manampilly Illam. He is young, virtuous, and loving but too orthodox to be the husband of a woman with Thethikutty's views. Feeling frustrated, Thethikutty leaves him once and forever and reaches her paternal home. Unni lives the life of a piety, is branded as an eccentric and dies. Thethikutty, meanwhile, finds no peace anywhere. At last, in the Himalayas, she meets her old friend and Unni's half-sister, the sixty-year-old Mrs K.M.K. Nair (Thankam). She finds her unborn son in Mrs. Nair's son and hands over her wedding pendant to her daughter with the request to cherish it with due regard.
Rajasthani Ranivas
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘राजस्थानी रनिवास’ राहुल सांकृत्यायन की एक बहुचर्चित कृति है। भारतीय समाज से जुड़ा एक अत्यन्त प्रासंगिक प्रश्न इसके केन्द्र में है—पुरुष प्रधान सामन्ती समाज में स्त्रियों की परवशता। राहुल उन लेखकों में से थे जो लेखन को सामाजिक परिष्कार की संगति में देखते थे। इसलिए उन्होंने चुन-चुनकर उन विषयों पर लिखा जिनकी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना वे आवश्यक समझते थे। ऐसे विषयों में एक तरफ इतिहास और संस्कृति की गौरवशाली चीजें थीं तो दूसरी तरफ वे चीजें जो हमारी उन्नति की राह में बाधा। प्रस्तुत पुस्तक में राहुल ने जो विषय उठाया है वह दूसरे प्रकार का है। पुस्तक की नायिका गौरी के मुख से वे राजस्थानी रनिवासों के सात पर्दों में रहने वाली रानियों-ठकुरानियों की दुःख भरी कहानी और वहां के पुरुषों की स्वेच्छाचारिता को वे पूरी साफगोई से उजागर करते हैं। स्त्रियों पर पुरुषों के नियंत्रण को सामन्ती समाज अपने वैभव और गौरव के रूप में पेश करता रहा है, लेकिन उसकी अमानवीय वास्तविकता किसी भी सहृदय व्यक्ति को बेचैन कर देगी। ‘राजस्थानी रनिवास’ इसी बेचैनी को बढ़ाने के उद्देश्य से रची गयी कृति है जिसका सन्देश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
Boond Aur Samudra
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Book Type:

- Description: पठनीयता के बल पर हिन्दी उपन्यास को ख्याति और प्रतिष्ठा दिलानेवालों में अमृतलाल नागर का नाम अग्रणी है। कई पीढ़ियों ने उनकी क़लम से निकले हृदयग्राही कथा-रस का आस्वाद लिया है। कथा-साहित्य के कई अविस्मरणीय चरित्रों की सृष्टि का सेहरा भी नागरजी के ही सर बँधा है। डॉ रामविलास शर्मा ने लिखा, “हिन्दी के कुछ लेखक मार्क्सवाद पर पुस्तकें भी लिख चुके हैं लेकिन उनके पात्र वैसे सजीव नहीं होते, जैसे गाँधीवादी लेखक अमृतलाल नागर के ‘सेठ बाँकेमल’ या ‘बूँद और समुद्र’ की ताई। इसका कारण यह है की मार्क्सवाद या गांधीवाद ही किसी लेखक को कलाकार नहीं बना देता। कथाकार बनाने के लिए मार्मिक अनुभूति आवश्यक है जो जीवन के हर पहलू को देख सके। सामाजिक जीवन की जानकारी ही न होगी तो दृष्टिकोण बेचारा क्या करेगा?” लखनऊ के नागर, मध्यवर्गीय सामाजिक जीवन का अन्तरंग और सजीव चित्रण करनेवाला यह उपन्यास हिन्दी उपन्यास-परम्परा में एक कालजयी कृति माना जाता है।
Madar
- Author Name:
Subhash Chandra Yadav
- Book Type:

- Description: A Maithili Novel
Main Bhi Padhne Jaoongi
- Author Name:
Jyoti Parihar
- Book Type:

