Naveen Chaudhary
Khud Se Behtar | खुद से बेहतर - Career Mein Saphalata Ke 15 Sutra By Naveen Chaudhary - Hindi
- Author Name:
Naveen Chaudhary
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Book Type:

- Description: नौकरी पाने की क्षमता एक ज़रूरी कौशल है और नवीन ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है। व्यक्तिगत अनुभवों से उपजी यह किताब उन युवाओं के लिए अत्यधिक मूल्यवान है, जो खुद को बेहतर बनाना चाहते हैं और नौकरी के लिए तैयार होना चाहते हैं । यह ख़ुद के आकलन और कौशल विकास के जरिए वर्कप्लेस पर सफल होने के लिए बेहतरीन गाइड है। बसंत राठौड़ सीनियर वाइस प्रेसिडेंट - स्ट्रेटजी ब्रांड एंड बिजनेस डेवलपमेंट, दैनिक जागरण बदलते वक्त के साथ न हमारा पाठ्यक्रम बदला न परीक्षाएँ । पर नये युग में रोजगार के अवसर और योग्यताएँ लगातार बदल रही हैं। पात्रता की परिभाषा भी । आज के युवाओं को जिन सॉफ्ट स्किल्स की आवश्यकता है उनको विकसित करने में नवीन चौधरी की ये पुस्तक एक बेहतरीन गाइड का काम करेगी। नवीन का अपना जीवन ही इसका उदाहरण है। उन्होंने जो कुछ सीखा है इस पुस्तक में उड़ेल दिया है, ऐसी भाषा में कि जैसे कोई साथी समझाए इस नई दुनिया को नेविगेट करना। सहज, अति सुंदर और अत्यंत उपयोगी । - कमलेश सिंह सलाहकार, इंडिया टुडे ग्रुप
Khud Se Behtar | खुद से बेहतर - Career Mein Saphalata Ke 15 Sutra By Naveen Chaudhary - Hindi
Naveen Chaudhary
Dhaai Chal
- Author Name:
Naveen Chaudhary
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Book Type:

- Description: सत्ता की हिस्सेदारी के लिए कुछ तबकों के बीच ठनी वर्चस्व की लड़ाई, जिनकी तरफ देश की आम जनता बड़ी उम्मीदों से ताकती रहती है। एक बलात्कार को राजनीति की बिसात बना देने वालों की कहानी, जिनसे लोग न्याय के लिए साथ की अपेक्षा रखते हैं। धर्म, जाति, मीडिया और राजनीति के नेक्सस की एक ऐसी आपराधिक कथा जो किसी काल्पनिक या दूर की दुनिया की बात नहीं; बल्कि हमारे आसपास रोज़ घट रही घटनाओं का कच्चा चिट्ठा है। छल-प्रपंच और निजी सम्बन्धों के भीतर चल रहे राजनीतिक समीकरणों की एक ऐसी कथा जो चौंकाती तो है, लेकिन बेभरोसे की नहीं लगती। ‘ढाई चाल’ उपन्यास इस समय की राजनीति की रोमांचक कथा है। राजनीति जो घर और रिश्तों में जड़ें पसार चुकी है, राजनीति जो हमारे समय का सबसे बड़ा मनोरंजन है, राजनीति जो कि अब थ्रिलर है। यही कारण है साजिश और सस्पेंस—किताब के आख़िरी पन्ने तक पाठक को साथ बनाए रखते हैं।
Dhaai Chal
Naveen Chaudhary
Janata Store
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Naveen Chaudhary
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- Description:
नब्बे का दशक सामाजिक और राजनीतिक मूल्यों के लिए इस मायने में निर्णायक साबित हुआ कि अब तक के कई भीतरी विधि-निषेध इस दौर में आकर अपना असर अन्तत: खो बैठे। जीवन के दैनिक क्रियाकलाप में उनकी उपयोगिता को सन्दिग्ध पहले से ही महसूस किया जा रहा था लेकिन अब आकर जब खुले बाज़ार के चलते विश्व-भर की नैतिकताएँ एक दूसरे के सामने खड़ी हो गईं और एक दूसरे की निगाह से अपना मूल्यांकन करने लगीं तो सभी को अपना बहुत कुछ व्यर्थ लगने लगा और इसके चलते जो अब तक खोया था, उसे पाने की हताशा सर चढ़कर बोलने लगी।
मंडल के बाद जाति जिस तरह भारतीय समाज में एक नए विमर्श का बाना धरकर वापस आई, वह सत्तर और अस्सी के सामाजिक आदर्शवाद के लिए अकल्पनीय था। वृहत् विचारों की जगह अब जातियों के आधार पर अपनी अस्मिता की खोज होने लगी और राजनीति पहले जहाँ जातीय समीकरणों को वोटों में बदलने के लिए चुपके-चुपके गाँव की शरण लिया करती थी, उसका मौक़ा उसे अब शिक्षा के आधुनिक केन्द्रों में भी, खुलेआम मिलने लगा।
यह उपन्यास ऐसे ही एक शिक्षण-संस्थान के नए युवा की नई ज़ुबान और नई रफ़्तार में लिखी कहानी है। बड़े स्तर की राजनीति द्वारा छात्रशक्ति का दुरुपयोग, छात्रों के अपने जातिगत अहंकारों की लड़ाई, प्रेम त्रिकोण, छात्र-चुनाव, हिंसा, साज़िशें, हत्याएँ, बलात्कार जैसे इन सभी कहानियों के स्थायी चित्र बन गए हैं, वह सब इस उपन्यास में भी है और उसे इतने प्रामाणिक ढंग से चित्रित किया गया है कि ख़ुद ही हम यह सोचने पर बाध्य हो जाते हैं कि अस्मिताओं की पहचान और विचार के विकेन्द्रीकरण को हमने सोवियत संघ के विघटन के बाद जितनी उम्मीद से देखा था, कहीं वह कोई बहुत बड़ा भटकाव तो नहीं था? लेकिन अच्छी बात यह है कि इक्कीसवीं सदी के डेढ़ दशक बीत जाने के बाद अब उस भटकाव का आत्मविश्वास कम होने लगा है और नई पीढ़ी एक बड़े फ़लक पर, ज़्यादा वयस्क और विस्तृत सोच की खोज करती दिखाई दे रही है।