- Description: मैं भी पढ़ने जाऊँगी" ज्योति परिहार द्वारा लिखी गई एक बाल-साहित्यिक पुस्तक है, जिसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने 2011 में प्रकाशित किया था। यह पुस्तक बच्चों के लिए है और इसकी कुल 28 पृष्ठ हैं।
Draupadi
- Author Name:
Yarlagadda Lakshmi Prasad +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: ಮೂಲತಃ ತೆಲುಗಿನಲ್ಲಿ ಬರೆದ ದ್ರೌಪದಿ ಪುಸ್ತಕವಾಗಿ ಪ್ರಕಟವಾಗುವ ಮೊದಲು ಆಂಧ್ರ ಜ್ಯೋತಿಯಲ್ಲಿ ಧಾರಾವಾಹಿಯಾಗಿ ಪ್ರಕಟವಾಯಿತು. ವಿಶಿಷ್ಟ ಶೈಲಿಯಲ್ಲಿ ಪ್ರಸ್ತುತಪಡಿಸಲಾದ ಈ ಕಾದಂಬರಿಯು ದ್ರೌಪದಿಯನ್ನು ಒಳಗೊಂಡ ವಿವಿಧ ಘಟನೆಗಳ ವಿವರಣೆಯಲ್ಲ, ಆದರೆ ಈ ಘಟನೆಗಳನ್ನು ಒಂದು ಆಕರ್ಷಕ ಕಥೆಯಾಗಿ ಹೆಣೆಯಲಾಗಿದೆ. ಲಕ್ಷ್ಮೀಪ್ರಸಾದ್ ಬಳಸಿದ ನಿರೂಪಣಾ ಶೈಲಿ ಮತ್ತು ವಿವರಣೆಯ ರಚನಾತ್ಮಕ ವಿಧಾನವು ಓದುಗರನ್ನು ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ತೊಡಗಿಸುತ್ತದೆ.
Zindagi Ki Sabse Sard Raat
- Author Name:
Krishn Bihari
- Book Type:

- Description: Book
Parstree
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description: प्रख्यात बांग्ला कथाकार विमल मित्र का यह उपन्यास एक ऐसे आदर्शवादी युवक की कहानी है, जो अपने जीवन में कुछ महान कार्य कर दिखाने की आकांक्षा रखता है, लेकिन कई अप्रत्याशित घटनाएँ उसे कुछ और ही बना देती हैं, जिसकी ख़ुद उसने या किसी ने भी कल्पना नहीं की थी। घटनाचक्र में पड़कर वह कई मोड़ों से गुज़रता है, और अन्त में जब वह इच्छित पथ पा लेता है तो उसे बोध होता है कि जीवन की वास्तविकता क्या है। इस क्रम में उसे जीवन के अनेक रूप देखने को मिलते हैं तथा बहुत कुछ बलिदान भी करना पड़ता है। विकृतियों का चरम भोग भोगते हुए उसने कीचड़ में कमल की तरह खिलते सुकृतियों के स्वरूप भी देखे। पात्र और घटनाएँ उपन्यास में इस तरह गुँथे हुए हैं कि सहसा यह कह पाना मुश्किल होगा कि इस उपन्यास की कथा-वस्तु चरित्र द्वारा अनुशासित है अथवा घटनाओं द्वारा। एक की जीवन्तता और दूसरे की सहजता ने कथा को लयात्मक गति व विस्तार दिया है। ‘परस्त्री’ की एक विशेषता यह भी है कि इसकी कथा समकालीन सामाजिक जीवन की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। यह व्यक्ति के अन्तर्मन के रहस्यों को नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन के यथार्थ को उजागर करती है। सिर से पाँव तक भ्रष्टाचार में डूबे व्यवस्था-तंत्र और उससे त्राण पाने के लिए छटपटाते सामान्यजन की वेदना का अत्यन्त सजीव चित्रण इस उपन्यास में हुआ है।
Krishnakali
- Author Name:
Shivani
- Rating:
- Book Type:

- Description: पाठक किसी पात्र से एकत्व स्थापित कर लेता है; जब उसका अपमान उसकी वेदना बन जाता है, तब ही लेखनी की सार्थकता को हम मान्यता दे पाते हैं। जब ‘कृष्णकली’ लिख रही थी तब लेखनी को विशेष परिश्रम नहीं करना पड़ा, सब कुछ स्वयं ही सहज बनता चला गया था। जहाँ क़लम हाथ में लेती, उस विस्तृत मोहक व्यक्तित्व को, स्मृति बड़े अधिकारपूर्ण लाड़-दुलार से खींच, सम्मुख लाकर खड़ा कर देती, जिसके विचित्र जीवन के रॉ-मैटीरियल से मैंने वह भव्य प्रतिमा गढ़ी थी। ओरछा की मुनीरजान के ही ठसकेदार व्यक्तित्व को सामान्य उलट-पुलटकर मैंने पन्ना की काया गढ़ी थी। जब लिख रही थी तो बार-बार उनके मांसल मधुर कंठ की गूँज कानों में गूँज उठती। वही विस्तृत मधुर गूँज, उनके नवीन व्यक्तित्व के साथ, ‘कृष्णकली’ में उतर आई। —शिवा
Lahrein
- Author Name:
Amarnath
- Book Type:

- Description: सामाजिक सरोकारों को लेकर अत्यन्त सचेत कथाकार अमरकान्त के इस उपन्यास के केन्द्र में क़स्बाई परिवेश की साधारण घरेलू महिलाएँ हैं जो धीरे-धीरे पुरुषप्रधान पारिवारिक व्यवस्था में अपनी अस्मिता और स्थिति के प्रति सजग होती हैं। उनका यह सफ़र शुरू होता है उस वक़्त जब मुहल्ले में किराये पर रहने वाला एक आत्ममुग्ध व्यक्ति बरसों से गाँव में छोड़ी अपनी पत्नी को लेकर आता है। यह सीधी-सादी ग्रामीण स्त्री बस एक सवाल से वहाँ की सुखी-सन्तुष्ट स्त्रियों को झिंझोड़ देती है—‘ख़ूब कहती हो बहिनी, कहीं सुहागिन स्त्री का नाम पूछता है कोई? नाम लेकर बुलाता है भला?’ इस सवाल का जवाब किसी से नहीं बन पाता। वे सोचने लगती हैं कि वाक़ई, अपने ही विवाहित जीवन में, अपने ही परिवार में उनका नाम कैसे ग़ायब हो गया! यहीं से शुरू होता है उनका आत्म-चिन्तन जो पहले अकेले-दुकेले और फिर नियमित बैठकों तक जाता है और एक संस्था के रूप में फलीभूत होता है। अपनी पहचान को लेकर सजग होती स्त्रियों की विचारोत्तेज कथा है यह कृति।
Sanyasi Ke Naam Patra
- Author Name:
Neela Prasad
- Book Type:

- Description: पत्र अन्त:करण की ओर खुलने वाली खिड़कियाँ होते हैं। उनसे किसी व्यक्ति के जीवन और संसार के उस हिस्से का साक्षात्कार होता है जो उसके इतर जाहिर जीवन-संसार की ओट में रह गया होता है। इस तरह वे अज्ञात-अलक्षित को उद्घाटित करने का जरिया बनते हैं जो सम्बद्ध व्यक्ति के व्यक्तित्व और कृतित्व को समग्रता में समझने में सहायक होता है। ‘संन्यासी के नाम पत्र’ ऐसी ही एक पुस्तक है जिसके केन्द्र में हैं फ़ादर कामिल बुल्के। समर्पित मिशनरी और रामकथा और तुलसीदास के मान्य विशेषज्ञ ही नहीं, अंगरेजी-हिन्दी शब्दकोश के प्रणेता के रूप में भी उनकी कीर्ति से प्राय: लोग परिचित होंगे, लेकिन एक पुत्र, एक भाई, एक शिष्य और एक मित्र के रूप में उनके व्यक्तित्व की विशिष्टता से अधिकतर लोगों का परिचय नहीं होगा। कारण, भारत भूमि पर फ़ादर का आगमन ही तब हुआ जब वे मिशनरी हो चुके थे और उसके लिए आवश्यक नियम—परिवार से विदाई—का पालन कर चुके थे। यह संग्रह फ़ादर के संन्यासी बनने के बाद उनके परिजनों द्वारा उनको लिखे गए पत्रों का है जिसमें उनका पारिवारिक इतिहास और संन्यासी जीवन, दोनों के ऐसे प्रसंग सामने आते हैं जिनसे उनके दृढ़ और उदात्त व्यक्तित्व की झलक बार-बार मिलती है। इन पत्रों से यह भी पता चलता है कि फ़ादर के संन्यास ग्रहण करने का ‘दुख’ सहकर उनके परिवार ने किस प्रकार उनका सहयोग किया। जैसा कि उनकी माँ ने उन्हें सम्बोधित पत्र में लिखा है—हम लोगों के लिए जितना दुख मसीह ने उठाया था, उसकी तुलना में यह तो एक छोटी बात थी। (9 सितम्बर, 1931)
Santya Kulee
- Author Name:
Adv. Santosh Malvikar
- Book Type:

- Description: मातृभूमीविषयीचं प्रेम, गैरवर्तन करणाऱ्यांविषयी चीड, सामाजिक न्यायासाठी अन्यायाविरुद्ध लढण्याची हिंमत, विचारांची स्पष्टता आणि ध्येयासाठी कष्ट आणि संघर्ष करण्याची तयारी असेल, तर अगदी सर्वसामान्य ग्रामीण कुटुंबातून आलेला तरुणही नवख्या शहरी जीवनात स्वत:चं वेगळं स्थान निर्माण करू शकतो. इतकंच नाही, तर हीणकस वृत्तीच्या तथाकथीत उच्चभ्रू मान्यवरांच्या नाकावर टिच्चून तो आपल्या आयुष्यात अत्यंत उंच भरारी घेऊ शकतो. याचाच प्रत्यय देणारी ही आत्मकथा आहे. ती सुरू होते विमानतळावरील हमालीच्या कामापासून. हमाल हा समाजातला सर्वात दुर्लक्षित घटक. पण तो जर चौकस आणि डोळसपणे भोवतालच्या घटनांकडे पाहू लागला आणि जागरूक नागरिक म्हणून रिॲक्ट होऊ लागला तर अनेकांसाठी पळता भुई थोडी होते. गोवा विमानतळावर ‘संत्या कुली'ने हा चमत्कार घडवला होता. त्याची ही त्यानेच सांगितलेली गोष्ट आहे. पत्रकारितेचं शिक्षण घेण्यासाठी लागणारे पैसे जमा करता यावेत आणि मुख्य म्हणजे सेलिब्रिटींना प्रत्यक्ष बघता यावं म्हणून संतोष मळवीकर यांनी हमालीच्या कामापासून आपल्या जीवनप्रवासाची सुरूवात केली होती. तो प्रवास आता भवतालच्या गैरकारभाराविरुद्ध आवाज उठवणारा सामाजिक कार्यकर्ता ते प्रथितयश वकील इथपर्यंत पोचला आहे. मुख्य म्हणजे हा साराच प्रवास अत्यंत रोमहर्षक आणि संघर्षशील घटनांनी भरलेला आहे. त्यातील ऐन उमेदीच्या काळात ‘कुली' म्हणून जगताना पुकारलेला व्यवस्थेविरुद्धचा संघर्ष या पुस्तकात आला आहे. साधा कुली म्हणून जगतानाही एखादा व्यक्ती किती नेक काम करू शकतो याची ही संघर्षकथा अनेकांसाठी प्रेरक ठरेल आणि त्याचा पुढचा प्रवास जाणून घेण्याची उत्सूकताही वाढवेल. Santya Kulee | Adv. Santosh Malvikar संत्या कुली | ॲड. संतोष मळवीकर
1984 by George Orwell
- Author Name:
George Orwell
- Book Type:

- Description: "जॉर्ज ऑरवेल की '1984' एक कालजयी साहित्यिक कृति है, जो निगरानी प्रचार और पूर्ण सत्तावादी नियंत्रण से घिरी एक भयावह दुनिया का चित्रण करती है। 'बिग ब्रदर' की सतत निगरानी में अपनी पहचान और मानवता को बचाने के लिए संघर्ष करते विंस्टन स्मिथ की कहानी के माध्यम से ऑरवेल ने स्वतंत्रता, सत्य और छाक्तिगत अस्तित्व के दमन की गहन पड़ताल की है। यह ऐतिहासिक उपन्यास सत्ता के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाठों पर तीखा विचार प्रस्तुत करता है, साथ ही मानव अधिकारों की नाजुकता और वास्तविकता के नियंत्रण की गहरी समझ प्रदान करता है। प्रतिरोध, सामंजस्य और प्रामाणिकता की सार्वभौमिक खोज पर आधारित इसके विषय आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने इसके पहली बार प्रकाशित होने पर थे। '1984' की प्रासंगिकता समय और संस्कृतियों की सीमाओं से परे जाती है और यह भारत की समकालीन सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं से भी गहराई से जुड़ती है।"
Sharbat
- Author Name:
Lucky Rajeev
- Book Type:

-
Description:
रज़िया ने चन्द्रप्रभा से आखिर में बस यही कहा, “न जाने समय और तारीख हमें कैसे मूल्यांकित करेगी क्रूर, ख़ुदगर्ज़ अमीरों या दकियानूसी उलेमा के नज़रिए से...या आम आदमी की हिफाज़त, ख़ुशी और ख़ुशहाली के लिए काम करने वाली सुलतान के रूप में...” अभी वह इतना कह ही पाई थी कि एक ज़बरदस्त वार तलवार का हुआ और ख़ून का ऊँचा फव्वारा फूट गया...देखते ही देखते रज़िया का सर धड़ से अलग हो गया...जैसे ही चन्द्रप्रभा के मुँह से हाय राम निकला हिन्दू भीड़ एकदम से सकते में आ गई और जब उन्हें ज्ञात हुआ कि मरने वाली रज़िया सुल्तान थी तब वे अफ़सोस में डूब गए...मगर अफ़सोस के अलावा अब कर भी क्या सकते थे? राजसत्ता शायद किसी की भी सगी नहीं होती और न जाने क्यों जाने-अनजाने ही कैसे-कैसे लोगों की शत्रुता आमंत्रित कर लेती है?
Hatya
- Author Name:
Hrideyesh
- Book Type:

- Description: सुपरिचित कथाकार हृदयेश ने इस उपन्यास में एक छोटे-से शहर की धड़कती ज़िन्दगी को केन्द्र बनाकर हत्या जैसे कृत्य के बहुआयामी चित्र प्रस्तुत किए हैं। शिवनारायण एक आदर्शवादी व्यक्ति है, और है शहर का एक नामी गुंडा चुन्नू जो मोहल्ले और शहर के निरीह लोगों पर जोर-जुल्म करता है। शिवनारायण उसकी इन हरकतों पर उत्तेजित होकर, उसके साथ कोई व्यक्तिगत शत्रुता न होते हुए भी, एक दिन उसकी हत्या कर देता है। मुक़दमा चलता है और अन्ततः शिवनारायण को फाँसी की सज़ा होती है। इस सारी प्रक्रिया में न केवल क़ानून का वास्तविक रूप उजागर होता है बल्कि हत्या के अनेक पहलू उभरकर सामने आते हैं। क़ानून की नज़र में हत्या सिर्फ़ एक आदमी के प्राण ले लेना है, जबकि हत्या व्यक्ति के चरित्र की, उज्ज्वल सम्भावनाओं की, अभिव्यक्ति पाने के लिए छटपटाती प्रतिभा की भी होती है। लेकिन समाज के कर्णधारों, सत्ता में बैठे लोगों और क़ानून के लिए हत्या के ये रूप चिन्तनीय नहीं हैं। ‘हत्या’ उपन्यास में लेखक ने इन सब पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया है।
Mukti -The Salvation
- Author Name:
Sanjay Sharma
- Rating:
- Book Type:

- Description: Can you take the law into your own hands and kill the rapist, extortionist, and murderer who has been hounding you and the entire basti where you lived? Can you—while assassinating the criminal in front of police and law—also castrate the man? Some women got together and did just that. The police never protected them nor did the local MLA help. In fact, these two entities also joined in exploiting these victims. Did they get caught? Were they sentenced? And why did the criminal behave the way he did? Why did he come to hate women? What made a boy turn into a rapist?
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book